रांची : करीब 34 साल पुराने चर्चित वर्दी घोटाला के मामले में सीबीआइ कोर्ट ने बिहार के तत्कालीन डीजीपी सहित चार लोगों को तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई. साथ ही 45 से 65 हजार रुपये तक जुर्माना भी लगाया गया. सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश कुमारी रंजना अस्थाना की अदालत ने सोमवार को 120 पन्नों में फैसला सुनाया. आरोपियों में बिहार के तत्कालीन डीजीपी रामचंद्र खां के अलावा रांची के तत्कालीन सार्जेट मेजर रमानुज शर्मा, आपूर्तिकर्ता (मेसर्स अजंता फर्निसिंग हाउस पटना) के पार्टनर कैलाश कुमार अग्रवाल और आपूर्तिकर्ता (एसकेबी इंडस्ट्रीज कदमकुंआ पटना) के पार्टनर राघवेंद्र कुमार सिंह शामिल हैं. इन सभी पर अधिक कीमत पर वर्दी की खरीदारी का आरोप है. फैसले की जानकारी सीबीआइ के विशेष लोक अभियोजक राकेश प्रसाद ने दी. उन्होंने बताया कि आरोपियों को तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई गई है. रामचंद्र खां, कैलाश व राघवेंद्र को 45-45 हजार रुपये और रमानुज शर्मा को 65 हजार रुपये का जुर्माना अदालत ने लगाया है. जुर्माने की राशि नहीं देने पर अभियुक्तों को छह-छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी. अदालत ने अभियुक्तों को अपील में जाने के लिए तत्काल औपबंधिक जमानत की सुविधा प्रदान कर दी है. ऐसे में सभी जेल जाने से बच गए. बेल बांड भरे जाने के बाद उन्हें औपबंधिक जमानत भी मिल गई. इस घोटाले में दस अभियुक्त थे, छह की ट्रायल के दौरान मौत हो गई, शेष चार को आज सुनाई गई.

 

उल्लेखनीय है कि डीएसपी रैंक के अधिकारियों को तब 500 रुपये तक की खरीदारी का अधिकार था, लेकिन सभी ने करीब 44 लाख रुपये तक की खरीदारी कर ली. खरीदारी वैसे आपूर्तिकर्ताओं से की गई जो पुलिस हेडक्वाटर से अधिकृत नहीं थे. आरोपियों ने वर्दी के साथ अन्य सामग्री की भी खरीदारी कर ली.

 

8 लाख 91 हजार अधिक की खरीदारी

अभियुक्तों ने करीब 44 लाख रुपये तक वर्दी की खरीदारी की. इस खरीदारी में आठ लाख 91 हजार 55 रुपये 92 पैसे अधिक राशि लगाई और सरकार को नुकसान पहुंचाया. बिहार सरकार ने 1986 में मामले को सीबीआइ के हैंडओवर किया था. मामले को लेकर सीबीआइ पटना के तत्कालीन स्पेशल डीएसपी अखिलेश्वर प्रसाद ने अभियुक्तों के खिलाफ 13 नवंबर 1986 में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. 1996 में चार्जशीट दाखिल की गई थी. इन सभी के खिलाफ आरोप था कि बिहार पुलिस मैनुअल और वित्तीय रूल और पुलिस हेडक्वाटर द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन किया. वर्दी व अन्य सामग्री की खरीद के लिए टेंडर जारी नहीं किया. किसी समाचार पत्र के माध्यम से भी जानकारी नहीं दी गई और अपने चहेते आपूर्तिकर्ताओं से खरीदारी कर ली.

 

इसकी हुई खरीदारी

अभियुक्तों ने अंगोला शर्ट, ग्रेट कोट, वूमेन स्लेक्स, वूमेन जर्सी, ग्राउंट शर्ट, कीट बैग आदि.