अनुराधापुर (रायटर्स)। श्रीलंका के नये राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे ने सोमवार को अनुराधापुरा के एक प्राचीन मंदिर में बौद्ध भिक्षुओं से आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। 'द टर्मिनेटर' के नाम से विख्यात 70 वर्षीय पूर्व रक्षा प्रमुख ने इस वर्ष के शुरू में इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा ईस्टर बम हमलों से पीड़ित राष्ट्र के लिए अपने अभियान को सुरक्षा का मुद्दा बनाया था। गोताबाया को हिंद महासागर में स्थित द्वीपीय राष्ट्र के बौद्ध सिंहली बहुमत के एक चैंपियन के रूप में देखा जाता है। 10 साल पहले अपने भाई और तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नेतृत्व में तमिल अलगाववादियों के खिलाफ चलाये गए सैन्य अभियान की कामयाबी में इनका महत्वपूर्ण योगदान था।

सिंहल संस्कृति और विरासत की रक्षा का किया वादा

राजपक्षे ने शपथ ग्रहण समारोह में हजारों समर्थकों के समक्ष अपने भाषण में कहा कि उन्हें मुझे लगता है कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वे देश को आतंकवाद, अंडरवर्ल्ड गतिविधियों, लुटेरों, जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षित करने के लिए राज्य सुरक्षा मशीनरी का पुनर्निर्माण करेंगे। राजपक्षे ने सिंहल संस्कृति और विरासत की रक्षा करने और नैतिकता तथा पारंपरिक तरीकों की रक्षा के लिए राज्य प्रायोजन का भी वादा किया। उन्होंने कहा कि एक नए राष्ट्रपति के रूप में वे फिर से इस देश को विकसित करने के लिए सच्चे श्रीलंकाई के रूप में लोगों को शामिल होने का अनुरोध किया। राजपक्षे एक सफेद शॉर्ट-शर्ट और पतलून में थे।

आर्थिक मंदी से बाहर निकालने के लिए किया मतदान

मौजूदा सरकार में आवास मंत्री रहे साजिथ प्रेमदासा को हराने के बाद रविवार को राष्ट्रपति चुनाव में राजपक्षे को विजेता घोषित किया गया। लाखों लोगों ने 15 वर्षों में देश को अपने सबसे गहरे आर्थिक मंदी से बाहर निकालने के लिए एक नए राष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए मतदान किया। इसके पर्यटन क्षेत्र द्वारा होटलों और चर्चों पर अप्रैल के हमलों के बाद घसीटा गया, जिसमें 250 से अधिक लोग मारे गए थे। इस्लामिक स्टेट ने दावा किया पिछली सरकार को इसकी खुफिया एजेंसियों की विफलता के बारे में बहुत आलोचना की गई थी कि हमले की योजना बनाई जा रही थी।

पड़ोसी देशों के लिए भाषण का कुछ अंश अंग्रेजी में

श्रीलंका के 22 मिलियन लोगों में से 70 प्रतिशत बौद्ध सिंहली हैं, 14 प्रतिशत तमिल हिंदू हैं, मुसलमान 10 प्रतिशत हैं जबकि बाकी कैथोलिक और अन्य धर्म के हैं। राजपक्षे को चीन के करीबी के रूप में देखा जाता है। उन्होंने सभी देशों से श्रीलंका की संप्रभुता का सम्मान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि हम अपने विदेशी संबंधों में तटस्थ रहना चाहते हैं और विश्व शक्तियों के बीच किसी भी टकराव से बाहर रहना चाहते हैं। ये बातें उन्होंने अंग्रेजी में कही जबकि उनके भाषण का बड़ा हिस्सा सिंहल भाषा में था।

Posted By: Satyendra Kumar Singh

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