Basant Panchami 2019 Saraswati Puja vidhi and visarjan vidhi  

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बसंत पंचमी 2019: जानें माता सरस्वती के पूजन की संपूर्ण विधि, पूजा सामग्री और विसर्जन प्रक्रिया

बसंत पंचमी के माता सरस्वती के पूजा का विशेष विधान है। इस दिन माता सरस्वती को प्रसन्न करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। लेकिन हमें यह बात जाननी जरूरी है कि माता का पूजन कैसे किया जाए और किन किन सामग्री का उपयोग किया जाए।

पूजन सामग्री

नारियल, रोली, मौली, पान, सुपारी, साबुत चावल, दीपक, रूई, घी, प्रसाद हेतु नैवेध, जल पात्र, कलश, माँ सरस्वती तथा भगवान गणेश का चित्र, चन्दन, दूध, दही, शहद, चीनी, सिन्दूर, पुष्प, वस्त्र, कुमकुम, कपूर, लौंग, इलायची आदि की व्यवस्था करें।

पूजन विधि

मां सरस्वती की पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखना चाहिए। तदोपरान्त कलश स्थापित करके गणेश जी तथा नवग्रह की विधिवत पूजा करनी चाहिए।

सरस्वती माता की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन और स्नान कराएं। इसके बाद माता को फूल माला चढ़ाएं, सरस्वती माता को सिन्दूर अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों में गुलाल भी अर्पित किया जाता है।

पूजन निम्न प्रकार ध्यान करके करें

1. गणेश ध्यानम् 2. स्वस्ति वाचन 3. पवित्रीकरण 4. रक्षाविधान 5. संकल्प 6. सरस्वती ध्यानम् 7. आवाहनम् 8. आसनम् 9. पाद्यम 10. अध्र्यम् 11. आचमनम् 12. स्नानम् 13. वस्त्रम्  14. मधुपर्कर्म 15. आभूषणम् 16. श्वेत चन्दनम् 17. रक्त चन्दनम् 18. सिन्दूरम् 19. कुंकुमम्   20. सुगंधित इत्र 21. अक्षतम् 22. पुष्पम् 23. पुष्प माल्याम् 24. दूर्वा 25. अबीर-गुलाल 26. धूपम् 27. दीपम 28. नैवेधम् 29. ऋतु फलम 30. आचमनीयम् 31. ताम्बूलम् 32. दक्षीणाम् 33. नीराजनम् 34. प्रदक्षिणा 35. नमस्कारम् 36. पुष्पांजलिम् 37. प्रार्थनाम्।

उपरोक्त पूजन के उपरान्त माँ सरस्वती से प्रार्थना कर क्षमा याचना करना चाहिए।

सरस्वती पूजा में हवन

सरस्वती माता पूजा करने के बाद सरस्वती माता के नाम से हवन करना चाहिए। हवन करते समय गणेश जी नवग्रह के नाम से हवन करें। इसके बाद सरस्वती माता के नाम से ”ऊँ श्री सरस्वते नमः स्वाहा“ इस मंत्र से 108 बार हवन करना चाहिए। हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें एवं हवन की भभूत लगाएं।

सरस्वती प्रतिमा का विसर्जन

माघ शुक्ल पंचमी के दिन सरस्वती की पूजा के बाद षष्टी तिथि को सुबह माता सरस्वती की पूजा करने के बाद उनका विजर्सन कर देना चाहिए। संध्याकाल में मूर्ति को प्रणाम करके जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।

— ज्योतिषाचार्य पं राजीव शर्मा

 

बसंत पंचमी में माता सरस्वती के पूजा का विशेष विधान है। इस दिन माता सरस्वती को प्रसन्न करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, लेकिन हमें यह बात जाननी जरूरी है कि माता का पूजन कैसे किया जाए और किन-किन सामग्री का उपयोग किया जाए।

पूजन सामग्री

नारियल, रोली, मौली, पान, सुपारी, साबुत चावल, दीपक, रुई, घी, प्रसाद हेतु नैवेध, जल पात्र, कलश, माँ सरस्वती तथा भगवान गणेश का चित्र, चन्दन, दूध, दही, शहद, चीनी, सिन्दूर, पुष्प, वस्त्र, कुमकुम, कपूर, लौंग, इलायची आदि की व्यवस्था करें।

पूजन विधि

मां सरस्वती की पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखना चाहिए। तदोपरान्त कलश स्थापित करके गणेश जी तथा नवग्रह की विधिवत पूजा करनी चाहिए।

सरस्वती माता की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन और स्नान कराएं। इसके बाद माता को फूल माला चढ़ाएं, सरस्वती माता को सिन्दूर और अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों में गुलाल भी अर्पित किया जाता है।

पूजन निम्न प्रकार ध्यान करके करें

1. गणेश ध्यानम् 2. स्वस्ति वाचन 3. पवित्रीकरण 4. रक्षाविधान 5. संकल्प 6. सरस्वती ध्यानम् 7. आवाहनम् 8. आसनम् 9. पाद्यम 10. अध्र्यम् 11. आचमनम् 12. स्नानम् 13. वस्त्रम्  14. मधुपर्कर्म 15. आभूषणम् 16. श्वेत चन्दनम् 17. रक्त चन्दनम् 18. सिन्दूरम् 19. कुंकुमम्   20. सुगंधित इत्र 21. अक्षतम् 22. पुष्पम् 23. पुष्प माल्याम् 24. दूर्वा 25. अबीर-गुलाल 26. धूपम् 27. दीपम 28. नैवेधम् 29. ऋतु फलम 30. आचमनीयम् 31. ताम्बूलम् 32. दक्षीणाम् 33. नीराजनम् 34. प्रदक्षिणा 35. नमस्कारम् 36. पुष्पांजलिम् 37. प्रार्थनाम्।

उपरोक्त पूजन के उपरान्त माँ सरस्वती से प्रार्थना कर क्षमा याचना करनी चाहिए।

सरस्वती पूजा में हवन

सरस्वती माता की पूजा करने के बाद सरस्वती माता के नाम से हवन करना चाहिए। हवन करते समय गणेश जी नवग्रह के नाम से हवन करें। इसके बाद सरस्वती माता के नाम से ”ऊँ श्री सरस्वते नमः स्वाहा“ इस मंत्र से 108 बार हवन करना चाहिए। हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें एवं हवन की भभूत लगाएं।

सरस्वती प्रतिमा का विसर्जन

माघ शुक्ल पंचमी के दिन सरस्वती की पूजा के बाद षष्टी तिथि को सुबह माता सरस्वती की पूजा करने के बाद उनका विजर्सन कर देना चाहिए। संध्याकाल में मूर्ति को प्रणाम करके जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।

ज्योतिषाचार्य पं राजीव शर्मा