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PATNA : कोटा के बाद कोचिंग हब बने पटना में 19 जनवरी को जेईई मेन का रिजल्ट आने के बाद टॉपर की बोली लगनी शुरू हो गई है. नामी कोचिंग ने टॉपर्स का रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है. हाई पर्सेटाइल वालों को अपनी कोचिंग में लाने के लिए रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं. ऐसी कोचिंग के टारगेट पर 98 पर्सेटाइल तक स्टूडेंट है. परर्सेटाइल के हिसाब से रेट कार्ड भी तैयार हो चुका है. 99 पर्सेटाइल पाने वाले को 2 से 5 लाख रुपए और इंजीनियरिंग की पूरी पढ़ाई के खर्चे का ऑफर है. वहीं 98 पर्सेटाइल वाले को केवल इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्चा उठाने का ऑफर दिया जा रहा है. आलम यह है कि पटना में तो कई कोचिंग संचालकों ने गेट पर 'मेरा टॉपर बिकाऊ नहीं है' जैसे बोर्ड तक लगा दिए है.

बदलाव ने दिया मौका

जइेई मेन की परीक्षा में बड़ा बदलाव किया गया है. परीक्षा दो बार आयोजित की जा रही है. दोनों परीक्षा में से जिसमें सर्वाधिक अंक होंगे, उसी हिसाब से स्टूडेंट एडवांस की परीक्षा देगा. यानी जनवरी में जिसके 99 पर्सेटाइल आए है, अगर वह अप्रैल में 100 पर्सेटाइल पाता है तो एडवांस में उसे 100 पर्सेटाइल के हिसाब से एग्जाम देने को मिलेगा. जिस स्टूडेंट ने जनवरी की परीक्षा में अच्छे स्कोर किए है, उसका आईआईटी में होना तय है. कोचिंग वाले नाम चमकाने के लिए ऐसे स्टूडेंट को अपनी कोचिंग में ले आएंगे.

 

कहीं इसलिए तो सामने नहीं आ रहे सुपर-30

आनंद कुमार ने अभी तक सुपर 30 स्टूडेंट्स की लिस्ट जारी नहीं की है. उन्होंने दूसरी कोचिंग के स्टूडेंट्स को अपने सुपर 30 बताने का दावा किया था. जिसे दैनिक जागरण आई नेक्स्ट एक्सपोज कर चुका है. एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में आनंद कुमार ने कहा था कि हमारे स्टूडेंट्स को कोई खरीद न ले इसलिए हम सुपर 30 स्टूडेंट का नाम नहीं बता रहे हैं. ऐसे में सवाल यह है कि जब लिस्ट जारी कर दी जाएगी तो कोई स्टूडेंट्स को कैसे खरीदेगा.

 

बिकेंगे टॉपर, कोई जानेगा नहीं

पिछले साल तक की व्यवस्था में टॉपर की खरीद फरोख्त पकड़ में आ जाती थी. क्योंकि पहले जेइई मेंस का केवल एक एग्जाम होता था. रिजल्ट के 15-20 दिन के अंदर एडवांस का एग्जाम हो जाता था. ऐसे में टॉपर को खरीदने पर इस बात का हल्ला मच जाता था कि यह तो कहीं और से ही पढ़ा है. अब तो कोचिंग वालों के पास पूरे 3 महीने का समय मिल रहा है. वे सारे रिकॉर्ड मैंटेन कर लेंगे.


खरीद लिया गया टॉपर

सूत्रों की माने तो पटना की एक नामी कोचिंग ने बिहार में अच्छे नंबर लाने वाले को खरीदकर अपनी कोचिंग का हिस्सा बना लिया है. कोचिंग संचालक उसको ब्रांड अबेंसडर की तरह जगह-जगह पर पेश करना भी शुरू कर दिया गया है. फरवरी के महीने में ही कोचिंग में नए सेशन शुरू होते हैं. ऐसे में टॉपर की खरीददारी इस कोचिंग में स्टूडेंट की भीड़ लगाने वाली है.

 

गंदा है पर धंधा है यह

शहर की हर नामी कोचिंग का टर्नओवर 10-50 करोड़ रुपए का है. कोचिंग को नाम टॉपर्स से मिलता है. बड़ी-बड़ी कोचिंग में 2-5 हजार स्टूडेंट हर साल पढ़ाई करते हैं. अगर टॉपर का गणित गड़बड़ा रहा है तो नाम बचाने के लिए कोचिंग टॉपर को खरीदने का धंधा शुरू कर देती है.

 

कोई हमारे टॉपर को न खरीद पाए इसलिए अपने सुपर 30 की लिस्ट जारी कर दी है. जिन भी संस्थाओं को डर है कि उनके टॉपर खरीदे जा सकते हैं, उन्हें सुपर स्टूडेंट्स की लिस्ट जारी कर देनी चाहिए.

अभयानंद, कोचिंग संचालक अभयानंद सुपर 30

 

टॉपर की खरीद फरोख्त चल रही है. कोचिंग अपना नाम बढ़ाने के लिए जेइई मेन के टॉपर्स को खरीदने में लगे हुए हैं. जेईई मेन में बिहार का टॉपर समस्तीपुर नवोदय का स्टूडेंट है लेकिन उसे गया का बताकर भ्रम का माहौल तैयार किया जा रहा है. क्योंकि उस पर किसी न किसी कोचिंग की नजर है.

विद्यानंद, संचालक, गुरुकुल विश्वास