हाईकोर्ट का आदेश, 22 जुलाई से होने वाली परीक्षा में शामिल करें

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प्राइवेट आइटीआइ संस्थानों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दे दी है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि पांच अक्टूबर 2018 से पहले प्रवेश ले चुके सभी छात्रों को 22 जुलाई से शरू होने जा रही परीक्षा में बैठने दिया जाए. यह आदेश जस्टिस अजय भनोट ने डॉ. वीरेंद्र स्वरूप प्राइवेट आइटीआइ सहित कई अन्य याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है.

छात्रों को जारी नहीं हुआ प्रवेश पत्र

एनसीवीटी के पोर्टल पर ब्योरा अपलोड न होने के कारण छात्रों को प्रवेश पत्र जारी नहीं हो सका. इससे वह परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे थे. याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी सिंह, आरसी सिंह, संजीव सिंह, शिव सागर सिंह, एससीवीटी के अधिवक्ता पंकज पटेल व भारत सरकार के अधिवक्ता कृष्ण जी शुक्ल, बृजेश श्रीवास्तव, दीपमाला श्रीवास्तव ने पक्ष रखा. कोर्ट ने आइटीआइ छात्रों को परीक्षा में बैठने की छूट देते हुए कहा है कि 22 जुलाई के बाद छात्रों का ब्योरा अपलोड किया जाए. बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रक्रिया को इस सत्र में अनिवार्य रूप से लागू करने को शिथिल करते हुए कोर्ट ने कहा है कि इसे भविष्य में सत्र की शुरुआत से लागू किया जाए. इस आदेश से संस्थानों की लापरवाही के कारण परीक्षा में बैठने से वंचित हो रहे हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है.