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-तीन साल से घाटे में चल रहा रजिस्ट्री विभाग, तिकड़म लगाकर जमीन खरीद रहे हैं लोग

vineet.tiwari@inext.co.in

PRAYAGRAJ: पिछले साल जमीनों के सर्किल रेट नहीं बढ़ाए गए. इस साल भी उनमें बढ़ोतरी काफी कम होगी. इसके पीछे वजह है जिला प्रशासन को लगातार हो रहा रेवेन्यू लॉस. असल में इनकम टैक्स के राडार पर आने से बचने के चक्कर में लोगों की प्रॉयोरिटी अब प्रॉपर्टी परचेज करना नहीं रह गई है. ऐसे में प्रशासन ने इस साल भी जमीनों का सर्किल रेट नॉमिनल बढ़ाने का फैसला किया है.

धीरे-धीरे कम हो रहा है राजस्व का घाटा

नियमों के मुताबिक तीस लाख रुपए से अधिक की जमीन की खरीद फरोख्त में शामिल लोगों की जानकारी ऑनलाइन आयकर विभाग को उपलब्ध कराई जानी है. दस लाख रुपए से अधिक के जमीन की खरीद पर पैन कार्ड के साथ फार्म-60 भी भरना जरूरी है. ऐसे में 2016 से बहुत से लोगों ने जमीनों की खरीद-फरोख्त से दूरी बनानी शुरू कर दी है. उन्हें लगता है कि वह इनकम टैक्स विभाग की नजर में आ जाएंगे.

कब कितना हुआ राजस्व का नुकसान

वर्ष राजस्व का लक्ष्य (करोड़) कुल आय लक्ष्य की प्राप्ति प्रतिशत में

2016-17 45940 31093 68

2017-18 50680 38637 76

2018-19 52060 42170 81

बड़ी एजेंसियां नहीं होतीं तो क्या होता?

आम आदमी द्वारा प्रॉपर्टी परचेज में पीछे हट जाने के बाद अब विभाग की नजर बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों पर है. हर साल दो से तीन बड़ी कंपनियां अपने प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदती हैं. यह कंपनियां करोड़ों में जमीनें खरीदकर बल्क में विभागीय घाटा कम कर देती हैं. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इससे स्टांप शुल्क का लक्ष्य भी पूरा होता है. इस वित्तीय वर्ष में भी कुछ मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा जमीन खरीदने की संभावना बन रही है.

मेजा और बारा ने बचाई लाज

घाटे के मौसम में बारा और मेजा ने प्रशासन के राजस्व वसूली की लाज बचा रखी है. पिछले तीन साल में इन तहसीलों में सर्वाधिक राजस्व आया है. इसका सीधा सा कारण पावर प्लांट हैं. इसकी वजह से आसपास के एरिया में तेजी से बसावट हो रही है और जमीनों के दाम और डिमांड दोनों बढ़ रही हैं. यहां की जमीनें भी बड़ी एजेंसियां ही खरीद रही हैं.

कब कितना अचीव किया लक्ष्य

वर्ष मेजा का एचीवमेंट बारा का एचीवमेंट प्रतिशत में

2016-17 74.34 76.12

2017-18 103 173

2018-19 95 92

बॉक्स..

टुकड़ों में खरीदते हैं जमीन

जमीन खरीद-फरोख्त में इनकम टैक्स विभाग के हस्तक्षेप के चलते लोग कई तरीकों से जमीनें खरीद रहे हैं. तीस लाख की लिमिट को देखते हुए वह 30 लाख की एक साथ प्रॉपर्टी खरीदने के बजाय उसे 10 लाख और 20 लाख के टुकड़ों में खरीद रहे हैं. ऐसा करके उनकी जमीन तो बढ़ जाती है लेकिन इनकम कम शो होती है. बावजूद इसके बहुत से लोगों तक इनकम टैक्स की नोटिस पहुंच जाती है.

कछार को बसाने पर आमादा प्रशासन

सौ फीसदी लक्ष्य की पूर्ति के दबाव के चलते प्रशासन अब कछार को बसाने की फिराक में है. पिछले साल कछार की जमीनों के दाम दस फीसदी तक घटाया जाना इसका जीता-जागता सुबूत है. बाकी सर्किल रेट जस के तस जारी कर दिए गए थे. इस साल भी अधिकतम पांच फीसदी बढ़ाए जाने की बात है और वह भी पॉश एरियाज की. कछार के सर्किल रेट पहले जैसे ही रहेंगे.

वर्जन..

धीरे धीरे लक्ष्य की प्राप्ति हो रही है. 2016 में रिसेशन की वजह से राजस्व में कमी आई थी. यह बात सही है कि नियमों के बदल जाने से उम्मीद के मुताबिक राजस्व की प्राप्ति नहीं हो पा रही है. लोगों के मन में थोड़ा सा डर है जो जल्द ही दूर हो जाएगा.

-पूर्णिमा मिश्रा, एआईजी स्टांप प्रयागराज