2009 से ही आई नेक्स्ट बाइकॉथन में पार्टिसिपेट कर रहे हैं कुणाल

-अब तक दर्जनों नेशनल अवार्ड जीत चुके हैं कंकड़बाग के कुणाल कुमार

-महज बीस साल की उम्र में साइक्लिंग फील्ड में बनाई खास पहचान

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PATNA: जब मन में जज्बा और जुनून हो, तो कोई मंजिल कठिन नहीं, इस बात को कुणाल ने सच कर दिखाया है. मात्र 20 साल की उम्र में इन्होंने कई स्टेट व नेशनल चैम्पियनशिप में अपनी खास पहचान बनायी है. पटना के कंकड़बाग के रहने वाले कुणाल 2009 से ही आई नेक्स्ट बाइकॉथन से जुडे़ हुए हैं. वे तब से हर साल इस खास इवेंट में पार्टिसिपेट करने के लिए लालायित रहते हैं. सिर्फ यही नहीं, वे बिहार साइक्लिंग एसोसिएशन के स्टार प्लेयर भी रह चुके हैं.

आई नेक्स्ट का बाइकॉथन इज बेस्ट

कंकड़बाग के रहने वाले कुणाल कुमार ने बताया कि साइक्लिंग का सफर इन्होंने 2009 में आई नेक्स्ट के बाइकॉथन से शुरू किया. इसमें पार्टिसिपेट करने के बाद मुझे इतना अच्छा लगा कि मैंने इसे अपने जीवन का ध्येय बना लिया. मैं आई नेक्स्ट को थैंक्स कहना चाहूंगा कि ऐसे स्पोर्टी और एनवायरमेंट-फ्रेंडली इवेंट को लेकर मास लेवल पर अवेयरनेस का एक अच्छा उदाहरण पेश किया है. उन्होंने कहा कि यहां साइक्लिंग की संभावना है, पर स्टेट गवर्नमेंट ने इसे बिल्कुल इग्नेार कर रखा है.

घरवाले थे नाराज, फिर भी..

कुणाल ने बताया कि मैं साइकल एसोसिएशन ऑफ बिहार से एसोसिएटेड रहा हूं, लेकिन एसोसिएशन द्वारा साइक्लिस्ट को कुछ भी नहीं दिया जाता था. न तो कोई बढ़ावा, न इवेंट ऑर्गनाइज करते और न ही किसी प्रकार की आर्थिक मदद करते. इसके बावजूद मेरे अंदर एक जुनून था कि मैं इस खेल में एक मुकाम हासिल करूं. इस बात को लेकर मेरे पिता अजय ठाकुर बेहद दुखी थे. वे एक बार्बर हैं और घर की माली हालत अच्छी नहीं है. उन्होंने कहा कि इसे तुम छोड़ क्यों नहीं देते, लेकिन मैंने ट्यूशन पढ़ाकर, अदर वर्क कर मैंने इस खेल के प्रति अपने जज्बे को कम नहीं होने दिया.

ट्रेनिंग सेंटर बनाना चाहता हूं

कुणाल ने अपने फ्यूचर एम्बिशन के बारे में बताया कि वह साइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए हर स्तर पर काम करने के लिए ललायित है. उन्होंने तय किया है कि मैं बिहार में एक साइक्लिंग ट्रेनिंग सेंटर शुरू करूं. इससे न्यू जेनेरेशन को न केवल साइक्लिंग के फायदे बल्कि इसके स्पो‌र्ट्स और एनवायरमेंट रिलेटेड कई बातों के बारे में जानकारी देकर ऐसी टीम तैयार की जा सके, जो नेशनल लेवल पर इंडिया का नाम रौशन कर सके. इसके लिए मैं कोच की ट्रेनिंग कोर्स भी कर रहा हूं.

टेक्निकल आइडिया भी काम की

बात जब रेसिंग साइकिल की हो, तो इसमें टेक्निकल नॉलेज की खास अहमियत है. इस मामले में भी कुणाल ने अपने को तैयार किया है. वे बताते हैं कि अमृतसर स्थित गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी में वे साइक्लिंग के एक टेक्निकल ऑफिसर के रूप में भी काम कर चुके हैं. साइकिल की टेक्निकल फिटनेस के बारे में भी वे जानकारी रखते हैं.

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साइक्लिंग ऐसा गेम है, जिसमें बाड़ी की थाई और बाइसेप्स को एक स्ट्रेंथ मिलता है. जहां यह एक स्पोर्टी आइडिया है, वहीं यह एक शानदार खेल भी है. इसमें ट्रैक और बिना ट्रैक के कई वेरायटी भरे गेम्स खेले जाते हैं. हालांकि जहां तक बिहार का सवाल है, यहां मूल रूप से केवल रोड साइक्लिंग ही होता है, पर साइक्लिंग के कई टाइम होते हैं. जैसे -रोड साइक्लिंग, माउंटेन साइक्लिंग, ट्रैक साइक्लिंग, बीएमएक्स साइक्लिंग आदि.

Achievements

अहमदाबाद साइक्लथॉन ख् फरवरी, ख्0क्ब्- छठा स्थान

सेफई महोत्सव में भ् जनवरी, ख्0क्ब्

मुजफ्फरपुर नेशनल ख्0क्ख् में अंडर ख्फ् में टीम में चौथा स्थान

अंडर -क्7 नेशनल रोड चैम्पियशिप, पुणे में चौथा स्थान

अंडर-क्9 टाइप ट्रायल में चौथा स्थान