- जिले में रोजाना दो से तीन शिकायतें, काउंसिलिंग भी हो जा रही बेअसर

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GORAKHPUR: जिले में शादी के बाद प्रेम संबंधों को लेकर दंपति के बीच तकरार के मामले बढ़ते जा रहे हैं. कहीं पर महिलाएं अपने पति पर शक जताते हुए शिकायत दर्ज करा रहीं तो कहीं पर शादी के बाद दूसरों से बातचीत को लेकर पति को आपत्ति है. विवाहेतर संबंधों के चक्कर में बढ़ी कलह का खामियाजा बच्चे भुगत रहे हैं. शुक्रवार को पत्‌नी के साथ विवाद की पंचायत करने पहुंचा पति अपने तीन बच्चों को महिला थाना पर छोड़कर चला गया था. मामले की पड़ताल में पता लगा कि इस तरह के केसेज महिला थाना पर बढ़ गए हैं. हर माह आठ से 10 शिकायतें सामने आ रहीं जिसमें बच्चों को छोड़कर पति-पत्‌नी से अलग रहना चाह रहे. महिला थाना प्रभारी ने बताया कि ऐसे मामले सामने आने पर काउंसिलिंग करके दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौता कराया जाता है. लेकिन कई बार चंद दिनों के भीतर फिर रिश्ता टूटने की नौबत आ जा रही.

केस 1
गुलरिहा एरिया निवासी एक व्यक्ति तीन बच्चों का पिता है. उसकी पत्‌नी किसी से बातचीत करती है. इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद खड़ा हो गया. तीन बच्चों को अकेला छोड़कर पत्‌नी मायके चली गई. पति ने पहले काफी प्रयास किया कि वह लौट आए. लेकिन बात न बनने पर मामला महिला थाना पहुंचा. शुक्रवार को पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाया. इस दौरान पत्‌नी से नाराज पति अपने तीन बच्चों को महिला थाना छोड़कर चला गया. जानकारी होने पर महिला थाना प्रभारी ने बच्चों को उनके पिता तक पहुंचवाया.

केस 2
खोराबार एरिया निवासी एक दंपति के बीच भी विवाहेतर संबंध के संदेह में झगड़ा चल रहा है. महिला पांच बच्चों की मां है. उसका बड़ा बेटा 18 साल का हो गया है. मां-बाप के बीच पंचायत के चक्कर में पिस रहे बच्चों की पढ़ाई-लिखाईबर्बाद हो रही. कभी पति साथ रहने को राजी होता है तो कभी पत्‌नी नकार जाती है. ऐसे में करीब एक माह से महिला थाना पुलिस दोनों के बीच काउंसिलिंग कराकर मामला शांत कराने की कोशिश में जुटी है. बड़ा बेटा अपने मां-बाप को समझाबुझाकर एक करने की कोशिश में जुटा है.

बच्चों का बर्बाद हो रहा फ्यूचर, मां-बाप बसा रहे नई गृहस्थी
यह दो मामले यह बताने के लिए काफी हैं कि विवाह के बाद किसी अन्य से रिश्तों को लेकर पारिवारिक कलह बढ़ती जा रही है. कहीं पर पत्‌नी अपने पति के चाल-चरित्र से नाराज होकर मायके चली गई तो कहीं पर पति ने पत्‌नी पर शक जताते हुए उसे घर से भगा दिया. इनमें ज्यादातर ऐसे मामले सामने आ रहे जिनमें दंपतियों के पास बच्चे हैं. शादी के सात-आठ साल बाद किसी अन्य से संबंध रखने की बात को लेकर शुरू हुई तकरार बच्चों के लिए मुसीबत बन गई है. महिला थाना पर हर माह ऐसे मामलों की तादाद बढ़ती जा रही है. शिकायत आने पर महिला थाना पुलिस भी हैरत में पड़ जाती है. उनका कहना है कि मां-बाप की लड़ाई में बच्चों का फ्यूचर बर्बाद हो रहा है. नाराज पति-पत्‌नी दूसरे संग रहने के चक्कर में बच्चों को उपेक्षित छोड़ दे रहे. इसका व्यापक असर समाज पर नजर आएगा.

इस तरह की प्रॉब्लम झेल रहे बच्चे

- किसी अन्य से संबंध को लेकर मां-बाप के बीच लड़ाई में बच्चे अकेले पड़ जा रहे हैं.

- शादी के बाद इस तरह के मामलों में बच्चों का फ्यूचर बर्बाद हो रहा है. अक्सर वह अपने मां-बाप संग महिला थाना का चक्कर लगाते हैं.

- बच्चों की परवरिश को लेकर कोई इंतजाम नहीं हो पाता. मां के मायके या अन्य किसी जगह पर रहने पर पिता अकेले देखभाल नहीं कर पाते.

- पिता के अपने कामकाज में बिजी होने, किसी अन्य से संबंध की दशा में भी बच्चों की प्रॉपर केयरिंग नहीं हो पाती.

- स्कूल से लेकर खेलने जाने तक बच्चों का मजाक बनता है. उनको अपराध बोध महसूस करना पड़ता है.

- रिश्तेदारों के भरोसे पल रहे बच्चों को अक्सर यातना झेलनी पड़ रही है. मां-बाप का प्यार दुलार उनको नहीं मिल पाता.

- मां-बाप की लड़ाई में बच्चों को बोझ समझकर रिश्तेदार पालन-पोषण करते हैं. इसलिए वह खुद को पीडि़त मानते हैं.

महिला थाना पर हर माह आने वाले मामले- 20 से 25

शादी के बाद पति से विवाद में बच्चों से दूरी - 8 से 10

हर माह सुलह-समझौते से निपटने वाले मामले- 3 से 4

 

वर्जन

शादी के बाद अफेयर की वजह से ज्यादातर रिश्ते टूट रहे हैं. इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है. दो-तीन बच्चों की मां का अफेयर किसी अन्य से चल रहा तो पिता भी कहीं अन्य बिजी हैं. विवाद की वजह से दोनों के अलग रहने पर बच्चों की देखभाल नहीं हो पा रही. ऐसे में उनको समझाबुझाकर साथ रहने के लिए राजी करने की कोशिश की जाती है.
- अर्चना सिंह, एसएचओ, महिला थाना