-विश्व मलेरिया दिवस पर खास-

नगर निगम के 15 कर्मचारियों पर शहर को मलेरिया से मुक्ति दिलाने की जिम्मेदारी

-खराब है शहर की सफाई व्यवस्था,

-स्वास्थ्य विभाग भी नहीं है फिक्रमंद

बनारस में मच्छरों का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है. मच्छरों के आतंक के चलते यहां मच्छरजनित मलेरिया व अन्य बीमारियां फैल रही हैं. इनसे बचने के लिए सरकारी विभाग का भरोसे नहीं है.

ऐसा इसलिए कि इनके पास पर्याप्त कर्मचारी है और न संसाधन. स्टाफ की कमी की वजह से नगर निगम गंदी नालियां साफ करा पा रहा है और न स्वास्थ्य विभाग दवा का छिड़काव कर रहा है. मच्छरों के प्रकोप से मलेरिया के मामले बढ़ रहे है.

2022 तक मलेरिया मुक्ति का टारगेट

दो साल पहले केन्द्र सरकार की ओर से 2022 तक पूरे प्रदेश को मलेरिया मुक्त करने का फरमान जारी किया गया था. इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिलों के नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को व्यापक अभियान चलाकर हर शहर को मलेरिया मुक्त कराना था. इन सबके बावजूद विभागों में अब तक इसका कोई असर देखने को नहीं मिला. बारिश के सीजन में कुछ जगहों पर दवा का छिड़काव और फॉगिंग कराकर सिर्फ कोरम पूरा कर लिया जाता है.

90 वॉर्ड 15 कर्मचारी

मलेरिया फैलने की सबसे बड़ी वजह गंदी नालियां हैं क्योंकि मलेरिया के मच्छर सबसे ज्यादा नालियों में ही पलते बढ़ते हैं. सिटी के ज्यादातर एरिया की नालियां सीवर जाम होने की वजह से भरी रहती है. इसे साफ कराने के साथ दवा का छिड़काव करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन ऐसा कुछ होता नहीं है. अफसरों की दलील हैं कि मच्छरों को भगाने के लिए उनके पास उतने कर्मचारी नहीं है, जितने होने चाहिए. 90 वॉर्ड में सिर्फ 15 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं ऐसे में हर जगह दवा का छिड़काव हो पाना संभव नहीं है.

ले रहा जान

विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2018 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले चार वषरें में करीब 40.4 लाख मलेरिया के मरीज पाये गए इसमें से 1,471 मरीजों की मृत्यु हुयी. वहीं बनारस जिले की बात करें तो यहां भी मलेरिया के हर साल हजारों संदिग्ध मरीजों की जांच की जा रही है.

52,535

संदिग्ध मरीज मलेरिया के मिले तीन साल में

538

मरीज मिले पॉजिटीव

54,970

संदिग्ध मरीज 2017 में

406

पॉजीटीव

67,272

संदिग्ध मरीजों की जांच 2018 में

340

कंफर्म मरीज

10,040

संदिग्ध मरीज 2019 में जनवरी से मार्च तक

20

कंफर्म मरीज

भेज रहे रिपोर्ट

अधिकारियों का कहना हैं कि जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मच्छरों को मारने के लिए विभाग ने कमर कस ली है. निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में वॉर्ड वाइज अलग-अलग एरिया में फॉगिंग शुरू करा दी गई है. जहां भी फॉगिंग हो रही है, उसकी रिपोर्ट डेली डीएम, कमिश्नर को भेजी जा रही है.

इनका फोकस गांव

जिला मलेरिया विभाग भी मच्छरों से लड़ता है लेकिन इसका फोकस शहर से ज्यादा गांव में ज्यादा है. इसके पास 25 कर्मचारी हैं, जबकि 160 की जरूरत है. विभाग के पास

42 हैंड कंप्रेसर स्प्रेयर (10 लीटर),10 हैंड कंप्रेसर स्प्रेयर (3.5 लीटर) 4 हैंड कंप्रेसर स्प्रेयर (1.5 लीटर) 6 स्प्रे पंप मैपसेट है.

-नगर निगम स्वास्थ्य विभाग

15

कुल कर्मचारी संख्या

12

फील्ड वर्कर

03

फॉगिंग वैन ड्राइवर

संसाधन

3 बड़ी फॉगिंग वैन

5 पोर्टेबल फॉगिंग साइकिल

मच्छरों के खात्मे के लिए फॉगिंग शुरू करा दी गई है. इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भी भेजी जा रही है. सफाई चौकियों पर भी मशीनें रखवाई गई है. मैन पावर की कमी की वजह से हर वार्ड को कवर कर पाना मुश्किल हो रहा है.

डॉ. एके दूबे, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम

मच्छरों को मारने की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है. इसके लिए आज से जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. आशा, एनएनएम के माध्यम से भी घर-घर साफ-सफाई की निगरानी की जाएगी.

डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ

Posted By: Vivek Srivastava

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