अब पिछड़े वर्गों के लिए तय 27 फीसदी आरक्षण में साढ़े चार फ़ीसदी हिस्सा अल्पसंख्यकों को मिल सकेगा. यह फ़ैसला एक जनवरी 2012 से लागू हो जाएगा.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला किया जिससे सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण का रास्ता साफ़ हो गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से बताया गया है कि यह फै़सला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के एलान होने से ठीक पहले लिया गया है. राजनीतिक हलकों में इस बात पर भी कयास लग रहे हैं कि भारत का चुनाव आयोग बहुत जल्द उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तारीख़ों की घोषणा कर सकता है. ग़ौरतलब है कि ऐसी किसी भी घोषणा के तुरंत बाद से चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी.

'अनुपात से आरक्षण'

उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने कुछ दिन पहले कहा था कि वह धार्मिक अल्पसंख्यकों को आबादी के अनुपात से आरक्षण देने की पक्षधर हैं.

लेकिन मायावती ने पिछड़े वर्गों के कोटे के अंदर मुस्लिम समुदाय को आरक्षण दिए जाने के कांग्रेस सरकार के प्रस्ताव का एक तरह से विरोध किया था.

मायावती का कहना था कि ऐसा करने से पहले संविधान में संशोधन करके पिछड़े वर्गों के आरक्षण का कोटा बढ़ाया जाए. जबकि कुछ ही दिन पहले उत्तर प्रदेश में आयोजित एक रैली के दौरान कोंग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि सरकार अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने पर गंभीर है. उन्होंने भरोसा दिलाया था कि सरकार अपना वादा निभाएगी.

वहीं कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी कहा था कि पिछ़डे मुसलमानों को 27 फीसदी ओबीसी कोटा के अंदर आरक्षण देने पर सरकार जल्दी ही एक कैबिनेट बैठक में फै़सला करेगी.

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