VARANASI: इस साल 90 परसेंट या उससे अधिक मा‌र्क्स की आस रखने वाले स्टूडेंट्स को निराशा ही हाथ लगने वाली है. हालांकि यह लास्ट ईयर यानी 2017 के बोर्ड एग्जाम के समय ही हो जाना था पर तब बोर्ड ने उसे टाल दिया. बता दें कि पिछले साल ही सेंट्रल गवर्नमेंट ने 12वीं के बोर्ड एग्जाम में नंबर लुटाने वाली पॉलिसी को खत्म करने का निर्देश दिया था. इसका कई बोर्ड और पब्लिक ने विरोध किया. कुछ तो इसके खिलाफ कोर्ट भी चले गए थे, जिसके चलते पिछले साल ऐसा नहीं हो सका. लेकिन इस बार सभी बोर्ड ने मिल कर मॉडरेशन पालिसी में चेंजेज कर दिया है. इस बाबत राज्य स्तरीय शिक्षा बोर्ड को लेटर प्राप्त हो गया है.


पॉलिसी का दिखेगा असर

इस बार लास्ट ईयर की तुलना में स्टूडेंट्स के कम मा‌र्क्स आयेंगे. ऐसा विभिन्न बोर्ड द्वारा मॉडरेशन पॉलिसी में चेंजेज किए जाने के चलते होगा. सीबीएसई के सिटी कोऑर्डिनेटर व डालिम्स स्कूल रोहनिया के प्रिंसिपल वीके मिश्र के मुताबिक अब स्टूडेंट्स को 90-95 परसेंट मा‌र्क्स आना मुश्किल है. दरअसल, अभी तक सीबीएसई हो या आईसीएसई या यूपी बोर्ड सभी होड़ में खूब नंबर लुटाया करते थे. यह बढ़ोत्तरी आठ से 10 परसेंट तक हुआ करती थी. यानी जिस छात्र का 85 परसेंट नंबर आना चाहिए उसे भी 90-95 परसेंट तक मा‌र्क्स दिया जाता था. इसका दूसरा पक्ष विभिन्न कॉलेजेज और यूनिवर्सिटीज की मेरिट में दिखता था. ऐसा इस साल नहीं होगा.


फेल भी हो जाता था पास

दरअसल इसकी शुरूआत ग्रेस मार्क से हुई थी. जिसके तहत एक-दो नंबर से फेल होने वाले स्टूडेंट्स को पास करने के लिए पहले आठ मा‌र्क्स फिर बढ़ते-बढ़ते 10-20 मा‌र्क्स तक दिए जाने लगे. यहां तक व्यवस्था हो गई कि किसी एक सब्जेक्ट में 20 परसेंट पाने वाला स्टूडेंट्स भी अच्छे मा‌र्क्स से उत्तीर्ण होने लगे. इसके अलावा किसी क्वैश्चन पेपर में किसी प्रश्न में गलती होने पर भी स्टूडेंट्स को पूरे मा‌र्क्स दे दिए जाते थे. देखते ही देखते यह परंपरा बन गयी.