ऐसे किया घोटाला

गौरतलब है कि 4 मार्च 2016 को एमडीए की अवस्थापना निधि समिति की बैठक में सूरजकुंड तिराहे से मंगलपांडे नगर तक आबूनाले के किनारे डबल सर्किट 33 केवी लाइन से साइकिल ट्रैक में रुकावट के लिए उसे शिफ्ट करने का प्रस्ताव पास हुआ था. तत्कालीन प्राधिकरण उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने 2 करोड़ 73 लाख 17 हजार 750 रुपये के इस्टीमेट को मंजूरी दी थी. कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि इस दौरान ए-प्लस श्रेणी के 7 ठेकेदारों ने 23 सितंबर 2015 को टेंडर में हिस्सा लिया था, लेकिन टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया और बी क्लास के ठेकेदारों को शामिल कराने के लिए 6 जनवरी 2016 को अल्प कालीन टेंडर निकाले गए. इसके बाद प्रक्रिया के 15 जनवरी 2016 तक बढ़ा दिया गया. यहां बता दें कि बी क्लास ठेकेदारों को शामिल करने के बाद महज 3 ठेकेदारों ने ही बिड्स में हिस्सा लिया. और इनमें केवल मैसर्स आरसीसी डेवलपर्स को 0.02 प्रतिशत निम्न दर पर 2 करोड़ 29 लाख 97 हजार 206 रुपये पर ठेका दिया गया. जिस पर सवाल उठ रहे हैं.

दरों में खेल

बिजली केबिल की खरीद दर 4,282 रुपये प्रति मीटर दर्शायी गई है. जबकि कमिश्नर की जांच में यह दर 2,088 रुपये प्रति मीटर निकली, दूसरे कुटेशन में जीएसटी सहित 1,810 रुपये प्रति मीटर आई. जो दर्शाई गई कीमत की आधी थी. एमडीए ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की 2008 में हुई खरीद से कॉपी किया है. ऐसे में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में घपले के सवाल उठ रहे हैं.

जमकर किया घालमेल

ठेकेदार और प्राधिकरण के अधिकारियों ने लाइन शिफ्टिंग के नाम पर 1.45 करोड़ की आर्थिक क्षति पहुंचायी. इसके अलावा अतिरिक्त आयकर, वैट एवं सैस के रूप में 11,06,877 रुपये का भुगतान इनकम टैक्स विभाग को किया. पीवीवीएनएल के अधिकारियों से तकनीकी रूप से कायरें को सत्यापित कराए बिना ही 18 लाख 80 हजार 452 लाख रुपये भुगतान सुपरविजन चार्जेस के रूप में कर दिया. जबकि यह कार्य अभी तक हुआ भी नहीं है.

12 के खिलाफ मुकदमा

एमडीए के अधिशासी अभियन्ता (विद्युत/यांत्रिक)अजय कुमार सिंह की तहरीर पर थाना सिविल लाइन्स में तत्कालीन एमडीए वीसी समेत 12 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के आधार पर करीब 1.85 करोड़ धनराशि का गबन के आरोप में तत्कालीन उपाध्यक्ष राजेश कुमार, तत्कालीन सचिव अवनीश कुमार शर्मा, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता एससी मिश्र, अधीक्षण अभियन्ता एपी सिंह, तत्कालीन अधिशासी अभियन्ता शबी हैदर, सहायक अभियन्ता अमर प्रताप सिंह, सहायक अभियन्ता (विद्युत) एसएन मिश्र, एपी सिंह, जेई अनिल कुमार मेहरा, रविन्द्र सिंह, चाणक्य जोशी और ठेकेदार मैसर्स आरसी डेवलपर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. सीओ सिविल लाइन्स को जांच अधिकारी बनाया गया है.

कार्यालय में बुलाकर पकड़वाया

कमिश्नर ने तीनों आरोपी एमडीए इंजीनियरों को कमिश्नरी में बुलाया और थाना सिविल लाइन्स पुलिस को सौंप दिया. सभी 12 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत धारा 13 में मुकदमा दर्ज किया गया है.