-यूपी बोर्ड के ज्यादातर एडेड स्कूलों में प्रैक्टिकल के लिए बेहतर लैब का नहीं है इंतजाम

-मेंटेनेंस की कमी के बीच किसी तरह प्रैक्टिकल की प्रैक्टिस करते हैं स्टूडेंट्से

prakshmani.tripathi@inext.co.in

PRAYAGRAJ: साइंस की फील्ड में आगे बढ़ने के लिए हमेशा स्टूडेंट्स को मोटिवेट किया जाता है। रिसर्च के लिए इंस्पायर किया जाता है। लेकिन इस दिशा में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी दूर करने की बात नहीं होती। सूबे के ज्यादातर एडेड स्कूलों के साइंस लैब का हाल बदहाल है। यहां पर जरूरी इक्विपमेंट्स तक मौजूद नहीं हैं। ऐसे में भविष्य के कलाम कैसे निखरेंगे, इस बात पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने रियलिटी चेक किया तो सच्चाई कुछ यूं सामने आई।

साफ-सफाई तक नहीं

दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट रिपोर्टर पहुंचा सिविल लाइंस के बिजली घर एरिया में स्थित एंग्लो बंगली इंटर कॉलेज। यहां पर साइंस लैब का हाल खस्ताहाल दिखा। सबसे बेकार हालत तो केमिस्ट्री लैब में देखने को मिली। यहां मेंटनेंस तो दूर की बात साफ-सफाई और रोशनी का भी इंतजाम नहीं था। इन सारी अव्यवस्थाओं के बीच स्टूडेंट्स 15 दिसंबर से होने वाले प्रैक्टिकल एग्जाम की तैयारी में जुटे नजर आए। केमिस्ट्री की लेक्चरर शुभांकर दत्ता ने बताया कि स्कूल के लैब के लिए जरूरी सामानों और अच्छे इंतजाम के लिए स्कूल फंड में पर्याप्त पैसे नहीं होते हैं। ऐसे में जो जरूरी प्रैक्टिकल होते हैं, उनके लिए किसी तरह से स्कूल फंड से पैसे खरीदे जाते हैं। कोशिश की जाती है कि स्टूडेंट्स के लिए प्रैक्टिकल की अच्छी प्रैक्टिस हो सके।

सॉल्ट लाएं या सीसीटीवी लगवाएं

स्कूल के लैब में अव्यवस्था को लेकर प्रिंसिपल स्वास्तिक बोस से पूछने पर उन्होंने बताया कि इस मद में कोई बजट नहीं आता है। सोसाइटी समय-समय पर मेंटेनेंस की कोशिश करती है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं होता है। जो बजट स्कूल के फंड में सोसाइटी से मिलता है, उससे जरूरी सॉल्ट व एप्रेंटस ही जरूरत के लिए खरीदा जा सकता है। ऐसे में सीसीटीवी कैमरे आदि लगवाने का भी प्रेशर है तो बजट कहां से आए। सीसीटीवी कैमरा और वॉयस रिकॉर्डर लगवाने में ही काफी बजट की जरूरत है। वहीं 2011 से चतुर्थ श्रेणी के एंप्लॉयीज का अप्वॉइंटमेंट भी बंद हो गई है। ऐसे में मेंटेनेंस के लिए भी कोई कर्मचारी स्कूल में नहीं है। अल्पसंख्यक स्कूल होने के कारण आउटसोर्सिग से भी किसी को नहीं रखा जा सकता है। ऐसे में स्कूल पर दोहरी मार पड़ रही है।

स्कूल के पास पहले से बजट की कमी है। सरकार से किसी भी प्रकार का इस मद में कोई बजट नहीं है। ऐसे में समय के साथ मेंटेंनेस कराना कहां से संभव है।

-स्वास्तिक बोस

प्रिंसिपल, एग्लो बंगाली इंटर कालेज

अत्यधिक जरूरी सामानों के जरिए प्रैक्टिकल कराने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में बेहतर प्रैक्टिकल के लिए कई मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। जिसके लिए कदम उठाया जाना चाहिए।

-शुभांकर दत्ता

केमिस्ट्री लेक्चरर, एग्लो बंगाली इंटर कॉलेज

Posted By: Inextlive

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