सवाल ड्राइवर्स का नहीं, भरोसे का है

आप कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे है तो पहले ड्राइविंग सीख लें. कहीं ऐसा न हो कि आप कार खरीद लें और आपको ड्राइवर ही न मिले. कारों की लगातार बढ़ती संख्या ने सिटी में ड्राइवर्स की कमी पैदा कर दी है. खासकर भरोसेमंद ड्राइवर्स की. अच्छे ड्राइवर की तलाश आसान नहीं रही. शहर में जो ड्राइवर काम कर रहे हैं वे या तो प्रशिक्षित नहीं हैं या फिर उनका रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं है. अच्छे ड्राइवर के लिए लोग ज्यादा कीमत चुकाने क ो भी तैयार हैं, लेकिन फिर भी ड्राइवर मिलना मुश्किल है. स्कूल बस, ऑफिस जाने वाले, व्यापारी और उद्योगपति सभी ड्राइवर क ो लेक र परेशान हैं. पिछले दिनों पैदा हुई असुरक्षा की भावना ने भी अच्छे ड्राइवर की मांग बढ़ा दी है.

ड्राइवर्स का अभाव

फोर व्हीलर्स की संख्या बढऩे के कारण लोगों को एक्सपर्ट ड्राइवर तलाशने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है. पिछले दो साल में गाडिय़ों के बढऩे का असर ड्राइवर्स के पैकेजेस में होने वाली वृद्धि के रू प में देखा जा सकता है. इस दौरान उनकी सेलरी में लगभग 100 फीसदी तक का इजाफा हुआ हैं. कई बिजनेस फैमिली में ऐसे वर्कर्स भी रखे जा रहे हैं जिन्हें ड्राइविंग आती हो और वक्त जरूरत पर ड्राइवर का रोल भी निभा सकें.  

ड्राइविंग रिक्वायरमेंट

ड्राइवर्स की कमी को दूर करने के लिए बिजनेस फैमिली एक तीर से दो निशाने लगाने की कोशिश कर रहे हैं. त्रिपुंड ज्वैलर्स के ऑनर कुश अग्रवाल का कहना है कि अपने शॉरूम में जो पियून रखा है उसे ड्राइविंग भी आती है. ताकि कोई काम हो तो कार ले जाकर आसानी से कर सकें. वहीं असिस्टेंट रखते समय भी योग्यताओं में ड्राइविंग को शामिल कर लिया गया है. ऐसे उम्मीदवारों को नौकरी पर रखा जाता है, जिन्हें ड्राइविंग भी आती हो. नौकरी पर रखने के बाद ऑफिस के साथ ही उनसे ड्राइवर्स की तरह भी सेवाएं ली जाती हैं, ताकि बाद में ड्राइवर्स की कमी के कारण संस्थान को किसी भी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े.

 

पार्ट टाइम ड्राइविंग

वाहनों की बढ़ती संख्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेरठ में हर रोज 70-80 नई फोर व्हीलर्स सडक़ों पर आती हैं. कार खरीदने वाले परिवारों में कई ऐसे होते हैं, जिन्हें गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर्स की जरुरत होती है, क्योंकि घर के मुखिया के व्यस्त होने के कारण वे बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने, मार्केट जाने और दूसरे कामों के लिए ड्राइवर्स पर निर्भर होते हैं. फुल टाइम ड्राइवर्स न मिलने से कई घरों में पार्ट टाइम ड्राइवर्स से भी काम चलाया जा रहा है. पीएल शर्मा स्थित शॉरूम ऑनर वरु सिंह की माने तो बच्चों को स्कूल लाने-छोडऩे या ऑफिस तक आने-जाने के समय के लिए बड़ी मुश्किल ड्राइवर मिला है. बाकी टाइम के लिए उसने मना कर दिया. क्योंकि वो दूसरा काम भी करता है.

सेलेरी विद फैसेलिटी

कई स्कूलों और फैक्ट्रीज में ड्राइवर्स का खासा महत्व होता है. एक दिन ड्राइवर न आने से बड़े स्तर पर काम प्रभावित होता है. इसलिए यहां हर साल ड्राइवर्स अच्छा इन्क्रीमेंट दिया जाता है. पिछले दो सालों में ड्राइवर्स की सेलरी दोगुनी हो चुकी है. स्कूल-कॉलेजों और बड़ी फैक्ट्रीज में ड्राइवर्स को सेलरी के साथ ही रहने और खाने जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं. ऐसे स्थानों पर फिलहाल ड्राइवर्स की सेलरी 8 हजार से 15 हजार रुपए तक होती है.

तो यहां भी ड्राइवर्स की कमी

शहर में फिलहाल 1.50 लाख से ज्यादा फोर व्हीलर्स गाडिय़ां हैं. इसके अलावा 850 से ज्यादा स्कूल-कॉलेज बसें और 100 से ज्यादा फैक्ट्री बसें हैं. हर रोज बढ़ते वाहनों के कारण ड्राइवर्स की कमी का असर पब्लिक व्हीकल पर भी दिखाई दे रहा है. इन दिनों 120 सरकारी सिटी बसें हैं. इनमें से 96 चलती हैं. इनके लिए दो शिफ्ट में करीब 160 ड्राइवर्स हैं, जबकि 20 ड्राइवर्स की दरकार है. इसी तरह मैट्रो टैक्सी में भी कई खास मौकों पर ड्राइवर्स की कमी होती हैं.

एक्स्ट्रा इनकम का मौका

ड्राइवर्स की कमी से खुद ड्राइवर्स भी वाकिफ हैं. इस मौके को भुनाने में वे कोई कसर नहीं छोड़ते. कई ड्राइवर्स ऐसे संस्थानों में काम करते हैं, जहां रविवार को को अवकाश होता है. ऐसे में छुट्टी वाले दिन वे दूसरे घरों में ड्राइविंग का काम करते हैं. कई घरों में भी ऐसे ड्राइवर्स का इंतजार होता है, जो मौके-मौके पर उन्हें अपनी सेवाएं दे सकें. हमेशा ड्राइवर्स की अवेलिबिलिटी न होने से कई लोग इसी तरह के ड्राइवर्स से काम लेते हैं. एक दिन गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर्स को 300 से 400 रुपए तक मिलते हैं.

फैक्ट एंड फिगर्स

- सिटी में हाउस होल्ड फोर व्हीलर की संख्या 1.50 लाख है.

- स्कूल-कॉलेज में चलने वाली बसों की संख्या 850 है.

- फैक्ट्री और बड़ी कंपनियों में चलने व्हीकल की संख्या 100 से अधिक है.

- शहर में सरकारी सिटी बसें 120 हैं.  वहीं प्राइवेट सिटी बसों की संख्या 109 है.

- सिटी में 5000 टैक्सी मौजूद हैं.

इन बातों का रखें ध्यान

- ड्राइवर का पुलिस वेरीफिकेशन जरूर कराएं.

- उसके टैंप्रेरी और परमानेंट एड्रेस विद वोटर आईडी कार्ड के साथ जरूर लें.

- उसकी फोटो जरूर अपने पास रखें.

- उसका लाइसेंस चेक करें. कहीं एक्सपायर तो नहीं हो गया.

- उसको नौकरी पर रखने से पहले पूछे कि पहले कहां-कहां काम किया है.

- साथ ही वहां से काम छोडऩे का कारण पूछे.

- ड्राइवर्स के पुराने मालिक से उसके वर्किंग एक्सपीरियंस और व्यवहार के बारे में पता करें.

- जो एड्रेस दिया है उसे मौके पर जाकर जरूर क्रॉस चेक करें.

'ड्राइवर्स को रखते समय पब्लिक को सावधानी बरतनी चाहिए, वो भी तब जब कई किडनैपिंग के केसेज में ड्राइवर्स के नाम सामने आए हैं. कुछ और करें न करें ड्राइवर का पुलिस वेरीफिकेशन जरूर कराएं.'

- ओमप्रकाश यादव, एसपी सिटी

'वैसे तो सिटी बसों में किसी तरह ड्राइवर्स की कोई कमी है. जो बसें खड़ी हैं उन्हें बैकअप के लिए रखा जाता है. गाडिय़ा भी अपने टाइम से चल रही हैं.'

- टीके सिंह, एआरएम, यूपी परिवहन निगम

'ड्राइवर्स की तो बहुत कमी है. कई बार बुकिंग तक कैंसल हो जाती है. यार्ड में खड़ी खड़ी रहती है. इसका मेन कारण कुशल ड्राइवर्स की कमी और कमर्शियल लाइसेंस बनाने के नियम कढ़े होना है.'

- डीवी सिंह, सेकेट्री, मेरठ टैक्सी यूनियन