स्कन्द,ब्रह्म एवं भविष्यादि पुराणों के अनुसार यह व्रत भाद्र शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा एवं कथा होती है। इसमें उदय व्यापिनी तिथि ग्रहण की जाती है। पूर्णिमा का सहयोग होने से इसका बल और भी बढ़ जाता है। यदि मध्यान्ह काल में चतुर्दशी रहे तो ज्यादा अच्छा होता है।इस बार यह योग 12 सितंबर 2019, बृहस्पतिवार को श्रीवत्स एवं सुकर्मा योग में घटित हो रहा है, भगवान विष्णु जी की पूजा बृहस्पतिवार को विशेष फलदायी होती है, विशेषकर इन शुभ योगों में।इस विशिष्ट योग में अनंत चतुर्दशी व्रत के नाम से लक्षित होता है कि यह दिन अंत न होने वाले सृष्टि के कर्ता, निर्गुण ब्रह्म की भक्ति का दिन है।भगवान सत्यनारायण की तरह ही अनंतदेव भी भगवान विष्णु को ही कहते हैं।यह व्रत पुरषों द्वारा किया जाता है, व्रत की पूजा दोपहर में की जाती है।

कैसे करें व्रत और पूजा

अनन्त चतुर्दशी को अनन्त चौदस के नाम से भी जाना जाता है।इस दिन पूजा के उपरान्त अनंत सूत्र बांधते हैं, इसकी खास बजह यह है कि अनंत सूत्र में 14 गांठें बंन्धी होती हैं।इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा होती है, इसी दिन गणेश विसर्जन होता है।यह चौदह गांठें हरि द्वारा उत्पन्न चौदह लोकों (तल, अतल, वितल, सुतल,तलातल,रसातल,पाताल, भू, भुवः,स्व,जन, तप, सत्य,मह) की रचना के प्रतीक हैं।ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को यदि चौदह वर्षों तक किया जाय तो व्रती को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।इस दिन भगवान सत्यनारायण की व्रत कथा भी सुनी जाती है।

किस तरह पूजन के लिए करें स्नान

इसकी पूजा का विधान यह है कि जातक स्नानादि कर कोरा वस्त्र धारण करें।ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।पूजा स्थल पर कलश की स्थापना करें।कलश पर अष्टदल कमल की तरह बने बर्तन में कुश से बने अनंत की स्थापना करें,अन्यथा भगवान विष्णु का कोई चित्र रखें।पूजा स्थल पर बैठकर एक डोरी या धागे में कुमकुम , केसर व हल्दी से अनंत सूत्र बनाते हैं, इसमें 14 गांठें होतीं हैं। तत्पश्चात अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन कर इसे भगवान विष्णु पर चढ़ा देते हैं।विष्णु भगवान को प्रसन्न करने के लिए निम्न मंत्र जाप करते हैं।

'अनंत सर्व नागानांधिप: सर्वकामद:।

सदा भूयात प्रसन्नोमे यक्तानाम भयंकर:।।'

पूजन के उपरांत अनंतसूत्र बांधते हैं।पुरुष दायें हाथ पर और स्त्रियां बाएं हाथ पर अनंत सूत्र बांधती हैं।यह व्रत धन, पुत्रादि की कामना की पूर्ति की वजह से विशेष किया जाता है।

-ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा

Posted By: Vandana Sharma