बिल्डर ने मानकों को ताक पर रख कमर्शियल भूखंड पर बेसमेंट, दुकाने और फ्लैट बनाकर बेचे थे

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 420 में दर्ज किया था मुकदमा, तीन महीने से पुलिस कर रही था तलाश

Meerut. आवास-विकास की करोड़ों की प्रॉपर्टी के फर्जी कागजात बनाकर बेचने वाले बिल्डर को आखिरकार नौचंदी पुलिस ने करीब 3 माह बाद गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इस मामले को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था. इतना ही नहीं खबर प्रकाशित होने के बाद इस मामले में आवास-विकास ने बिल्डर के खिलाफ मुकदमा कायम कराया था और संपत्ति अधिकारी समेत एक लिपिक के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई थी.

जरा समझ लें..

दरअसल, आवास-विकास द्वारा 2015 में जागृति विहार स्थित कमर्शियल भू-खंड संख्या 7 कॉम-1 को रंजना एसोसिएट के पार्टनर पंकज गुप्ता को आवंटित किया गया था. इस संपत्ति के एवज में करीब 2 करोड़ 53 लाख रुपये की किश्त आवंटी को जमा करनी थी. मगर किश्त जमा किए बिना ही बिल्डर ने कमर्शियल भूखंड पर मानकों को ताक पर रखकर बेसमेंट, दुकाने और फ्लैट बना बेच दिए थे. इस घोटाले का खुलासा दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने किया. इसके बाद मामले की जांच हुई तो इसमें साढ़े चार करोड़ रूपये का घोटाला सामने आया.

दर्ज कराया था मुकदमा

इतना ही नहीं दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की खबर का ही ये असर हुआ कि तत्कालीन संपत्ति अधिकारी नरेश बाबू और वरिष्ठ लिपिक मनोहर बाबू की इस घोटाले में भूमिका भी सामने आ गई. इसके बाद तत्कालीन संपत्ति अधिकारी नरेश बाबू ने अपना बचाव करते हुए बिल्डर पंकज कुमार गुप्ता पर धोखाधड़ी का मुकदमा कायम करा दिया. इसके बाद से पुलिस पंकज कुमार गुप्ता आरोपी की तलाश कर रही थी लेकिन वह हाथ नहीं आ सका. इस मामले में विभाग द्वारा संपत्ति अधिकारी का ट्रांसफर कर दिया गया और लिपिक को सस्पेंड कर दिया गया था. बावजूद इसके वरिष्ठ लिपिक मनोहर पर कई बार विभागीय कार्रवाई और दो भ्रष्टाचार के मामले होने के बावजूद वह ऑफिस में बैठकर कार्य कर रहा है. हालांकि विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस मामले में अभी जांच चल रही है.

आवास-विकास में संपत्ति अधिकारी रहे नरेश बाबू ने धोखाधड़ी का मुकदमा पंकज गुप्ता के खिलाफ दर्ज कराया था. इस मामले में पंकज गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है.

तपेश्वर सागर, इंस्पेक्टर, नौचंदी थाना