- सीवियर एनीमिया से ग्रसित बेहोश महिला की कराई डिलीवरी

- रिश्तेदारों ने मुंह मोड़ा तो डाक्टरों ने कराई ब्लड की व्यवस्था

बरेली : सरकारी अस्पताल का नाम सुनकर ही लोगों के जहन में लापरवाही और बदहाल संसाधनों का ख्याल दिल में आता है. लेकिन अब डिस्ट्रिक्टमहिला हॉस्पिटल का हाल सुधरने लगा है. यहां के डॉक्टर मरीजों की जान बचाने को जी जान लगा रहे हैं. ऐसा ही एक मामला वेडनसडे को सामने आया है. यहां बेहोश हो चुकी सीवियर एनीमिया की प्रेग्नेंट पेशेंट का ऑपरेशन कर उसे जीवनदान दिया.

अपनों ने मुंह मोड़ा

शहर के इज्जतनगर के मौलानगर मोहल्ला निवासी आसिफ ने अपनी पत्‍‌नी को प्रसव पीड़ा होने पर आठ दिन पहले महिला डिस्टिक हॉस्पिटल में भर्ती कराया तो जांच की गई. डॉक्टरों ने बताया कि महजबीन का एचवी 2 प्वाइंट है, उसको सीवियर एनीमिया है फौरन तीन यूनिट ब्लड का इंतजाम करो, आसिफ ने अपने कई करीबियों को फोन लगाकर मदद मांगी लेकिन कोई नही आया. महजबीन की हालत बिगड़ती देख डॉक्टरों ने ब्लड बैंक से एक यूनिट का इंतजाम कराकर महजबीन को चढ़ाया.

देर रात किया ऑपरेशन

वेडनस डे देर रात महजबीन को दोबारा प्रसव पीड़ा हुई. महिला हॉस्पिटल की सीएमएस को स्टाफ ने सूचना दी, महजबीन को सीवियर एनीमिया होने के चलते ऑपरेशन से ठीक पहले वह बेहोश हो गई. लेकिन सीएमएस के आदेश पर डॉक्टर नीलम ने महजबीन का ऑपरेशन कर जच्चा-बच्चा दोनों की जान बचाई.

बच्ची को बनाना डॉक्टर

जब महजबीन को फ्राईडे को सुबह होश आया तो सीएमएस ने महजबीन से कहा है जैसे एक महिला डॉक्टर ने हिम्मत दिखाकर दो जानों को बचाया है. इस नन्ही जान को डॉक्टर बनाना. जिससे यह लोगों के लिए मिसाल बने.

वर्जन

मरीज की जान बचाना हर डॉक्टर के फर्ज है. महजबीन सीवियर एनीमिया से ग्रसित थी, ऑपरेशन के दौरान बेहोश थी, ऐसी कंडीशन में अधिकांश डॉक्टर ऑपरेशन करने की हिम्मत नही जुटा पाते लेकिन हमारी टीम ने प्रयास किया और जान बच गई.

डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस.