क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: रांची के ईस्ट जेल रोड स्थित मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित 'निर्मल हृदय' आश्रम में शुक्रवार को सीआइडी की टीम ने छापेमारी की. पिछले साल संस्था से बच्चों की बिक्री किए जाने का खुलासा होने के बाद सीबीआइ पूरे मामले की जांच कर रही है. शुक्रवार को छापेमारी के दौरान सीबीआइ टीम ने बच्चों के जन्म के रिकॉर्ड से संबंधित रजिस्टर, पुराने दस्तावेज, कंप्यूटर ड्राइव और लैपटॉप भी जब्त किए. लैपटॉप में दर्ज बच्चों के जन्म और अविवाहित माताओं की एंट्री के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है. गौरतलब हो कि वर्ष 2018 के जुलाई में बच्चा बिक्री प्रकरण सामने आने के बाद कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. बाद में यह मामला सीआइडी को ट्रांसफर किया गया था. मामले में सिस्टर कांसिलिया और सफाईकर्मी अनिमा इंदवार को जेल भेजा गया था. मामले में एक-एक कर पुलिस ने बिक्री किए जा चुके पांच बच्चों को बरामद किया था.

सिस्टर व स्टाफ से पूछताछ

सुबह करीब नौ बजे ही प्रकरण का अनुसंधान कर रहे इंस्पेक्टर रविकांत पहुंचे. पहले उन्होंने संस्था की कई सिस्टरों और कर्मियों से पूछताछ की. उनका बयान रिकॉर्ड करने के बाद वहां के दस्तावेजों को जब्त किया. बयान रिकॉर्ड करने और दस्तावेजों को जब्त करने में शाम हो गई. खबर लिखे जाने तक जब्ती की प्रक्रिया जारी थी. बताया जा रहा है कि सीआइडी ने संस्था के कार्यालय में लगे लैपटॉप व कंप्यूटर से डाटा रिकवरी भी कर ली है. इसे पहले डिलीट कर दिया गया था. इसके लिए तकनीकी सेल के एक्सपर्ट भी निर्मल हृदय पहुंचे थे.

सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी

बच्चे की बिक्री का मामला सामने आने के बाद सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष रूपा कुमारी ने 3 जुलाई 2018 को रांची के कोतवाली थाना स्थित एएचटीयू (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. इसमें निर्मल हृदय की संचालिका, सिस्टर कांसिलिया, बच्चे को बेचने वाली अनिमा इंदवार, बच्चे की मां, खरीदार सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) जिले के ओबरिया निवासी सौरभ अग्रवाल और उनकी पत्‍‌नी प्रीति अग्रवाल, सदर अस्पताल की गार्ड मंजू, मोरहाबादी के हरिहर सिंह रोड निवासी दीपधारी देवी, उनके पति ओमेंद्र सिंह, सिमडेगा की दंपती शैलजा तिर्की ओर उसके पति, सहित 12 को आरोपित बनाया गया था. प्रकरण सामने आने पर पता चला था कि कई बच्चों का रिकॉर्ड पुलिस को नहीं मिल रहा है. प्राथमिकी में जेजे एक्ट का उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया था.

19 दिन पहले खाली हाथ लौटी थी टीम

निर्मल हृदय में सीआइडी ने 19 दिन पहले 22 सितंबर 2019 को भी पहुंची थी. उस समय संस्था में इंचार्ज और पूछताछ के लिए संबंधित लोग नहीं मिले थे. इस वजह से सीआइडी की टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा था.