38,000 रुपए प्रति दस ग्राम टैक्सेबल गोल्ड रेट

35,000 रुपए प्रति दस ग्राम विदाउट टैक्सेबल गोल्ड

-एक जनवरी से सरकार हॉलमार्क ज्वैलरी को करने जा रही है अनिवार्य

<फ्8,000 रुपए प्रति दस ग्राम टैक्सेबल गोल्ड रेट

फ्भ्,000 रुपए प्रति दस ग्राम विदाउट टैक्सेबल गोल्ड

-एक जनवरी से सरकार हॉलमार्क ज्वैलरी को करने जा रही है अनिवार्य

PRAYAGRAJ: PRAYAGRAJ: हर कोई सोना खरीदना चाहता है। लेकिन सोना हमेशा खरा नहीं होता है। सोने के नाम पर चल रहे खेल को खत्म करने के लिए गवर्नमेंट एक जनवरी से हॉलमार्क ज्वैलरी को अनिवार्य करने जा रही है। इससे कस्टमर्स को गोल्ड की अश्योरिटी मिलेगी। साथ ही हॉलमार्क होने से इसके क्लेम संबंधी बेनेफिट्स भी मिलेंगे।

कस्टमर को नहीं पता हॉलमार्किंग

हॉलमार्किंग को लेकर सरकार तमाम कोशिशें करती रही है। लेकिन इसके बावजूद हालत यह है कि आज भी 7भ् प्रतिशत कस्टमर को यही जानकारी नहीं है कि हॉलमार्किंग आखिर होती क्या है? ज्वैलरी पर इसकी जरूरत क्या है? मंगलवार को दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने चौक में ज्वैलरी शॉप पर ज्वैलरी खरीद रहे कुछ कस्टमर्स से बात की। इस दौरान इन्होंने माना कि उन्हें हॉलमार्किंग की जानकारी नहीं है। ज्वैलरी शॉप के मालिक भी यही मानते हैं कि बड़ी संख्या में कस्टमर्स हॉलमार्किंग के बारे में कुछ नहीं जानते हैं।

सही नहीं होते शुद्धता के दावे

7भ् प्रतिशत शुद्धता की बात करते हैं ज्वैलर्स लेकिन होता है म्0 परसेंट

90 परसेंट ज्वैलर्स कहते हैं तो होता है 7भ् परसेंट

9क्.भ्0 पर सोना मिलेगा हॉलमार्क अनिवार्यता के बाद

देना पड़ेगा एक्स्ट्रा मेकिंग चार्ज

हॉलमार्क ज्वैलरी पर मेकिंग चार्ज एक्स्ट्रा देना पड़ेगा

प्रति ग्राम एक हजार रुपए, मेकिंग चार्ज लगेगी

दस ग्राम सोने की ज्वैलरी पर क्0 हजार रुपया मेकिंग चार्ज

नॉन हॉलमार्किंग ज्वैलरी ज्यादा

-ख्भ् परसेंट ही हॉल मार्किंग ज्वैलरी मार्केट में सेल हो रही है

-7भ् परसेंट नॉन हालमार्किंग ज्वैलरी मार्केट में आज भी बिक रही है

-टैक्सेबल ज्वैलरी के चोरी होने पर उसे क्लेम किया जा सकता है।

जब हम बड़े ज्वैलरी शो-रूम में जाते हैं, तभी हॉलमार्क देखते हैं। यहां ज्वैलरी का रेट सिटी के अन्य ज्वैलरी शॉप से थोड़ा ज्यादा रहता है। इसके बारे में पूछे जाने पर यही कहा जाता है कि यह हॉलमार्क ज्वैलरी है, इसलिए रेट ज्यादा है।

-अनुराधा चौहान

हॉलमार्क के बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं है। फैमिली ने जिस शॉप को तय कर रखा है, वहां जाते हैं और अपनी पसंद के अनुसार ज्वैलरी लेकर चले आते हैं, हम दुकानदार पर ही विश्वास करते हैं।

-अंशु

हम हॉलमार्क नहीं केवल दुकानदार को जानते हैं। विश्वास करते हैं और ज्वैलरी लेकर चले जाते हैं। जब ज्वैलरी बेचने की नौबत आती है तो उन्हीं को बेचते हैं और पैसा लेकर चले आते हैं।

-बबलू

सर्राफा मार्केट में कस्टमर्स और ज्वैलर्स के बीच ट्रांसपैरेंसी बनाए रखने के लिए हॉलमार्किंग की अनिवार्यता जरूरी है। विश्वसनीयता बढ़ेगी। किसी भी ज्वैलरी शॉप से परचेज की गई ज्वैलरी पूरे भारत में कहीं भी सेल की जा सकेगी।

-कुलदीप सोनी

अध्यक्ष, प्रयाग सर्राफा एसोसिएशन

सिटी में ज्यादातर ज्वैलर 7भ् परसेंट की ज्वैलरी पर अपनी दुकान का मार्क लगाते हुए उसे 9क्.म्0 पर बेच रहे हैं। विदाउट मेकिंग चार्ज कुछ लोग तो म्भ् परसेंट पर मोहर लगाकर बेच रहे हैं। ऐसे लोगों की वजह से ही सर्राफा बाजार की विश्वसनीयता घटी है।

-दिनेश सिंह

सर्राफा व्यापारी, चौक

Posted By: Inextlive