- फेक आधार कार्ड बनाकर सेम नंबर का लेते हैं सिम

- फर्जी प्रार्थना पत्र देकर बंद करा देते हैं असली नंबर

- 27 लाख रुपये का लगा दिया चूना, साइबर सेल कर रही जांच

mayank.srivastava@inext.co.in

LUCKNOW: आपका फोन अचानक ज्यादा समय के लिए आउट ऑफ वर्किग हो जाए तो सतर्क हो जाएं क्योंकि आप ठगी के शिकार हो सकते हैं. साइबर क्रिमिनल्स आपका फर्जी आधार कार्ड तैयार कर उसके जरिए पहले फर्जी प्रार्थना पत्र देकर सिम बंद करा देते थे और फिर आधार से उसी नंबर का सिम लेते हैं. मोबाइल नंबर से सारी डिटेल निकालकर अकाउंट खाली कर देते हैं. साइबर ठगों ने फ्राड के इस तरीके को इजाद कर एक स्कूल का अकाउंट खाली कर दिया. ठगों ने अकाउंट से करीब 27 लाख रुपये उड़ा दिये.

स्कूल के नाम पर था मोबाइल नंबर

बनारस में सनबीम के नाम से एक स्कूल है. स्कूल मैनेजमेंट ने स्कूल के नाम से एक सिम खरीदा था. इसी नंबर पर बैंक अकाउंट और अन्य ओटीपी भी आते थे. कुछ दिन पहले स्कूल का नंबर कुछ समय के लिए अचानक आउट ऑफ वर्किग हो गया. मैनेजमेंट से जुड़ा नंबर होने के चलते किसी का इस ओर ध्यान नहीं गया. जब उसके बारे में पता किया गया तो पता चला कि नंबर चल रहा है, लेकिन किसी दूसरे मोबाइल पर नंबर एक्टिव है.

अकाउंट से निकल गए 27 लाख

मोबाइल आउट ऑफ नेटवर्क होने के बाद से स्कूल मैनेजमेंट के अकाउंट से धीरे-धीरे करीब 27 लाख रुपये उड़ा दिये गये. जब अकाउंट से इतनी बड़ी रकम ऑनलाइन गायब हो गई तो मैनेजमेंट के होश उड़ गए. स्कूल मैनेजमेंट ने इस मामले की रिपोर्ट बनारस के लंका थान में दर्ज कराई. मामला साइबर सेल तक पहुंचा. मामले की जांच के लिए बनारस साइबर सेल ने लखनऊ साइबर सेल से मदद मांगी. अब इस केस की जांच लखनऊ साइबर सेल कर रहा है.

फेक आधार कार्ड बनाकर खेला खेल

सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्र ने बताया कि स्कूल के नाम पर फेक डॉक्यूमेंट्स तैयार किए गए. इसके बाद फर्जी प्रार्थना पत्र देकर स्कूल का मोबाइल फोन गिरने की सूचना देकर फोन नंबर बंद करा दिया गया. संबंधित कंपनी में फेक डॉक्यूमेंट्स लगाकर वही नंबर हासिल कर लिया गया और फिर उसी नंबर से बैंक संबंधित सारी डिटेल निकाल ली गई. बैंक अकाउंट से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करके साइबर क्रिमिनल्स ने करीब 27 लाख रुपये उड़ा दिये.

लखनऊ में हो चुका पहला केस

इस तरह फ्राड के मामले बहुत कम देखने को मिले हैं. दो साल पहले लखनऊ के यूपी कॉरपोरेशन बैंक से भी इसी तरह से 47 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी. मामले की जांच साइबर सेल ने की थी और मुंबई के एक युवक को फ्राड के मामले में गिरफ्तार किया गया था.

संस्थान के नाम जारी नंबर को करते हैं टारगेट

सीओ अभय मिश्र ने बताया कि इस तरह के फ्राड में क्रिमिनल्स किसी व्यक्ति के नाम पर जारी नंबर पर फ्राड नहीं करते बल्कि ऐसे नंबर्स को टारगेट करते हैं जो किसी संस्थान के नाम पर होते हैं. वह नंबर 24 घंटे से ज्यादा भी आउट ऑफ वर्किग होने पर लोग शक नहीं करते हैं और उन्हें फ्राड करने का समय मिल जाता है.

कोट-

अचानक मोबाइल नंबर वर्किग करना बंद हो जाए तो कस्टमर केयर या फिर मोबाइल कंपनी से संपर्क कर जरूर तहकीकात कर लें, नहीं तो फ्राड की संभावना बढ़ सकती है. इसके अलावा मोबाइल नंबर पर आने वाले लिंक पर भी क्लिक न करें. इससे चलते भी ठगी हो सकती है.

अभय कुमार मिश्र, सीओ, नोडल इंचार्ज साइबर सेल