-सीएम ने 9 पॉलिसीज का किया इनॉग्रेशन

-अभी तक 74 हजार करोड़ रुपए के निवेश के मिले प्रपोजल

-60 हजार करोड़ के प्रपोजल को लेकर हो चुका एमओयू साइन

देहराूदन, सूबे में पहली बार आयेाजित हो रही इनवेस्टर्स समिट 2018 के लिए सरकार पुरजोर कोशिशों पर जुटी है. खुद सीएम से लेकर चीफ सेक्रेटरी और तमाम महकमे युद्धस्तर पर तैयारियां कर रहे हैं. शुक्रवार को सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए तमाम विभागों द्वारा तैयार की गई 9 पॉलिसीज को लॉन्च किया.

ये पॉलिसीज की गईं लॉन्च

- वृहत् औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2018

-उत्तराखंड सौर ऊर्जा नीति

-उत्तराखंड आयुष नीति 2018

-बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी 2018-23

-पिरूल व अन्य प्रकार के बायोमास से विद्युत उत्पादन नीति-2018

-उत्तराखंड एरोमा नीति 2018

-ऑप्टीकल फाइबर व मोबाईल टावर स्थापना नीति

-उत्तराखण्ड इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माणक ईवी उपयोग संवर्धन और संबंधित सेवा अवसंरचना नीति 2018

-उत्तराखंड पर्यटन नीति 2018 शामिल

इनवेस्टर्स समिट पर पूरा फोकस

- 7 व 8 अक्टूबर को दून में होने वाली इनवेस्टर्स समिट के लिए देश भर में किए गए रोड शो.

-प्रमुख उद्योगपतियों व औद्योगिक संगठनों से बातचीत में मिले महत्वपूर्ण सुझाव

-अन्य राज्यों में निवेश के लिए बनाई गई नीतियों का हुआ अध्ययन

-राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करने को तमाम क्षेत्रों की पहचान करते हुए नई नीतियां बनाई गईं

-उद्यमियों से मिले सुझावों को भी शामिल किया गया

-इनवेस्टर्स समिट 2018 के लिए किया गया व्यापक होमवर्क

- एक माह में 5 बार कैबिनेट की बैठक हुई आयोजित

40 हजार करोड़ निवेश का था लक्ष्य

सीएम ने कहा कि समिट 2018 के लिए शुरू में 40 हजार करोड़ के एमओयू होने का अनुमान लगाया जा रहा था. लेकिन तमाम आयेाजन, रोड़ शो के जरिए संपर्क हो पाए और बेहतर रिस्पांस मिल पाया. यही वजह रही कि अब तक राज्य में 74 हजार करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव हासिल हुए हैं, जबकि 60 हजार करोड़ रुपए के एमओयू पूरे हो चुके हैं.

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पहाड़ के जिलों में प्राथमिकता

सरकार का दावा है कि उत्तराखंड डेस्टीनेशन: इनवेस्टर्स समिट-2018 से प्रदेश में निवेश के दृष्टिकोण से नए युग का सूत्रपात होगा. पर्वतीय क्षेत्रों का विकास सरकार की प्राथमिकता में है. सौर ऊर्जा, फूड प्रॉसेसिंग, हर्बल, ऑर्गेनिक, आयुष व पर्यटन में होने वाले निवेश से स्पेशल हिल एरियाज को लाभ मिलेगा. उद्यमियों ने इन क्षेत्रों में बेहतर रुचि दिखाई है. सोलर पावर नीति में 5 मेगावाट तक के प्रोजेक्ट में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिलेगी. पिरूल व अन्य प्रकार के बायोमास से विद्युत उत्पादन के लिए नीति-2018, पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण होगी.

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सीएम बोले, लैंड की कमी नहीं

सीमए ने कहा है कि इंडस्ट्रियल यूनिट्स स्थापित होने के लिए किसी प्रकार से भूमि की कमी नहीं है. पर्याप्त भूमि है. कुछ और क्षेत्रों का भी चयन किया गया है. हिल एरियाज के डिस्ट्रिक्ट में पहले से ही लघु औद्योगिक आस्थान स्थापित हैं. डीएम को और भी भूमि चयनित करने के निर्देश दिए गए हैं. ऑल वेदर रोड व रेल पर राज्य में काम चल रहा है. हवाई कनेक्टिवीटी भी बढ़ी है.