- चुनाव आचार संहिता के दौरान कैंट बोर्ड के रखी स्पेशल बोर्ड मीटिंग

- प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद पीसीबी को रद करनी पड़ी बैठक

- एजेंडे में लीज रेंट और किराया बढ़ाने का था अनुमोदन

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Meerut : क्म् मई तक देश भर में चुनाव आचार संहिता लागू है. कोई भी प्राधिकरण या विभाग किसी तरह की कोई घोषणा नहीं कर रहा है. न तो कोई ताजा डेवलपमेंट हो रहा है. न ही नए टैक्स का अनुमोदन किया जा रहा है. वहीं मेरठ कैंट बोर्ड ने डेवलपमेंट वर्क के स्पेशल ग्रांट और लीज रेंट और किराए में बढ़ोतरी के लिए स्पेशल बोर्ड मीटिंग का ही आयोजन कर डाला. जब प्रशासनिक अधिकारियों ने चुनाव आचार संहिता का हवाला दिया तो मीटिंग को रद कर दिया. वरना पब्लिक को बेवकूफ बनाने का पूरा ब्लू पि्रंट तैयार कर लिया गया था.

थे महत्वपूर्ण मुद्दे

इस मीटिंग में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लाया गया था, जो रेवेन्यू और डेवलपमेंट एवं लैंड ट्रांसफर से जुड़े हुए थे. इनमें से लीज रेंट में बढ़ोतरी, कैंट बोर्ड की दुकानों के रेंट में वृद्धि, कैंट फंड प्रोपर्टी के किराए में वृद्धि, दो बंगलों के ए वन से सी क्लास लैंड में ट्रांसफर, कैंट बोर्ड के सिविल में रिपेयारिंग और कंसट्रक्शन वर्क के लिए भ्0 करोड़ रुपए के स्पेशल ग्रांट की मांग के मुद्दे शामिल किए गए थे.

आचार संहिता का होता उल्लंघन

कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने एक बार भी इस बारे में नहीं सोचा कि इलेक्शन कोड ऑफ कंडक्ट लागू रहने के बाद किस तरह से रेवेन्यू और डेवलपमेंट से रिलेटेड मामलों के लिए बोर्ड मीटिंग रखी जा सकती है? कैंट एक्ट के जानकारों की मानें तो इस तरह मीटिंग नहीं रखी जा सकती. कैंट बोर्ड सेंट्रल गवर्नमेंट की अटॉनोमस बॉडी है. जो रक्षा मंत्रालयों के दिशा निर्देशों पर चलती है. जब लोकसभा के चुनाव हो तो मीटिंग का कोई तात्पर्य ही नहीं है. कोई ऐसी प्राकृतिक आपदा या इमरजेंसी भी नहीं है कि इन मुद्दों का निपटारा न होने से पब्लिक का अहित होगा.

ऑफिशियल स्टैंड

प्रशासनिक कारणों के कारण बोर्ड को स्थगित करना पड़ रहा है. वैसे पीसीबी भी नहीं आए हैं. उनके बिना बोर्ड मीटिंग करना संभव भी नहीं है.

- डॉ. डीएन यादव, सीईओ, कैंट बोर्ड

असंवैधानिक होता स्पेशल बोर्ड

कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष शिप्रा रस्तोगी, वार्ड-ब् की मेंबर शशि साहू और वार्ड-म् के मेंबर जगमोहन शाकाल ने इस मीटिंग को पूरी तरह से असंवैधानिक बताया. उन्होंने कैंट बोर्ड के सीईओ और एडीएम सिटी को इस बारे में ज्ञापन दिया. उन्होंने ज्ञापन में कहा कि तमाम मुद्दे स्पेशल बोर्ड के नहीं बल्कि जनरल बोर्ड के हैं. इन मुद्दों के रखने से पहले भी किसी मेंबर से डिस्कशन नहीं किया गया.