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DEHRADUN : सरकारी कार्मिकों व पेंशनर को भी अब अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना का लाभ मिलने जा रहा है। कर्मचारियों को इस योजना के दायरे में लाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। प्रस्तावित योजना में कर्मचारी संगठनों की मांग के अनुसार सरकारी कर्मचारी व पेंशनर्स को असीमित इलाज के साथ ही मुफ्त ओपीडी सुविधा दी जाएगी। कर्मचारियों को मुफ्त दवा देने के लिए निजी डिस्पेंसरियों को सूचीबद्ध किया जाएगा। कार्मिकों की श्रेणी के अनुसार उनके अंशदान की दरें तय की जा रही हैं। पेंशनर्स से नियमित कर्मचारियों के लिए तय दरों से आधी दर पर निश्चित धनराशि ली जाएगी। इस प्रस्ताव को 24 जुलाई को होने वाली कैबिनेट बैठक में लाने की तैयारी है।

कर्मचारियों से लिया जाएगा शेयर
उत्तराखंड सरकार ने बीते वर्ष आयुष्मान भारत योजना का विस्तार करते हुए समस्त प्रदेशवासियों के लिए अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना की शुरुआत की। इस योजना में आम नागरिक के लिए प्रति परिवार पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा देने का प्रावधान है। सरकारी कर्मचारियों व पेंशनर्स के लिए इलाज के खर्च को असीमित रखा गया। इसके लिए लाभ लेने वाले कार्मिक के पद के हिसाब से अंशदान लिए जाने का प्रावधान किया गया। आम आदमी के लिए यह योजना तो बीते वर्ष ही शुरू कर दी गई लेकिन कर्मचारी संगठनों ने इस योजना के कुछ बिंदुओं पर अपना विरोध जताया।

योजना का खाका तैयार
उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के लिए सरकारी अस्पताल से रेफरेल की अनिवार्यता को समाप्त करने के साथ ही निजी अस्पतालों में सीधे इलाज की सुविधा देने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने इलाज के दौरान केमिस्ट से सीधे दवा लेने और इसकी प्रतिपूर्ति की मांग उठाई। इसके अलावा उन्होंने प्रदेश के बाहर के निजी अस्पतालाें में भी सीधे इलाज की सुविधा देने की मांग की। अब इस योजना का खाका तैयार किया जा चुका है। सूत्रों की मानें तो प्रस्ताव में सरकारी अस्पतालों से रेफरेल की व्यवस्था को यथावत रखा गया है लेकिन इलाज के दौरान बाहर से दवा लेने के लिए कुछ केमिस्ट को चिन्हित करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के बाहर निजी अस्पतालों में भी इलाज की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

'सरकारी कर्मचारियों के लिए इस योजना को शुरू करने में कुछ बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इन पर अंतिम निर्णय होने के बाद सरकारी कर्मचारियों व पेंशनर के लिए योजना शुरू कर दी जाएगी।'
-युगल किशोर पंत, सीईओ, अटल आयुष्मान, उत्तराखंड योजना।

'जब कर्मचारी इस योजना में अपना अंशदान दे रहे हैं तो उन्हें सस्ता इलाज मिलना ही चाहिए। आयुर्वेदिक इलाज को भी योजना में शामिल किया जाना चाहिए और प्रतिपूर्ति सीजीएचएस की भांति मिलनी चाहिए।'
-अरुण पांडेय, कार्यकारी महामंत्री राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद।

Posted By: Inextlive