मुंबई (प्रियंका सिंह)। विद्या बालन ने पिछले दो वषरें में उन्होंने साउथ की फिल्में की हैं। एन टी रामा राव की बायोपिक के अलावा उन्होंने 'पिंक' फिल्म के तमिल वर्जन में भी गेस्ट अपीयरेंस किया। विद्या अपनी फिल्मों को लेकर बेहद चूजी रही हैं। 'मिशन मंगल' उनके कॅरियर की दूसरी ऐसी फिल्म रही जिसकी कहानी सुनने के बाद ही उन्होंने तुरंत हां कर दी थी। उनसे बातचीत के अंश..

सवाल : फिल्म में एक संवाद है कि अगर रिक्शा वाला चाहे तो वह कहीं पर भी जा सकता है। यह बात जीवन पर कितना लागू होती है?
जवाब : यह मेरे जीवन का मंत्र रहा है। लोग किस्मत और नसीब की बातें करते हैं। मुझे लगता है कि यह सब हमारे हाथ में ही होता है। हम अपनी जिंदगी के साथ क्या करना चाहते हैं, इसका निर्णय केवल हम ले सकते हैं। उस निर्णय को लेने के बाद उस राह पर आगे बढ़ना भी हमारा ही काम है। कोई और हमारे लिए यह काम नहीं कर सकता है।

सवाल : दो वर्ष बाद आपकी फिल्म आई है। इस दूरी की क्या वजह रही?
जवाब : ऐसा बहुत कम ऐसा होता है कि मैं फिल्मों की स्कि्रप्ट सुनते ही उसके लिए हामी भर दूं। 'मिशन मंगल' की स्कि्रप्ट ऐसी थी कि मैंने कहानी सुनने के अंत में हां कर दी। मुझे मंगल यान के बारे में जानकारी थी कि कम पैसे में यह मिशन पूरा हुआ था। इस विषय पर मुझे पहले भी तीन फिल्में ऑफर हो चुकी थीं। जब आर बाल्की और जगन शक्ति इस फिल्म को लेकर मेरे पास आए, तब मुझे महसूस हुआ कि वैज्ञानिकों ने किन परेशानियों का सामना किया है। दुनिया भर के लोग यही मानते थे कि यह नामुमकिन है। न्यू यॉर्क टाइम्स में एक कार्टून छपा था, जहां एलीट स्पेस क्लब के बाहर एक हिंदुस्तानी किसान अपनी गाय के साथ खड़ा था। भारत के लिए बाहरी देशों का यह नजरिया था कि इनसे कुछ नहीं हो पाएगा। इस नजरिये की वजह से हम अपना आत्मविश्वास खो सकते थे, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने उन मुश्किलों का डटकर सामना किया। नामुमकिन को मुमकिन करने का नजरिया मेरा भी रहा है। इसलिए मुझे स्कि्रप्ट पसंद आ गई। मेरा मानना है कि नजरिया सही हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।

सवाल : इसके अलावा और कौन सी फिल्म थी, जिसकी स्कि्त्रप्ट सुनने के बाद आपने तुरंत हां कर दी थी?
जवाब : वह फिल्म थी 'हमारी अधूरी कहानी'। महेश भट्ट साहब ने मुझे स्कि्रप्ट की एक ही लाइन सुनाई थी। मैं भट्ट साहब के साथ काम करना चाहती थी। वह अब फिर से निर्देशन कर रहे हैं, लेकिन उस फिल्म के दौरान उनका निर्देशन का कोई इरादा नहीं था। वह फिल्म के लेखक थे। मैं इस बात से खुश थी कि उनके साथ काम कर पाऊंगी।फिल्म में होम साइंस के कॉन्सेप्ट से एक मिशन को पूरा किया जा रहा है।

सवाल : वास्तविक जीवन में यह कॉन्सेप्ट में कितना चलता है?
जवाब : जुगाड़ करना हिंदुस्तानियों को बहुत अच्छे से आता है। जुगाड़ का मतलब गोलमाल से बिल्कुल नहीं है। हिंदुस्तानी खुद को एक सोच में कैद नहीं करते हैं। हमेशा रास्ता और समस्या का समाधान ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं। हम सभी गृहणियों को बहुत सी चीजें संभालनी होती हैं। ऐसे में होम साइंस और जुगाड़ मदद करता है।जिस तरह से वैज्ञानिक प्रयोग करते हैं। उसी तरह कलाकार भी अपने काम के साथ प्रयोग करते रहते हैं।

सवाल : समाज में दोनों के योगदान को कैसे देखती हैं?
जवाब : वैज्ञानिकों के प्रयोग दुनिया को बदल सकते हैं। कलाकार का प्रयोग उसके कॅरियर को आगे बढ़ाता है। वैज्ञानिकों का योगदान बहुत ज्यादा है। समाज में हमारा योगदान भी है, क्योंकि हम लोगों का मनोरंजन करते हैं। उन्हें कुछ देर के लिए खुशी के पल देते हैं।आप जल्द ही गणितज्ञ शकुंतला देवी का किरदार निभाएंगी।

सवाल : आपके द्वारा निभाए गए ये किरदार निजी जीवन में किस तरह का बदलाव लाते हैं?
जवाब : मेरे जीवन पर हर किरदार का प्रभाव रहा है। मेरी फिल्म का हर किरदार मुझे कुछ न कुछ सिखाता है और मुझमें कुछ तब्दीलियां लाता है। मैं भी होममेकर हूं। 'मिशन मंगल' की होममेकर की तरह मेरे जीवन में भी कई चुनौतियां हैं। वह अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को संभालते हुए अपना काम भी करती है। मैं भी यह सब करती हूं।

सवाल : आपकी तरह ही कंगना रनोट, तापसी पन्नू सहित कई अभिनेत्रियां महिला सशक्तिकरण को दर्शाती फिल्मों का हिस्सा बन रही हैं..
जवाब : समाज में महिलाओं को लेकर नजरिया बदल रहा है, इसलिए हिंदी सिनेमा में भी वह बदलाव नजर आ रहा है। फिल्में समाज का आइना है। आज बॉलीवुड में बन रही फिल्मों की कोई कहानी ऐसी नहीं हो सकती है, जिसमें बदलाव न दिख रहा हो। ज्यादातर लड़कियां अपनी जिंदगी अपनी शतरें पर जीना चाहती हैं। वे खुद के दम पर जीवन जी सकती है। यही वजह है कि महिला केंद्रित फिल्में अब ज्यादा बन रही हैं और सफल भी हो रही है। इसलिए सशक्त अभिनेत्रियों को उसमें काम करने का मौका मिल रहा है।

सवाल : आप पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन पर आधारित वेब सीरीज में भी काम कर रही हैं। उसका काम कहां तक पहुंचा है?
जवाब : इंदिरा गांधी पर बनने वाली वेब सीरीज पर अभी बहुत वक्त लगेगा। मैं मायूस नहीं होना चाहती हूं। विश्वास रखना चाहती हूं कि जब भी वह वेब सीरीज बनेगी, अच्छी ही बनेगी। आपकी शॉर्ट फिल्म 'नटखट' भी महिला सशक्तिकरण की बात करेगी? हां, 'नटखट' की शूटिंग खत्म हो चुकी है। उम्मीद है कि साल के अंत तक वह भी रिलीज हो जाएगी।

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