RANCHI: कभी मौसम के लिहाज से बेहतर शहर माना जाने वाला रांची इन दिनों प्रदूषण के कारण बदनाम हो चुका है. रांची में प्रदूषण अलार्मिंग लेवल तक पहुंच चुका है. झारखंड प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के एक सर्वे के अनुसार, राजधानी में हवा प्रदूषण पिछले 15 सालों में 20 गुणा बढ़ा. बोर्ड ने नगर निगम और परिवहन विभाग को इस बाबत कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. लेकिन शहर में हमेशा सुबह हो या शाम प्रदूषण का लेवल लगातार बढ़ता रहता है. पर्यावरणविद् नितिश प्रियदर्शी बताते हैं कि जिस तरह से लगातार प्रदूषण का लेवल बढ़ रहा है उसको रोकने का कोई उपाय नहीं किया गया तो आने वाले समय में मुश्किल बढ़ जाएगी.

वाहनों ने बढ़ाई परेशानी

आईआईएम के सर्वे के अनुसार, 2340 ऑटो ही शहर के लिए पर्याप्त हैं. झारखंड हाईकोर्ट और मानवाधिकार आयोग ने भी इस बाबत निर्देश दिए थे, इस कारण परिवहन विभाग ने 2340 ऑटो के बाद ऑटो को परमिट देना बंद कर दिया है. प्रदूषण से निजात पाने के लिए बिना परमिट के चल रहे 15000 ऑटो को शहर से बाहर कर दिया जाएगा. पर्यावरणविद नितिश प्रियदर्शी कहते हैं कि इन वाहनों से कार्बन डाइऑक्साइड बड़ी मात्रा में निकलता है जो स्वास्थ पर बुरा असर डालता हैं. आंखों का जलना, त्वचा रोग आम हैं. राजधानी में हर दिन लगभग 125 प्रति घन मीटर पीएम 10 रहता है, जबकि सामान्य आबोहवा के लिए 100 घन मीटर पीएम.

जंगल काटकर हो रहा निर्माण

सिटी के आसपास इलाकों से जंगल लगातार कम होते जा रहे हैं. हर साल करीब एक लाख नये लोगों के रहने के लिए मकानों का भी निर्माण हो रहा है. इसलिए हरियाली भी घटती जा रही है. सिटी के पर्यावरण पर नजर रखने वाले पुराने लोग बताते हैं कि अस्सी के दशक में मौसम इतना अच्छा हुआ करता था कि मेसरा जैसे इलाकों में ठंड के मौसम में छतों पर रखा पानी बर्फ में तब्दील हो जाता था. आज चारों ओर कंक्रीट के जंगल नजर आते हैं. हर दिन हो रहे निर्माण के कारण प्रदूषण का लेवल बढ़ रहा है.

नदियों में बह रहा कचरा

झारखंड में खनिज, खनन, परिवहन व कारखानों के अपशिष्ट प्रवाह और अन्य कई कारणों से प्रदूषण की भयावह स्थिति है. यहां फ्लोराइड और आर्सेनिक की समस्या भी है. प्रदूषण की समस्या से यहां के लोग अस्थमा, टीबी, कैंसर जैसे रोगों से पीडि़त हो रहे हैं. रांची के आसपास शहर के बीच से जो नदियां बह रही हैं, उसमें कचरा भरा रहता है. इस कारण पानी भी प्रदूषित हो रहा है.

बहरे हो रहे लोग

रांची में ध्वनि प्रदूषण के कारण बहरेपन की समस्या बढ़ रही है. शहर में हर दिन बढ़ रही गाडि़यां और हर चौक चौराहे पर जाम लगने की स्थिति में तेज साउंड के कारण लोग बहरे हो रहे हैं.