लखनऊ (पीटीआई)। एंटी-सीएए प्रदर्शनकारी, जिन्हें कथित तौर पर सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के लिए 1.41 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली नोटिस जारी की गई थी, COVID-19 लॉकडाउन के जारी रहने तक चैन से बैठ सकते हैं क्योंकि इस आदेश को अभी हैल्ड पर रख दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने दिए थे आदेश

पिछले साल 19 दिसंबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, सीएए के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ और खदरा, परिवर्तन चौक, ठाकुरगंज और कैसरबाग इलाकों में सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था।इस दौरान कई वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से हर्जाने का एसेसमेंट करने और इस इंसीडेंट में शामिल लोगों से पेनाल्टी भी भरने के लिए कहने का आदेश दिया था। लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट अभिषेक प्रकाश ने कहा, "इस हरकत में शामिल लोगों से क्षतिपूर्ति और उनकी संपत्ति कुर्क कराने की प्रक्रिया जारी है एक बार लॉकडाउन खत्म हो गया, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने पुलिस रिपोर्टों के आधार पर 53 व्यक्तियों को नोटिस दिए थे और वसूली की समय सीमा अप्रैल के पहले सप्ताह थी, जिसके बाद संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया शुरू होनी थी।

आगे बढ़ी वसूली की डेट

COVID-19 महामारी के कारण, इस बीमारीको फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से 21 दिनों के लिए नेशन वाइड लॉकडाउन अनाउंस किया था, बाद में केंद्र सरकार ने इसे 3 मई तक बढ़ा दिया था। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, खदरा क्षेत्र में 13 प्रदर्शनकारियों की पहचान की गई और संपत्ति के नुकसान का अनुमान 21,76,000 रुपये था, जबकि परिवर्तन चौक में 24 लोगों की पहचान की गई और 69,65,000 रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया। ठाकुरगंज में, 10 व्यक्तियों की पहचान की गई थी और नुकसान 47,85,800 रुपये था, जबकि कैसरबाग में 6 प्रदर्शनकारियों की पहचान की गई थी और नुकसान 1,75,000 रुपये था। इन सभी 53 व्यक्तियों को प्रशासन द्वारा वसूली नोटिस दिए गए और उन्हें राशि जमा करने या आगे की कार्रवाई का सामना करने के लिए कहा गया था।

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