क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: समाज में फैली कुरीतियों को मिटाने के लिए कई एनजीओ और संस्थाएं है, जो स्लोगन, नुक्कड़-नाटक आदि के जरिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं. लेकिन, इन्हीं के साथ अब एक टीचर का भी नाम जुड़ गया है. डायन प्रथा व बांझपन के खिलाफ बनी फिल्म फुलमनिया में उनके छोटे से रोल ने कई लोगों के मन मस्तिष्क को झकझोरने का काम किया है. यह टीचर और कोई नहीं, बल्कि सिटी के केरलि स्कूल की शिक्षिका किम मिश्रा हैं. इनके मुताबिक, वो बच्चों को शिक्षित तो कर ही रही हैं, लेकिन अब पर्दे के जरिए भी पूरी दुनिया में जागरुकता लाना चाहती हैं. साधारण परिवार की किम मिश्रा ने फिल्म में छोटी सी भूमिका कर सलाह वाली भाभी के रूप में अलग पहचान बनाई है. एक मासूम खून से लथपथ रोती-बिलखती अपनी लाज बचाने की कोशिश करती है. यह दृश्य दर्शकों की आंखों में आंसू भरनेवाला है.

डायन प्रथा पर चोट करती है फिल्म

बकौल, किम मिश्रा फुलमनिया व‌र्ल्ड क्लास मूवी है. एक सच्ची घटना पर आधारित है कि कैसे एक मासूम लड़की को डायन बताकर सरेआम नंगा करके गांव से बाहर कर दिया जाता है. यह फिल्म एक बांझ औरत के दर्द को और बेटा-बेटी एक समान को दर्शाती है. वह कहती हैं कि ये फिल्म ऐसी घटनाओं पर आधारित हैं जो सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में देखने को मिल रहे हैं. ऐसे में इस कुप्रथा के खिलाफ मुहिम चलना अश्लीलता नहीं है. ऐसी कोई घटना होती है तब कोई आवाज क्यों नहीं उठाता है. मैंने हमेशा अपने सीरियल और फिल्म के माध्यम से ज्वलंत मुद्दों को उठाया है. चाहे वो नक्सल समस्या हो या महिला तस्करी हो. जिन लोगो ने फेस्टिवल में इस फिल्म को देखा है उनसे राय ली जा सकती है.