परिषदीय स्कूलों में समायोजन व स्थानांतरण नीति का नहीं दिखा असर

एकल विद्यालयों को नहीं मिल सके जरूरत के अनुसार शिक्षक

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PRAYAGRAJ: बेसिक शिक्षा ्रूपरिषद की ओर से संचालित परिषदीय स्कूलों की स्थित में फिलहाल सुधार होता नहीं दिख रहा है. परिषदीय स्कूलों की स्थानांतरण व समायोजन नीति पर शिक्षकों की नाराजगी भारी पड़ी है. लगातार दूसरे वर्ष शासन जिले के अंदर छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों का समायोजन करने में फेल साबित हुआ है. इसका नतीजा ये होगा कि वर्षो से एक ही स्कूल में जमे शिक्षक आगे भी जमे रहेंगे, जबकि वहां जरूरत से अधिक शिक्षकों की तैनाती है. दूसरी ओर जहां शिक्षकों की कमी है वहां वैसे ही बनी रहेगी.

हाई कोर्ट ने लगाई थी रोक

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल स्तर के स्कूलों में शिक्षकों के तबादलों का पेच फंसा हुआ है. हाईकोर्ट ने सितंबर में ही स्थानांतरण व समायोजन प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी. इसका असर उन स्कूलों में भी दिखा, जहां आदेश के बाद थोड़ा फेरबदल हुआ था. ऐसे स्कूल फिर से पुरानी स्थिति में पहुंच गए हैं. सूबे में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं, जहां शिक्षकों व स्टूडेंट्स का अनुपात असंतुलित है. इसका असर स्कूलों के पठन-पाठन पर पड़ रहा है और कई स्कूल एकल शिक्षक या शिक्षक विहीन हो जाएंगे. समायोजन आदेश कामूल यही था कि जो स्कूल शिक्षकों के बिना बंद हैं या एकल हैं, वहां पहले शिक्षक भेजे जाएं. यह कमी उन विद्यालयों से पूरी होनी थी, जहां छात्र संख्या के हिसाब से शिक्षक अधिक हैं.

तबादलों की दूसरी सूची पर मौन

परिषदीय शिक्षकों का अंतर जिला तबादला आदेश 13 जून को जारी हुआ. इसमें सिर्फ 11963 शिक्षकों को मनचाहे स्कूलों में जाने का मौका मिला, जबकि आवेदकों की संख्या 37396 रही. 40766 पद उपलब्ध थे. इसमें गंभीर रूप से रोगी, दिव्यांग शिक्षकों तक की अनदेखी हुई. साथ ही कई ऐसे जिले थे, जहां रिक्त पदों से अधिक शिक्षकों का तबादला किया गया. विरोध पर आपत्तियां ली गई लेकिन, दूसरी सूची अब तक जारी नहीं हो सकी है.