नई दिल्ली (आईएएनएस)। हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर जिन्हें राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा के लिए पद छोड़ना पड़ा, दिल्ली कांग्रेस के नए अध्यक्ष हो सकते हैं। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मृत्यु के बाद से यह पद रिक्त चल रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक तंवर और पार्टी प्रवक्ता रागिनी नायक के नाम पर चर्चा हुई है।

अन्य नेताओं से  मांगी राय

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तंवर और नायक के नामों पर पार्टी के अन्य नेताओं से राय मांगी है। सूत्र के मुताबिक उनके नामों पर उनकी उम्र को देखते हुए विचार किया गया था, ताकि वह लंबी पारी खेल सकें। उनके नामों पर विचार किए जाने का एक अन्य कारण दिल्ली के साथ उनके संबंध भी हैं क्योंकि दोनों दिल्ली में शिक्षित हैं। तंवर और नायक को राष्ट्रीय राजधानी के बारे में गहराई से जानकारी है। दिल्ली के पूर्व मंत्री अरविंदर सिंह लवली, पूर्व शहर इकाई प्रमुखों अजय माकन, सुभाष चोपड़ा और शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित के नामों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, उनके नामों पर भी विचार हो रहा है। कोई भी फैसला पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की सहमति के बाद ही होगा।

सोनिया गांधी ही लेंगी निर्णय

हालांकि, पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि तंवर को हरियाणा से हटाने के बाद दिल्ली कांग्रेस के प्रमुख के रूप में नियुक्त करने का उद्देश्य पार्टी में असंतोष को खत्म करना हो सकता है। तंवर के पक्ष में एक और कारक कांग्रेस के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी के साथ उनका तालमेल है। दिल्ली कांग्रेस के एक नेता ने नाम नहीं लिखे जाने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, 'हमने निर्णय सोनिया गांधी पर छोड़ दिया है। इस महीने की शुरुआत में उनसे मुलाकात के दौरान हमने दिल्ली में पार्टी को पुनर्जीवित करने की रणनीति पर चर्चा की थी, जहां हमने 1998 से 2013 तक शीलाजी के नेतृत्व में शासन किया।' यह पूछे जाने पर कि क्या तंवर या नायक को पार्टी नेताओं द्वारा स्वीकार किया जाएगा क्योंकि उनकी नियुक्ति से पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी का विवाद पैदा हो सकता है, उन्होंने कहा, 'जो भी निर्णय होगा सोनिया गांधी ही लेंगी और वह जो भी फैसला करेंगी उसे हम स्वीकार करेंगे।'

राहुल गांधी को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने के बारे में लिखा

दिल्ली इकाई में वर्तमान में पीसी चाको तीन कार्यकारी अध्यक्षों - हारून यूसुफ, राजेश लिलोथिया और देवेंद्र यादव के साथ राष्ट्रीय राजधानी के प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में, माकन, चोपड़ा और लवली ने सोनिया से उनके आवास पर मुलाकात की थी और 2020 की शुरुआत में विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी का नेतृत्व करने के लिए अपनी रुचि दिखाई थी। माकन ने 2018 खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए राहुल गांधी को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने के बारे में लिखा था।

कोई बाहरी व्यक्ति नहीं मिलेगा

इस बीच, दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको ने कहा था कि दिल्ली को अपने इकाई प्रमुख के रूप में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं मिलेगा। कांग्रेस ने दीक्षित के नेतृत्व में 1998 से 2013 तक लगातार तीन बार दिल्ली पर शासन किया था। हालांकि, पार्टी 2013 का विधानसभा चुनाव हार गई और 49 दिनों तक राष्ट्रीय राजधानी में AAP के साथ गठबंधन का हिस्सा रही। हालांकि, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP 49 दिनों के भीतर गठबंधन से बाहर हो गई। उसके बाद 2015 के चुनावों में आप ने राष्ट्रीय राजधानी की 70 में से 67 सीटें जीत लीं। 2015 के चुनावों में कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया हो गया, जबकि बीजेपी, जिसने पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया, केवल तीन सीटें जीतने में सफल रही थी।

Posted By: Mukul Kumar

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