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KANPUR: 'राजी' के लिए मिले अवॉड्र्स और आपकी अपकमिंग मूवीज देखते हुए क्या आपको लगता है कि आप इस वक्त अपने गेम के टॉप पर हैं? मैं खुद को ओवर कॉन्फिडेंट फील नहीं करने देती। प्रोफेशनली या पर्सनली, जब चीजें मेरी जिंदगी में सही हो रही होती हैं तो मैं ज्यादा फोकस्ड और हार्ड वर्किंग हो जाती हूं। सक्सेस का मतलब यह नहीं है कि आप ढीले हो जाएं बल्कि तब आपको ज्यादा मेहनत करनी चाहिए। मुझे मूवीज में आए हुए लगभग दस साल होने को हैं। शुरुआत के पांच साल तो हवा के झोंके की तरह निकल गए। जब स्टूडेंट ऑफ द इयर (2012) आई थी तो मुझे पता नहीं था कि मैं किस तरफ जा रही हूं।'

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ज्यादा सोचती और स्ट्रेस लेती हूं

आलिया ने आगे कहा, 'मैं अपने सफर को एक एंडवेंचर ट्रिप की तरह देखती हूं जिसमें कई शानदार पड़ाव आए हैं। मुझे लगता है कि मैं सेटल हो गई हूं। मैं नैचुरल तौर पर ज्यादा सोचने वाली और स्ट्रेस लेने वाली इंसान हूं इसलिए मैं खुद को निगेटिव सोच से दूर रखती हूं। क्या स्ट्रॉन्ग महिलाओं वाले रोल्स की तरफ आपका झुकाव ज्यादा रहता है? वे रोल्स खुद मेरे पास आते हैं। सच कहूं तो ऐसे रोल्स बहुत जिम्मेदारी के साथ लिखे जाते हैं और उनमें काफी वजन होता है।'

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वुमन सेंट्रिक होन न हो काम से मतलब

मैं महिलाओं के अलग-अलग पहलुओं को चुनती हूं। राजी की 'सहमत' गली बॉय की 'सफीना' जितनी तेज-तर्रार नहीं थी पर वह बहुत बहादुर थी। अगर मुझे मूवी पसंद आती है तो मैं उसमें जरूर काम करूंगी फिर चाहे वह वुमन-सेंट्रिक हो या न हो। क्या एक ऐसी इंडस्ट्री में अपनी राय रखने में परेशानी सामने आती है जहां लोगों की सोच होती है कि यहां उम्र और एक्सपीरियंस ज्यादा मायने रखता है? मैं ऐसे माहौल में पली-बढ़ी हूं जहां लोग बेपरवाह होकर अपनी राय सामने रखते हैं। मेरे मेंटर करण जौहर ने भी हमेशा ऐसा माहौल मुझे दिया है जहां आप कौन हैं और आपकी उम्र कितनी है, इसकी परवाह किए बिना आप अपनी राय रख सकते हैं। लोग आपकी कही बातों पर ध्यान भी देते हैं।

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नैचुरल नहीं एक्टिंग डेली सीखती हूं

आपने काम करते-करते एक्टिंग सीखी है पर कई लोगों को लगता है कि यह आपके अंदर नैचुरल तौर पर है। क्या आप इससे इत्तेफाक रखती हैं?

नहीं, मैं हर रोज अपने डायरेक्टर्स से कुछ नया सीखने की कोशिश करती हूं। कोई भी इंसान नैचुरल नहीं होता है। मैं अपने हर रोल को ऐसे देखती हूं कि जैसे मुझे माउंट एवरेस्ट चढऩा है, यही मेरा प्रोसेस है। मुझे याद है कि जब मुझे उड़ता पंजाब (2016) मिली थी तो मैं डर गई थी पर मैं इसको लेकर एक्साइटेड ज्यादा थी। हालांकि, मैं किसी गलतफहमी में नहीं हूं और मुझे अपनी लिमिटेशन पता है। अगर मुझे लगता है कि मैं मूवी के साथ इंसाफ नहीं कर सकती तो मैं उससे नहीं जुड़ती हूं।

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