आगरा. एसएन मेडिकल कॉलेज को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की कवायद जोरों पर है. करोड़ों रुपये सरकार की ओर से एसएन पर खर्च किए जा रहे है, लेकिन मूलभूत आवश्यकताओं से एसएन आज भी वंचित है. दिव्यांगों, लाचार अन्य लोगों के लिए यहां कोई व्यवस्थाएं नही है. व्हील चेयर इतनी हैं कि उसके लिए मारामारी है. अधिकतर व्हील चेयर अस्थि रोग ओपीडी में ही लगी रहती है जिस कारण मेडिसन, सर्जरी अन्य व ओपीडी में दिखाने आए मरीजों को लोग उठा कर ले जाते है. दिव्यांगों एवं उन लोगों के लिए ओपीडी तक जाना और मुश्किल हो जाता है जो अपने पैरों से लाचार है.

ढाई सौ मरीज पर है चार व्हील चेयर

एसएन में इस समय चार व्हील चेयर हैं, जबकि हर रोज ओपीडी में करीब ढाई सौ मरीज आते हैं. इसमें अस्थि रोग में ही 60 से 70 मरीज प्रतिदिन आते हैं. ऐसे में इतने मरीजों पर मौजूद व्हील चेयर मिल पाना मुश्किल हो जाता है. मरीजों को दिखाने के लिए कभी-कभी परिजन अपने मरीज को गोद में उठाकर ले जाया करते है.

एसएन की है बस दो व्हील चेयर

एसएन मेडिकल कॉलेज की तीमारदारों के लिए महज दो व्हील चेयर उपलब्ध कराई गई है. जिसमें से वर्तमान में दोनों टूटी पड़ी हुई है. मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए संस्था सत्यमेव जयते ने चार व्हील चेयर करीब ग्यारह माह पहले दान की थी. जिसको लेने के लिए हर तीमारदार को लंबा इंतजार करना पड़ता है.

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केस नं. 1

बुढ़ापे में हर कोई सहारा छोड़ देता है. मुश्किलें तब और बढ़ जाती है जब बूढ़ा शरीर बीमार पड़ने लगता है. शुक्रवार को ओपीडी की भीड़ में सांस और बलगम जमने से जूझ रहे 65 वर्षीय टेक चंद दिखाने आए तो उन्हे धक्के और भीड़ की मारामारी का सामना करना पड़ा. करीब छह वर्ष पूर्व पैर पर गाड़ी चढ़ जाने के कारण टेक चंद की पैरों की नसें ब्लॉक हो गई थी. जिस कारण वह विकलांग हो गए. डॉक्टरों ने इलाज में खर्चा बताया. गरीब टेक चंद पैसों के अभाव में इलाज नही करा पाए. टेक चंद जमीन पर घिसट-घिसट कर चलकर अकेले शुक्रवार को ओपीडी पहुंचे, जहां घंटो इंतजार के बाद भी कोई व्हील चेयर नही मिली. सत्यमेव जयते के कार्यकर्ताओं ने बूढ़े टेक चंद को ओपीडी तक पहुंचाकर इलाज करवाया.

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केस नं. 2

खासपुरा निवासी सोमवती अपने पति के साथ ओपीडी में इलाज कराने आई थी. दोनों ही विक लांग थे. ओपीडी का ऑनलाइन पर्चा बनवाने के लिए दोनों को लगातार दरनिकार किया जा रहा था. 45 वर्षीय सोमवती अपने पति से भी ज्यादा विकलांग थी. ऐसे में ओपीडी तक पहुंचने के लिए विकलांग दंपतियों को कोई व्हील चेयर नही मिली. भीड़ की धक्कामुक्की में सोमवती को किनारे बिठाकर स्वंय पर्चा बनवाया. सत्यमेव जयते के वॉलिंटियर ने मरीज को डॉक्टर तक पहुंचाया, जहां उसे काफी मशक्कत के बाद डॉक्टरों ने देखा और इलाज प्रक्रिया शुरू की.