- 47 सेंटर्स पर हुई परीक्षा

- 233913 रजिस्टर्ड कैंडीडेट्स

- 209581 परीक्षा में शामिल

- 24332 ने छोड़ी परीक्षा

- 8 से 11 बजे तक पहली पाली

- 1 से 5 बजे तक दूसरी पाली

- 1273 संदिग्ध कैंडीडेट्स की पहचान

- 10 मई को आएगा रिजल्ट

- बीएड प्रवेश परीक्षा में 11 फीसद कैंडीडेट्स रहे अनुपस्थित

- इलाहाबाद में चार मुन्नाभाई पकड़े गए

- 1273 संदिग्ध कैंडीडेट्स में से आधे परीक्षा देने नहीं आए

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LUCKNOW : बीएड की राज्य प्रवेश परीक्षा बुधवार को राजधानी के 47 सेंटर्स पर दो पालियों में हुई. वहीं प्रदेश में यह एग्जाम 11 शहरों में बने 469 सेंटर्स पर हुआ. परीक्षा में कुल 233913 कैंडीडेट्स रजिस्टर्ड थे, इसमें से 209581 कैंडीडेट्स परीक्षा में शामिल हुए. कैंडीडेट्स के मुताबिक इस बार बीएड का पेपर पिछले पांच साल का सबसे मुश्किल पेपर रहा. इस बार सबसे ज्यादा टफ जनरल एप्टिट्यूट का सेक्शन रहा. कैंडीडेट्स का कहना था कि बीते कुछ सालों के रिकार्ड को देखा जाए तो जनरल एप्टिट्यूट का पार्ट कभी इतना टफ नहीं आता था.

24332 ने छोड़ दी परीक्षा

बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा के राज्य समन्वयक प्रो. एनके खरे ने बताया कि यूपी के 11 जिलों में 469 परीक्षा सेंटर्स पर बुधवार को परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से निपट गई. राजधानी में 47 परीक्षा सेंटर्स बनाए गए थे. पहली पाली में 209581 कैंडीडेट्स उपस्थित रहे और 24332 कैंडीडेट्स अनुपस्थित रहे. वहीं दूसरी पाली में 210263 कैंडीडेट्स उपस्थित रहे और 23650 अनुपस्थित रहे.

जनरल नॉलेज का पार्ट आसान

पहली पाली की परीक्षा सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच हुई, इसमें जनरल नॉलेज और लैंग्वेज से सवाल पूछे गए. जनरल नॉलेज में जहां पिछले एक साल के करंट इश्यू पर सवाल आए तो लैंग्वेज का सेक्शन विषय पर ही आधारित रहा जो बीएड के सभी सेक्शंस में सबसे आसान रहा. दूसरा पेपर दोपहर 1 बजे से 5 बजे के बीच हुआ. इसमें जनरल एप्टिट्यूट और संबंधित विषय से आधारित सवाल आए. जनरल एप्टिट्यूट में इस बार लॉजिकल रिजनिंग के सवाल सबसे ज्यादा मुश्किल रहे. कैंडीडेट्स के मुताबिक हर साल जैसे सवाल बीएड में आते थे उससे कहीं ज्यादा मुश्किल सवाल इस बार पूछे गए हैं.

1273 संदिग्ध कैंडीडेट्स की पहचान

बीएड के राज्य प्रवेश समन्वयक प्रो. एनके खरे ने बताया कि इस बार हमने पहले ही सभी के फॉर्म का ऑनलाइन बारीकी से वेरिफिकेशन किया और 1273 कैंडीडेट्स को संदिग्ध की श्रेणी में डाल दिया था. इन सभी कैंडीडेट्स की कोशिश की गई थी एक ही सेंटर्स पर डाला जाएं. ये कैंडीडेट्स जिन सेंटर्स पर भी परीक्षा दे रहे थे वहां गुप्तरूप से इनकी सूचना पहुंचाई गई और इन सभी कैंडीडेट्स की ठीक से चेकिंग करने के निर्देश जारी किये गए. इसमें आधे से ज्यादा कैंडीडेट्स परीक्षा देने ही नहीं आए.

चार मुन्नाभाई पकड़े गए

वहीं इलाहाबाद सेंटर्स पर चार मुन्ना भाई पकड़े गए. इसमें एक कैंडीडेट्स के प्रवेश पत्र में टेंपरिंग का मामला पकड़ा गया. प्रवेश पत्र में कैंडीडेट्स का विषय कॉमर्स था जबकि रिकार्ड में आ‌र्ट्स था. इनके खिलाफ केंद्र के जिम्मेदारों की ओर से एफआईआर दर्ज करा दी गई है.

682 का रिजल्ट होगा रद्द

प्रो. खरे ने बताया कि 682 कैंडीडेट्स ऐसे हैं जिनका रिजल्ट रद्द कर दिया जाएगा, क्योंकि इन सभी ने पहली पाली की परीक्षा छोड़ दी. इन्होंने सिर्फ दूसरी पाली की परीक्षा ही दी है. हमारे नियम के मुताबिक हम उन्हीं का रिजल्ट जारी करते हैं जिन्होंने दोनों पालियों की परीक्षा दी है. ऐसे में एक पाली की परीक्षा देने वाले सभी कैंडीडेट्स का रिजल्ट जारी नहीं किया जाएगा.

दस मई से पहले आएगा रिजल्ट

प्रो. खरे ने बताया कि यूनिवर्सिटी की ओर से दस मई से पहले प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा. हमारी कोशिश है कि सात से आठ मई के बीच रिजल्ट वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए. वहीं एक जून से काउंसिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. इस बार ऑनलाइन काउंसिलिंग होनी है इसलिए पहले कैंडीडेट्स ऑनलाइन च्वॉइस लॉक करेंगे. उसके बाद अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड कर रिपोर्टिंग कर सकेंगे.

काउंसिलिंग को नहीं लगानी होगी दौड़

प्रवेश परीक्षा की काउंसिलिंग इस बार पूरी तरह ऑफ कैंपस ऑनलाइन होगी. कैंडीडेट्स अपने घर पर इंटरनेट की मदद या फिर साइबर कैफे के माध्यम से अपनी मनपसंद सीटों की च्वाइस रखेंगे. उन्हें मेरिट व च्वाइस के अनुसार उन्हें सीट आवंटित की जाएगी.

बातचीत

हिंदी के पेपर में समास, संधि-विच्छेद से अधिक प्रश्न पूछे गए. इसको हल करने में कोई समस्या नहीं हुई. वहीं सामान्य ज्ञान में अर्थशास्त्र से अधिक प्रश्न आये. सभी प्रश्न सिलेबस से ही आए हैं.

- अनिल

पहला पेपर औसत था, लेकिन दूसरीे पाली में रिजनिंग के सवाल थोड़े कठिन लगे. इसमें नंबर, कैलेंडर, डायस, रिलेशनशिप पर प्रश्न आधारित थे. इनको हल करने में समय लग रहा था.

- दीपक

सामान्य ज्ञान में पूछे गए प्रश्न कठिन थे. इसमें अर्थशास्त्र, संविधान के सवाल अधिक पूछे गये. वहीं जीव विज्ञान के पूछे गए प्रश्न भी कठिन थे. दोनों पेपरों को मिलाकर पेपर औसत था.

- प्रीति दीक्षित

हिंदी का पेपर आसान था, इसको हल करने में समय नहीं लगा. इसमें पर्यायवाची शब्द, मुहावरे व कहावतों पर अधिक प्रश्न थे. वहीं रिजनिंग का पेपर लंबा व कठिन था. इसको हल करने में समय अधिक लग रहा था.

- सुनीता