अयोध्या (पंकज अवस्थी)। सुबह के नौ बजे : अयोध्या के श्रीराम जन्म भूमि मंदिर मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी मंदिर पर श्रद्धालु इक्का-दुक्का की संख्या में दर्शन के लिये आ रहे थे। हर ओर एक अजीब सी खामोशी छायी थी। लोकल लोग अभी घरों से बाहर निकलने से गुरेज कर रहे थे। शायद सभी को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का इंतजार था, जिसकी बाट वे बरसों बरस से जोह रहे थे। इसी बीच हमारी नजर हनुमान गढ़ी के सामने प्रसाद की दुकान संचालित करने वाले प्रेमचंद्र गुप्ता पर पड़ी। वे अपने मोबाइल फोन पर न्यूज चैनल की लाइव फीड देखने में मशगूल दिखे। हम उनसे मुखाबिक हुए तो वे बेहद अनमने मन से बात करने को राजी हुए। मोबाइल और उनके बीच हमारा आना उन्हें शायद रास नहीं आ रहा था। हमने उनसे पूछा कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या की जीवनशैली में क्या बदलाव आ सकता है? यह सुनते ही प्रेमचंद्र तपाक से बोल पड़े-बदलाव। अरे पूरी की पूरी अयोध्या ही बदल जाएगी साहब। अगर फैसला स्पष्ट आया तो यहां की रोज-रोज की नाकेबंदी, सिक्योरिटी का झंझट सब हट जाएगा। इसका खामियाजा हम लोगों को अपने बिजनेस की कीमत पर उठाना पड़ता है। फैसला किसके पक्ष में आएगा, इस पर प्रेमचंद्र की राय बिलकुल साफ थी। बेहद विश्वास से उन्होंने कहा कि फैसला तो राम मंदिर के ही पक्ष में आएगा। आखिर, सभी जानते हैं कि जन्म भूमि तो रामजी की ही है।

रामजी का वनवास होगा खत्म

रामकोट इलाके का माहौल देखने के बाद हम बढ़ चले राम की पैड़ी की ओर। रास्ते में हम गीता प्रेस की पुस्तकों की एक दुकान पर सन्यासी की वेशभूषा में बैठे बुजुर्ग को देख ठिठक गए। वे दुकान के पिछले कमरे में लगे टीवी को एकटक निहार रहे थे। मुखातिब होने पर उन्होंने अपना नाम कैलाश चंद्र बताया। कहा, 1989 में अयोध्या आंदोलन के वक्त जब कारसेवकों पर गोली चली तो उन्होंने आहत होकर सन्यास धारण कर लिया। कैलाश चंद्र कहते हैं कि सतयुग में तो रामचंद्र जी को सिर्फ 14 वर्ष का वनवास हुआ था लेकिन, कलियुग में तो उनके वनवास को 27 साल हो गए। उनका इशारा विवादित ढांचे के बाद टेंट में बनाए गए राम लला के मंदिर की ओर था। टीवी की ओर बेहद उम्मीद भरी निगाहों से देखते हुए उन्होंने कहा कि पता नहीं क्यों, आज लग रहा है कि रामलला का वनवास खत्म हो जाएगा और जन्म भूमि पर भव्य राम मंदिर का रास्ता साफ होगा।

शुरू हुआ मिठाइयों का दौर

सुबह करीब 10.30 हम मणिराम दास छावनी पहुंचे। जहां पता चला श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास टीवी पर फैसला देख रहे थे। हमने महंत जी से मुलाकात की गुजारिश की, तो बताया गया कि बिना फैसला आए महंत जी किसी से नहीं मिलेंगे। कुछ देर के इंतजार के बाद जैसे ही राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने तस्वीर साफ की, हमें महंत नृत्य गोपाल दास के पास ले जाया गया। छावनी के फस्र्ट लोर स्थित महंत जी के कमरे में नजारा बेहद उल्लासपूर्ण था। कमरे में करीब डेढ़ दर्जन संत महंत नृत्य गोपाल दास के साथ टीवी देख रहे थे। बीच-बीच में वे दोनों हाथ उठाकर 'जय श्री राम' का जयघोष कर रहे थे। इसी बीच महंत नृत्य गोपाल दास ने मिठाई लाने को कहा। कुछ ही देर में वहां पेड़े के तीन डिब्बे लाए गए। महंत जी ने खुद ही सभी को प्रसाद दिया। फैसले पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि आखिर सैकड़ों वर्ष के  संघर्ष का अंत हो ही गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया और जल्द भव्य राममंदिर बनने की बात कही। हनुमान गढ़ी तिराहे पर भी उल्लासित स्थानीय लोग इकट्ठा हुए और जोरदार नारेबाजी की। हालांकि, सतर्क पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से हटा दिया।

सोहर से गूंज उठा कारसेवक पुरम

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही विश्व हिंदू परिषद के आंदोलन का केंद्र रहे कारसेवक पुरम में सोहर गूंज उठे। फैसले से उत्साहित महिलाओं का जत्था वहां पहुंच गया और महिलाएं सोहर गाते हुए नाचने लगीं। सोहर गाने की वजह पूछे जाने पर उल्लासित महिलाओं का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह निश्चित हो गया है कि जन्मस्थान पर ही राम लला का भव्य मंदिर बनेगा। यही वजह है कि वे रामजन्म का उल्लास मना रही हैं। महिलाओं के जत्थे में गोंडा से आई महिलाओं के अलावा स्थानीय महिलाएं भी शामिल थीं।

छावनी बनी अयोध्या

देश के सबसे संवेदनशील मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अयोध्या को बीती रात से ही छावनी में ही तबदील कर दिया गया था। एहतियात बरतते हुए वाहनों का शहर मे प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था। मठ, मंदिर, होटल व धर्मशालाओं से श्रद्धालुओं को बाहर जाने को कहा जाने लगा। शहर के श्रीराम अस्पताल के सामने प्रमुख मार्ग पर स्थानीय नागरिकों को भी जाने से रोका जा रहा था। यहां तक कि मीडिया के वाहनों को भी अयोध्या में नहीं दाखिल होने दिया गया। हनुमान गढ़ी और राम जन्मभूमि के दर्शन के लिये जाने वाले श्रद्धालुओं की तलाशी लेने के साथ ही उनके आईडी कार्ड भी जांचे जा रहे थे। अयोध्या की सुरक्षा का प्रभार देख रहे एडीजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर रहे हैं, दर्शन पर किसी तरह की रोक नहीं है। उन्होंने बताया कि अयोध्या की सुरक्षा के लिये 60 कंपनी पैरामिलिट्री फोर्स व पीएसी, 2 एसपी, 20 डिप्टी एसपी, 250 सब इंस्पेक्टर, 1200 पुलिस कॉन्सटेबल तैनात किये गए हैं। इसके अलावा रामकोट इलाके में 35 सीसीटीवी कैमरों व 10 ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है।

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Posted By: Satyendra Kumar Singh

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