-एनआरसी से डिस्चार्ज होने के बाद बच्चों के 62 फीसदी फॉलोअप नहीं हुए

-हल्दी होने के बाद कई बच्चे फिर कुपोषण के शिकार, 55 डिफॉल्टर्स केस

BAREILLY:

बरेली जिले में चल रही कुपोषण के खिलाफ जंग को सरकारी अधिकारियों ने भले ही कामयाब माना हो. लेकिन तेजी से विकसित हो रहे देश के इस जिले में कुपोषण से हो रही मासूमों की मौतें अलग ही तस्वीर दिखा रही. सरकारी आंकड़ों में बरेली से करीब 26 हजार कुपोषण के मामलों में कमी दिखाई गई है. लेकिन डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के न्यूट्रिशिनल रिहैबिलिटेशन सेंटर, एनआरसी के आंकड़े कुपोषण के खिलाफ चल रही जंग की नाकामी साफ जता देती है. एनआरसी से पोषण पाने और हेल्दी होकर जाने के बावजूद ज्यादातर बच्चे फिर कुपोषण के शिंकजे में फंस रहे. हेल्दी शेप में आने के बावजूद कुछ ही महीनों बाद कई केस दोबारा कुपोषण की शक्ल में एनआरसी पहुंच रहे.

फॉलोअप से बनाई दूरी

एनआरसी में एडमिट होने वाले बच्चों को 8-10 दिन तक रखने के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाता है. डिस्चार्ज होने के 15 दिन बाद परिजनों को बच्चे के फॉलोअप के लिए दोबारा लाना होता है. जिसमें बच्चे की हालत परखी जाती है कि कहीं फिर से कुपोषण के लक्षण तो नहीं आ रहे. ऐसे 4 फॉलोअप 15-15 दिन में होना जरूरी है. लेकिन लापरवाही हो या जागरुकता की कमी परिजन ऐसे जरूरी फॉलोअप से दूरी बना रहे. 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2015 तक एनआरसी में कुल 212 बच्चे एडमिट हुए. जिनके कुल 848 फॉलोअप होने चाहिए थे. लेकिन हुए महज 323 जो करीब 38 फीसदी है.

55 ने बीच में इलाज छोड़ा

एनआरसी को प्रदेश भर में बेहतर रिजल्ट व सुविधाओं के लिए सराहना मिली है. बावजूद इसके जिम्मेदार लोगों को कुपोषण से अवेयर करने की मुहिम में कामयाब नहीं रहे. साल 2015 में एनआरसी में एडमिट 212 मासूमों में से 39 के परिजन बीच में ही इलाज छोड़ चले गए. वहीं साल 2016 में जनवरी से जून तक एडमिट हुए 127 बच्चों में से 16 बच्चे बीच में ही इलाज छोड़ कुपोषण के शिकंजे में फंसे रहे. पिछले डेढ़ साल में ऐसे 55 केसेज को डिफॉल्टर्स की कटेगरी में रखा गया. वहीं 2015 में 13 केसेज जो बेहद गंभीर कुपोषण के शिकार थे. उन्हें मेडिकल ट्रांसफर किया गया. जबकि 2016 में जून तक एडमिट हुए कुल 127 बच्चों में 8 को मेडिकल ट्रांसफर की जरूरत पड़ी.

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