गोली मारकर हत्या कर दी
 आप बिल्कुल ठीक समझे, हम ‘शहीद’ इंद्रजीत सिंह उर्फ राजू की बात कर रहे हैं, थर्सडे को चैन फैक्ट्री चौराहे के पास चैन लुटेरों ने सरेशाम उनकी गोली मारकर हत्या कर दी. और वहां से फरार हो गए. क्योंकि उन्होंने एक महिला की चैन लूटने आए बदमाशों से मोर्चा ले लिया. सवाल ये उठता है कि क्या उस प्लेस पर सिर्फ एक ही व्यक्ति था और कोई नहीं? नहीं वहां कई लोग होंगे. पर किसी ने साहस नहीं दिखाया. अगर सब साहस दिखाते तो शायद इंद्रजीत ‘शहीद’ न होते और लुटेरों की हिम्मत न पड़ती कि वो चैन स्नैचिंग करने की कोशिश भी करें. फ्राइडे को इंद्रजीत के फैमिली मेंबर्स और साथी रोड पर उतरे तो उनको आक्रोश वाकई एक अलग ‘आंदोलन’ की ओर संकेत दे रहा था. ऊपर उठाए गए तमाम सवालों के उत्तर तलाशती इस रिपोर्ट को पढि़ए और आई नेक्स्ट के साथ जुडि़ए सबको जागरूक करने की मुहिम में. क्योंकि अगर अब नहीं तो फिर कभी नहीं?

चेन लुटेरे चुनौती
सिटी की हाईटेक पुलिस भले ही इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, टेलीफोनिक टेपिंग समेत अन्य टेक्नोलॉजी के सहारे बैैंक डकैती, मर्डर जैसे केस खोलने में कामयाब हो गई हो. लेकिन उनके लिए अभी भी बाइक सवार चेन लुटेरे चुनौती बने हुए हैं. इनके खौफ से महिलाएं ज्वेलरी पहनकर घर से निकलने में डरने लगी हैं. पॉश एरियाज हों या गलियां, ये बाइकर्स खुलेआम महिलाओं को लूटकर भाग जाते हैं और पुलिस के सिपाहसालार उन्हें पकड़ नहीं पाते. पुलिस के पास इन बेखौफ लुटेरों को पकडऩे के लिए कोई ठोस प्लान नहीं है. पिछले तीन महीने के पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में औसतन दो दिन में एक महिला लूट का शिकार हो रही है. यही वजह है कि पुलिस दबाव में ही चेन या पर्स लूट की एफआईआर दर्ज ही बड़ी मुश्किल से करती है. ज्यादातर केसों में पुलिस पीडि़ता को समझाकर या कार्रवाई का आश्वासन देकर घर भेज देती है.

क्या पुलिस से ज्यादा तेज हैं ये?
चेन लुटेरों के घटना को अंजाम देने के बाद फरार होने का मेन रीजन है कि वे बाइक चलाने में पुलिस वालों से ज्यादा एक्सपर्ट होते हैं. पुलिस डिपार्टमेंट के ज्यादातर दरोगा और सिपाही फिजिकली फिट नहीं हैं. इसके लिए उनकी टे्रनिंग भी नहीं कराई जाती है, इसी वजह से बाइकर्स चेन लूटकर भाग जाते हैं और पुलिस उनको देखती रहती है.

पॉवर बाइक का इस्तेमाल
चेन लुटेरे बाइकर्स ज्यादातर पल्सर, अपाचे जैसी पावरफुल बाइक्स का यूज करते हैं. वहीं पुलिस डिपार्टमेंट में ज्यादातर दरोगा और सिपाही अभी तक 125 सीसी की बाइक का यूज करते हैं. जिससे बाइकर्स घटना को अंजाम देने के बाद भाग जाते हैं और पुलिस कर्मी उनको पकड़ नहीं पाते हैं.

रखते हैं पूरी जानकारी
चेन लुटेरे बाइकर्स को सिटी के पॉश इलाके से लेकर घनी बस्ती की गलियों तक जानकारी रहती है. वे जानते है कि घटना को अंजाम देने का बाद किस रास्ते से भागना है, जबकि ज्यादातर पुलिसकर्मियों को खुद के थाना क्षेत्र के पूरे रास्तों का पता नहीं है. यही वजह है कि लुटेरे घटना को अंजाम देने के बाद गलियों के रास्ते से होकर भाग जाते हैं.

15 से 35 साल के ज्यादातर लुटेरे
सिटी में महिलाओं से चेन या पर्स लूटने वाले ज्यादातर लुटेरे 15 से 35 साल के बीच के हैं. पुलिस सोर्सेज के मुताबिक चेन लुटेरे उम्रदराज नहीं होते हैं. अभी तक पकड़े गए लुटेरों में ज्यादातर अच्छी फैमिली के लडक़े हैं, जो बुरी संगत और खर्चों को पूरा करने के लिए लूट जैसी वारदातें करने लगते हंै.

अन्डरग्राउन्ड हो जाते हैं
पुलिस के लिए चुनौती बने चेन लुटेरे एक घटना को अंजाम देने के बाद कुछ दिनों के लिए अन्डरग्राउन्ड हो जाते हंै. करीब सात से दस दिन बाद वे फिर वारदात करने से इरादे से रोड पर आते हैं. इसके अलावा वे दूसरे इलाके में जाकर वारदात करते हैं.

रोज होती है स्नेचिंग
पुलिस रिकॉर्ड में तो दो दिन में एक बार चेन लूट की वारदात होती है, लेकिन इसकी हकीकत कुछ और ही है. पुलिस एफआईआर से बचने के लिए पीडि़ता को हर सहूलियत देती है. पुलिस दबाव में ही रिपोर्ट दर्ज करती है. पिछले पंद्रह दिन में 20 चेन या पर्स लूट की घटनाएं हुई हैं, लेकिन इनमें से शायद ही कोई एफआईआर दर्ज की गई हो.

इन इलाकों में होती हैं वारदातें
चेन लुटेरे बाइकर्स पहले तो सुनसान इलाके में घटना को अंजाम देते थे, लेकिन पुलिस की सुस्ती देख वे अब खुलेआम पॉश एरियाज में लूटकर भाग जाते हैं. वे फीमेल्स को ही टारगेट बनाते हैं. इसके लिए वे स्वरूपनगर, आर्यनगर, मॉल, काकादेव, किदवईनगर, कोकाकोला चौराहा, मोतीझील, नौबस्ता, माल रोड, कैंट रोड, लालबंगला क्षेत्रों में घूमते हैं और मौका मिलते ही महिला को लूटकर भाग जाते हैं.

मुखबिर तंत्र फेल
पुलिस ने भले ही हाईटेक टेक्नोलॉजी से बैैंक डकैती, मर्डर जैसे केस साल्व कर लिए हैं, लेकिन मुखबिर तंत्र फेल होने से उनको अपने थाना क्षेत्र के अपराधियों के मूवमेंट की जानकारी नहीं मिल पाती है. पहले मुखबिर क्षेत्र में घूमकर हर अपराधी की मूवमेंट के बारे में थानेदार को देता था. जिससे उनको आसानी से पकड़ लिया जाता था. साथ ही उनके प्लान के बारे में पुलिस को पहले ही खबर हो जाया करती थी. जानकारों के मुताबिक पुलिसिंग में इस तरह के चेंजेज की वजह से इनकी परफॉरमेंस में काफी कमी आ गई है.