स्टेट गवर्नमेंट की महत्वाकांक्षी योजना को करारा झटका

अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लैपटॉप बेच रहे स्टूडेंट्स

क्चन्क्त्रश्वढ्ढरुरुङ्घ: स्टूडेंट्स को हाइटेक बनाने और उनके करियर की नया मुकाम दिलाने के लिए चीफ मिनिस्टर अखिलेश यादव ने अपने ड्रीम प्रोजक्ट के तहत प्रदेश में लाखों लैपटॉप बांटे थे. लेकिन चंद महीनों बाद ही सीएम का यह सपना ऑनलाइन नीलाम हो रहा है. अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए ये स्टूडेंट्स महज कुछ रुपयों के बदले इसे नीलाम कर रहे हैं.

ऑनलाइन के साथ बिचौलियों से सौदा

सिटी में ऑर्गनाइज भव्य समारोह में जब सीएम अखिलेश यादव ने अपने हाथों से स्टूडेंट्स को लैपटॉप बांटे थे, तब शायद उन्होंने ने भी सपने में भी नहीं सोचा होगा उनकी महत्वाकांक्षी योजना का ऐसा हाल होगा. आलम यह कि स्टूडेंट्स लैपटॉप बेचने के लिए हर जुगत आजमा रहे हैं. ऑनलाइन बोली लगाने के साथ ही डायरेक्ट अपने नजदीकियों को भी बेच रहे हैं. इसके साथ ही बिचौलिया का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कमीशन की लालच में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से सौदा पक्का करने में उनकी हेल्प कर रहे हैं.

छह हजार दो और लैपटॉप ले जाओ

एचपी कंपनी के लैपटॉप में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के कॉन्फिग्रेशन को काफी उम्दा और लेटेस्ट बताया गया था. 500 जीबी की हार्ड डिस्क, 2 जीबी की रैम, जो 4 जीबी तक एक्सटेंड हो सकती है, इंबिल्ट वेब व स्पीकर्स, डीवीडी ड्राइव व 3 यूएसबी पोर्ट, ब्लूटूथ फैसिलिटी, 3 घंटे की पॉवर बैकअप समेत कई खूबियां गिनाई गई. तब हर लैपटॉप की मार्केट वैल्यू 22 से 24 हजार रुपए बताई गई थी. अब यही उम्दा लैपटॉप महज 6 से 8,000 रुपए में बेचा जा रहा है. www.श्रद्य3.द्बठ्ठ पर ऐसे आधे दर्जन लैपटॉप नीलामी के लिए दर्ज हैं. कम्प्यूटर शॉप्स और अपने कॉन्टैेक्ट्स से भी इस लैपटॉप को बेचने की होड़ में हैं.

हाथों-हाथ बिक रहे हैं लैपटॉप

ऑनलाइन तो इसकी सेल हाथों-हाथ हो रही है. पोस्ट होते ही ग्राहक तैयार. ऑनलाइन सेलिंग वेबसाइट ओएलएक्स पर 21 फरवरी को लैपटॉप सेल करने के लिए एड पोस्ट किया गया. इसे एक दुकानदार ने स्टूडेंट से खरीदा था. मन भर गया तो उसने 8,500 रुपए की बोली लगा दी. लेकिन सरकारी लैपटॉप होने से उसे 8,000 रुपए में बेचना पड़ा. आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने जब उससे लैपटॉप खरीदने के लिए उसके मोबाइल नम्बर पर कॉटैक्ट किया तो उसने बताया कि 27 फरवरी को ही लैपटॉप बिक गया था.

22 हजार लैपटॉप बंटे

डिस्ट्रिक्ट में करीब 22 हजार स्टूडेंट्स को लैपटॉप बांटे गए थे. जो स्टूडेंट्स 2012 के इंटर बोर्ड एग्जाम्स के पासऑउट थे और डिस्ट्रिक्ट के किसी भी कॉलेज से रेगुलर फ‌र्स्ट ईयर कोर्स में इनरोल्ड थे उन्हें लैपटॉप बांटे गए. फ‌र्स्ट फेज में सीएम ने खुद ही लैपटॉप बांटे. 10 जून को आरयू के स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में ऑर्गनाइज भव्य समारोह में सीएम ने 8,973 स्टूडेंट्स को लैपटॉप बांटे थे. इस दिन 10 गवर्नमेट कॉलेजेज, 5 एडेड, 4 मदरसा समेत 19 अन्य कॉलेजेज के स्टूडेंट्स को समारोह में लैपटॉप बांटे थे. स्टूडेंट्स में 8,415 यूपी बोर्ड के, 405 सीबीएसई के, 45 आईएससी के और 108 मदरसा बोर्ड के स्टूडेंट्स शामिल रहे. इसके बाद बाकी कॉलेजेज में भी स्टूडेंट्स को लैपटॉप बांटे गए.

टेक्निकल रेस्ट्रिक्शंस का निकाला तोड़

लैपटॉप जिन स्टूडेंट्स को बांटे गए थे वे ही इसे यूज कर सकें इसके लिए गवर्नमेंट की मंशा के अनुसार कंपनी ने लैपटॉप में कई टेक्निकल रेस्ट्रिक्शंस लगाए थे. लैपटॉप ओपन करने के लिए हर स्टूडेंट को खास पासवर्ड दिया गया था. होम पेज स्टेट गवर्नमेंट की योजना को बखान करने वाला था. इसे जो भी चेंज करना चाहता तो लैपटॉप करप्ट हो जाता. वहीं कंपनी के पास हर लैपटॉप का सीरियल नंबर स्टूडेंटस् के नाम से रजिस्टर्ड है. ऐसे में बेचने के बाद सर्विस के लिए कंपनी के पास पहुंचा तो पकड़े जाने के पूरे चांसेज थे. लेकिन इन तमाम सिक्योरिटी मेजर्स को स्टूडेंट्स ने कम्प्यूटर के जानकारों ने धता बता दिया. वेबसाइट पर लैपटॉप बेचने वाले ऐसे ही जानकार ने आई नेक्स्ट को बताया कि जो ड्राइव पहले से था उसमें चेंज करना नामुमकिन है. लेकिन उसमें दूसरा विंडो अपलोड कर उसे अपने अनुसार चलाया जा सकता है. वहीं उसने यह भी बताया कि कंपनी सर्विस के दौरान इस बात की इंक्वॉयरी कम ही करती है कि लैपटॉप किसके नाम का है. उसने बताया यदि फिर भी सर्विस सेंटर पूछे तो इतना कह दिया जाता है कि लैपटॉप मेरे भाई या फिर मेरी सिस्टर को मिला था.