पटना (ब्यूरो)। छपरा में जहरीली शराब का कहर 13 लोगों पर मौत बनकर टूटा। साथ ही इससे 25 से अधिक लोगों के आंखों की रोशनी चली गई है। कुछ लोग ऐसे हैं, जिनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह से खत्म हो गई तो कुछ लोग ऐसे हैं जिनकी रोशनी थोड़ी बहुत ही बची है। जहरीली शराब से मौत पर विशेषज्ञों से दैनिक जागरण आईनेक्स्ट के रिपोर्टर ने डॉक्टर और रासायनिक विशेषज्ञ से बात की प्रस्तुत है एक रिपोर्ट

-क्या कहते हैं डॉक्टर
पटना के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ। श्वेता कहती हैं कि जिन लोगों की आंखों की रोशनी जहरीली शराब पीने की वजह से चली गई है, उनकी रोशनी दोबारा से वापस नहीं आ सकती लेकिन चिकित्सकों की मदद और बेहतरीन इलाज से रोशनी थोड़ी साफ हो सकती है।

-मेथेनॉल से खत्म होती है ऑखों की रोशनी
जहरीली शराब में मिथाइल अल्कोहल यानी मेथेनॉल की मात्रा 90 प्रतिशत से अधिक हो जाती है। मेथेनॉल की अत्यधिक मात्रा शरीर के नर्वस सिस्टम को ब्रेक डाउन करता है और इसका सबसे पहला असर आंखों पर देखने को मिलता है। आंखों की रोशनी कमजोर होने लगती है और कई मामलों में आंखों की रोशनी पूरी तरह से चली जाती है। कई और अंग होते जाते हैं खराब डॉ। श्वेता ने बताया कि मेथेनॉल आंखों के बाद शरीर के अन्य ऑर्गन को डैमेज करना शुरू करता है। आंखों के खराब होने बाद लीवर फेल्योर, किडनी फेल्योर, हार्ट ब्लॉकेज, लंग्स फेल्योर जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। आंखों की खराब होती रोशनी सबसे पहले समझ में और ध्यान में आ जाती है इस वजह से लगता है कि असर सिर्फ आंखों पर ही हुआ है, लेकिन जहरीली शराब शरीर के कई अंगों को डैमेज करता है। काफी संख्या में ऐसे लोग हैं जो आंखों के खराब होने के बावजूद घर में छुप कर बैठे हुए हैं, लेकिन ऐसे लोगों के लिए जरूरी है कि जब जहरीली शराब पी ली है तो अविलंब चिकित्सक के पास जाएं, ताकि चिकित्सक शरीर की पूरी जांच करके पता कर सके कि शरीर में कौन-कौन से ऑर्गन डैमेज हो रहे हैं और तुरंत उस पर प्रभावी इलाज शुरू करें

-दोबारा नहीं आ सकती आंखों की रोशनी
जिन लोगों की आंखों की रोशनी जहरीली शराब पीने की वजह से चली गई है, उनकी रोशनी दोबारा से वापस नहीं आ सकती, लेकिन चिकित्सकों की मदद और बेहतरीन इलाज से रोशनी थोड़ी साफ हो सकती है और स्टेबल हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह लोगों से अपील करेंगे कि यदि गलत शराब पी है तो पुलिस के डर से अस्पताल नहीं जाने से खतरा है, इसलिए अविलंब अस्पताल पहुंचे। क्योंकि प्रशासन को जो कार्रवाई करना है, वह करेगा मगर व्यक्ति की जान तो बचाई जा सकेगी। साथ ही बिहार एक ड्राई स्टेट है, ऐसे में लोगों को शराब का सेवन नहीं करना चाहिए

-क्या कहते हैं रासायनिक विशेषज्ञ
रासायनिक मामले के जानकार डॉ अजित कुमार ने बताया कि देशी शराब को अधिक नशीली बनाने के चक्कर में ही ये ज़हरीली हो जाती है। सामान्यत इसे गुड़, शीरा से तैयार किया जाता है। लेकिन इसमें यूरिया और बेसरमबेल की पत्तियां डाल दी जाती हैं ताकि इसका नशा तेज़ और टिकाऊ हो जाए। इसके अलावा शराब को अधिक नशीली बनाने के लिए इसमें यूरिया और ऑक्सिटोसिन मिला दिया जाता है, जो मौत का कारण बनती है। हाल के सालों में ऑक्सिटोसिन को लेकर ये जानकारी सामने आई है कि ऑक्सिटोसिन से नपुंसकता और नर्वस सिस्टम से जुड़ी कई तरह की भयंकर बीमारियां हो सकती हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक़ मिथाइल शरीर में जाते ही केमिकल रिएक्शन तेज़ होता है। इससे शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं और तुरंत मौत हो जाती है।

-मिलावट में असंतुलन की वजह से बन जाता है जहरीली
जिस रासायनिक द्रव्य को देसी दारू कहकर बेचा जाता है, वो 95 फ़ीसदी तक विशुद्ध एल्कोहल है यानी बिना मिलावट के। इसे एथेनॉल भी कहते हैं। ये गन्ने के रस, ग्लूकोज़, शोरा, महुए का फूल, आलू, चावल, जौ, मकई जैसे किसी स्टार्च वाली चीज़ का फर्मेन्टेशन करके तैयार किया जाता है। इस एथेनॉल को नशीला बनाने की लालच में कारोबारी इसमें मेथनॉल मिलाते हैं। और ये ज़हरीली तब हो जाती है जब इसके साथ काष्ठ अल्कोहल, जिसे काष्ठ नैफ्था के नाम से मशहूर, मेथेनॉल की मिलावट में संतुलन बिगड़ता है।

- ज़हरीली चीज़ है मेथेनॉल
मेथेनॉल केमिस्ट्री की दुनिया का सबसे सरल एल्कोहल है। सामान्य ताप पर ये लिक्विड रूप में होता है। इसका इस्तेमाल एंटीफ्ऱीजऱ के तौर पर, दूसरे पदार्थों का घोल तैयार करने के काम में और ईंधन के रूप में होता है। ये एक रंगहीन और ज्वलनशील द्रव है जिसकी गंध एथेनॉल (पीने के काम में आने वाला एल्कोहल) जैसी ही होती है।

-कैसे होती है मौत
ज़हरीली शराब पीने के बाद शरीर कैसे रिएक्ट करता है। इस सवाल पर डॉक्टर अजित कुमार बताते हैं कि सामान्य शराब एथाइल एल्कोहल होती है जबकि ज़हरीली शराब मिथाइल एल्कोहल कहलाती है। कोई भी एल्कोहल शरीर में लीवर के ज़रिए एल्डिहाइड में बदल जाती है। लेकिन मिथाइल एल्कोहल फॉर्मेल्डाइड नामक के ज़हर में बदल जाता है। ये ज़हर सबसे ज़्यादा आंखों पर असर करती है। अंधापन इसका पहला लक्षण है। किसी ने बहुत ज़्यादा शराब पी ली है तो इससे फॉर्मिक एसिड नाम का ज़हरीला पदार्थ शरीर में बनने लगता है। ये दिमाग़ के काम करने की प्रक्रिया पर असर डालता है। ताज्जुब की बात ये है कि ज़हरीली शराब का इलाज भी शराब से ही होता है। मिथाइल एल्कोहल के ज़हर का इलाज इथाइल एल्कोहॉल ही है। ज़हरीली शराब के एंटीडोट के तौर पर टैबलेट्स भी मिलते हैं लेकिन भारत में इसकी उपलब्धता कम है।

-15 एमएल तक है शरीर मेथेनॉल को कर पाता है बर्दाश्त
विशेषज्ञों की मानें तो सामान्य शराब में इथाइल अल्कोहल होता है, जो जानलेवा नहीं होता। शराब में मेथेनॉल मिलाने से यह जहर बन जाता है। 15 एमएल से ज्यादा मेथेनॉल शरीर में पहुंचते ही केमिकल रिएक्शन शुरू कर देता है। यह फर्मलडिहाइड में बदलने के साथ ही तेजी से फार्मिक एसिड बनाने लगता है। इससे शरीर का मेटाबोलिज्म टूट जाता है। सबसे पहले एल्कोहलिक रेटिनोपैथी से आंख की रोशनी जाती है। रक्त में अम्ल घुलने से ब्रेन, किडनी, हार्ट एवं लंग्स सभी खराब होने लगते हैं। हाइपोक्सिया, खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से व्यक्ति का ब्लडप्रेशर अचानक लो होने लगता है

-क्या होना चाहिए एल्कोहल की प्रतिशत मात्रा
शराब मे सबसे अधिक मात्रा में किण्वन प्रक्रिया द्वारा खमीर से उत्पादित इथेनॉल अलग -अलग प्रकार की शराब मे अलग अलग मात्रा में होता है। प्रतिशत
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शाराब----एल्कोहल की मात्रा
वोदका-----40-95प्रतिशत
जिन-----36-50प्रतिशत
रम-----36-50प्रतिशत
व्हिस्की-----36-50प्रतिशत
टकीला------50-51प्रतिशत
लिकर-------15प्रतिशत
फोरटिफाइड वाइन-----16-24प्रतिशत
अनरिफ़ाइंड वाइन-----14-16प्रतिशत
बियर----------4-8प्रतिशत

इसके अलावा देशी शराब को अधिक नशीला बनाने के लिए कच्ची शराब में यूरिया और ऑक्सिटोसिन जैसे केमिकल पदार्थ मिलाने की वजह से मिथाइल एल्कोल्हल बन जाता है। इसकी वजह से ही मिथाइल शरीर में जाते ही केमिकल रिएक्शन तेज हो जाता है। इससे शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं। इसकी वजह से कई बार तुरंत मौत हो जाती है। कुछ लोगों में यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है। इस प्रकार, मेथिल अल्कोहल की अत्यधिक मात्रा शराब को जहरीला बनाती हैं।