- महानगर पुलिस ने किया हत्याकांड का खुलासा, पांच अरेस्ट

- खुद के संग मारपीट करने वाले आरोपियों को फंसाने के लिये रची थी साजिश

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LUCKNOW : महानगर इलाके में चाकूबाजी में मारे गए बीजेपी नेता प्रत्यूषमणि त्रिपाठी ने दोस्तों के जरिये खुद पर हमला कराया था. पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करते हुए प्रत्यूष के पांच दोस्तों को अरेस्ट कर लिया है. पुलिस के मुताबिक, प्रत्यूषमणि ने यह साजिश खुद के संग हुई मारपीट की घटना के आरोपियों को फंसाने के इरादे से रची थी, पर यह दांव खुद उसकी जान पर भारी पड़ गया. उल्लेखनीय है कि दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने हत्याकांड के बाद ही अपनी छानबीन में प्रत्यूष की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर पर सवाल उठाते हुए मामले में पेंच होने की ओर इशारा किया था. अब पुलिस घटना के बाद अरेस्ट कर जेल भेजे गए बेकुसूर आरोपियों को रिहा कराने के लिये कोर्ट में प्रार्थनापत्र देगी.

यह थी घटना

बीती तीन दिसंबर की रात करीब 10.40 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि महानगर स्थित बादशाह नगर रेलवे स्टेशन के करीब डॉ. नकुल सिन्हा क्लीनिक के बगल में एक युवक लहूलुहान हालत में पड़ा हुआ है. जानकारी मिलने पर पहुंची पीआरवी मौके पर पहुंची और घायल युवक को इलाज के लिये ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मृतक की पहचान कैसरबाग के मॉडल हाउस निवासी प्रत्यूषमणि त्रिपाठी के रूप में हुई. प्रत्यूष बीजेपी युवा मोर्चा का पदाधिकारी रह चुका था. घटना के बाद मृतक की पत्नी प्रतिमा त्रिपाठी की तहरीर पर पुलिस ने सलमान, अदनान, शीबू, ध्रुव व रोहित के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कर आरोपी सलमान, शीबू व अदनान को अरेस्ट भी कर लिया था.

साक्ष्य झुठला रहे थे एफआईआर की थ्योरी

एसपी ट्रांसगोमती हरेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस ने एफआईआर में आरोपी बनाए गए दो आरोपियों अदनान व सलमान को अरेस्ट कर लिया. पर, जब मामले की जांच शुरू की गई तो घटना के वक्त उन दोनों की लोकेशन वहां नहीं मिली. शक होने पर पुलिस ने एफआईआर में नामजद कराए गए अन्य आरोपियों की भी लोकेशन चेक की लेकिन, उनकी भी लोकेशन घटना वाली शाम प्रत्यूष के आसपास या साथ नहीं मिली. आरोपियों व परिजनों से पूछताछ में भी घटना में उनकी संलिप्तता की पुष्टि नहीं हो रही थी. यानी आरोपियों के पक्ष में मिल रहे साक्ष्य एफआईआर में बयां की गई थ्योरी को झुठला रहे थे. जिसके बाद पुलिस ने जांच के दायरे को बढ़ाते हुए अन्य संभावित बिंदुओं पर छानबीन शुरू की.

मोबाइल फोन ने सुलझाई गुत्थी

इंस्पेक्टर महानगर विकास पांडेय के मुताबिक, एफआईआर में दर्ज आरोपियों के इस घटना में शामिल न होने की पुष्टि होने के बाद जांच की शुरुआत प्रत्यूषमणि की पत्नी प्रतिमा के बयान से शुरू की गई. प्रतिमा ने पुलिस को बताया था कि घटना वाली शाम करीब छह बजे प्रत्यूषमणि घर से अपने दोस्त मडि़यांव निवासी आशीष अवस्थी के साथ उसकी डिस्कवर बाइक से निकले थे. उनके साथ मडि़यांव निवासी महेंद्र गुप्ता अपनी बाइक से व सरोजनीनगर निवासी अनिल राणा प्रत्यूष की पल्सर बाइक से निकले थे. पुलिस ने प्रत्यूष, आशीष, महेंद्र गुप्ता व अनिल राणा के मोबाइल की लोकेशन निकाली तो यह गुत्थी सिलसिलेवार ढंग से सुलझती चली गई. इन सभी की लोकेशन प्रत्यूष के साथ घटनास्थल पर ही थी. जहां यह सभी करीब 45 मिनट तक साथ रहे. वहीं, घटना के बाद यह सभी अलग-अलग इलाकों में मूव कर गए.

उगल दिया सच

लोकेशन की पुष्टि होने पर पुलिस ने आशीष अवस्थी, अनिल राणा व महेंद्र गुप्ता को कस्टडी में लेकर पूछताछ की तो उन तीनों ने सच उगल दिया. उन्होंने बताया कि मारपीट के आरोपियों को दूसरे संगीन मामले में फंसाने के लिये प्रत्यूषमणि ने उन लोगों के साथ बैठकर यह साजिश रची थी. उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन वे तीनों प्रत्यूष के साथ घर से निकले और फिर आईटी चौराहे पहुंचे. जहां उनके दो अन्य दोस्त अमित अवस्थी उर्फ राजा व प्रभात सिंह उर्फ ऋषि उनका इंतजार कर रहे थे. वहां पहुंचने पर वे लोग भी उनके साथ हो लिये और वे सभी बादशाह नगर रेलवे स्टेशन के करीब पहुंचे. जहां करीब 45 मिनट तक सन्नाटा होने का इंतजार करने के बाद अनिल राणा से प्रत्यूष ने खुद पर चाकू से हमला कराया. हमले के बाद उसने खुद ही सभी दोस्तों को वापस जाने को कहा. हालांकि, चाकू का वार काफी गहरा लग गया और अत्यधिक खून बह जाने की वजह से प्रत्यूष की मौत हो गई. आरोपियों ने बताया कि वार करने के बाद उन लोगों ने चाकू व ग्लव्स कुकरैल नाले में फेंक दिया. पुलिस उसकी बरामदगी की कोशिश में जुट गई है.

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खुद ही खरीदा चाकू

आरोपी महेंद्र ने बताया कि घर से निकलने के बाद वे लोग प्रत्यूष के साथ अमीनाबाद गड़बड़झाला मार्केट पहुंचे. जहां प्रत्यूष ने खुद ही 250 रुपये में मीट काटने वाला चाकू खरीदा. वहीं, उसने महेंद्र को मेडिकल स्टोर में भेजकर ग्लव्स खरीदवाया. हमले का सारा सामान लेने के बाद वे लोग सीधे घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

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सुरक्षा लेना चाहता था प्रत्यूष

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि प्रत्यूषमणि घर में घुसकर उसके संग की गई मारपीट से दहशत में आ गया था. कैसरबाग पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न करने की वजह से उसे डर था कि आरोपी उस पर फिर से हमला कर सकते हैं. यही वजह थी कि उसने सुरक्षा लेने और आरोपियों को जानलेवा हमले के संगीन मामले में फंसाने के लिये यह साजिश रच डाली.