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ALLAHABAD: देश का मान बढ़ाने का वक्त जब भी सामने आया है, इलाहाबादी कभी पीछे नहीं रहे। जकार्ता में 18 अगस्त से शुरू हो रहे एशियाड गेम्स में शामिल जिले के तीन मेधावी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह खिलाड़ी हैं जिम्नास्ट आशीष कुमार, सिद्धार्थ वर्मा और हॉकी प्लेयर गुरजीत कौर हैं।

मेडल के लिए कर रहे संघर्ष
हर चार साल बाद एशियाड गेम्स होते हैं। इस बार इंडोनेशिया जकार्ता में चल रहे 18वें एशियाड गेम्स में इलाहाबाद के जिम्नास्ट आशीष कुमार भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह 2010 में आयोजित एशियाड गेम में कांस्य पदक विजेता रहे हैं। इस उपलब्धि के लिए उन्हें प्रदेश सरकार ने 2011 में पुरस्कृत भी किया था। 18वें एशियाड में इस बार जिले के नए जिम्नास्ट सिद्धार्थ वर्मा भी भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इतना ही नहीं एनसीआर में तैनात हॉकी प्लेयर गुरजीत भी 18वें एशियाड गेम में देश का नाम रोशन कर रही हैं। गौरतलब है कि गुरजीत मूल रूप से पंजाब की रहने वाली हैं।

ये जीत चुके हैं मेडल
इनके पहले भी जिले के कई खिलाड़ी एशियाड में देश का नाम रोशन कर चुके हैं। इसमें हॉकी प्लेयर पुष्पा श्रीवास्तव का नाम सबसे ऊपर है। वे बताती हैं कि दसवें एशियाड गेम्स में उन्होंने देश के लिए कांस्य पदक जीता था। जिले के हॉकी प्लेयर दानिश मुज्तबा दो बार एशियाड गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 2010 में चीन आयोजित एशियाड में उनकी टीम ने ब्रांज और 2014 में कोरिया में हुए एशियाड में गोल्ड जीता था। इतना ही नहीं बुसान एशियाड 2002 में हैमर थ्रोअर प्रमोद तिवारी ने देश का प्रतिनिधित्व किया था। यहां उन्होंने छठा स्थान हासिल किया था।

नाम गेम वर्ष

पुष्पा श्रीवास्तव हॉकी 1986

दानिश मुर्तजा हॉकी 2010

प्रमोद तिवारी हैमर थ्रो 2002

आशीष कुमार जिम्नास्टिक 2010

आशीष कुमार जिम्नास्टिक 2018

सिद्धार्थ वर्मा जिम्नास्टिक 2018

गुरजीत हॉकी 2018

06

जगहों पर जिले में तराशे जा रहे हैं एथलीट।

10

स्थानों पर हॉकी की जिले में दी जाती है ट्रेनिंग

08

जगह जिले में जिम्नास्टिक का दिया जाता है प्रशिक्षण

इसलिए नहीं बढ़ पाते आगे

-सरकार द्वारा खिलाडि़यों की लगातार उपेक्षा

-ख्.िालाडि़यों को निर्धारित डाइट समय से न मिल पाना।

-आर्थिक तंगी व अच्छी कोचिंग और अच्छे कोच का अभाव।

-खिलाडि़यों में बड़े लेवल पर खेलने के लिए इच्छाशक्ति का अभाव।

-खेल के प्रति लोगों में जागरुकता का अभाव।

जिले में कुछ प्राइवेट कोचिंग भी हैं। हमारे स्टेडियम में जिम्नास्टिक्स, हॉकी और एथलेटिक्स की सभी सुविधाएं हैं। एशियाड तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत व प्रैक्टिस करनी पड़ती है। जो ऐसा कर पाते हैं वे खेल भी रहे हैं।

-संजय शर्मा, प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी अमिताभ बच्चन स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स म्योहाल