- कमिश्नर ने मामले को लिया संज्ञान, कार्रवाई को लेकर जिलाधिकारी को लिखा पत्र

-डीआईओएस का प्रकाशक को 24 घंटे में स्पष्टीकरण का अल्टीमेटम

-निजी प्रकाशक द्वारा यूपी सरकार के लोगो का प्रतियोगी पुस्तकों पर अवैध इस्तेमाल का प्रकरण उछला

-बाजार में उपलब्ध हैं सरकारी लोगो के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की बुक्स की सीरीज

-लोगो का इस्तेमाल कर कैंडीडेट को गुमराह करने का मामला स्पष्ट, प्रकाशक ने स्वीकारा हुई गलती

Meerut: मेरठ के एक बड़े प्रकाशक द्वारा सूबे के लाखों शिक्षित युवाओं को गुमराह करने के लिए बुक्स पर यूपी सरकार के लोगो के प्रयोग का मामला तूल पकड़ गया है. बुधवार को इस प्रकरण में कमिश्नर आलोक सिन्हा ने सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी पंकज यादव को जांच कर कार्यवाही के आदेश दिए हैं. वहीं डीआईओएस श्रवण कुमार यादव ने प्रकाशक से 24 घंटे में स्पष्टीकरण तलब किया है.

बाजार में मौजूद हैं बुक्स

मार्केट में कॉम्पटीशन की तैयारी कराने वाली सैकड़ों किताबें मौजूद हैं. अकेले लेखपाल भर्ती की तैयारी के लिए आधा दर्जन से ज्यादा पब्लिशर्स हैं. इनमें शामिल एक बड़े पब्लिशर्स ने की बुक्स पर यूपी उत्तर प्रदेश लेखपाल समान्य चयन परीक्षा की बुक्स पर यूपी सरकार का ऑफिशियल लोगो यूज करके कैंडिडेट्स को बेची जा रही है. बुक्स के फ्रंट पेज पर और बुक के अंदर फ‌र्स्ट पेज पर भी यूपी गवर्नमेंट का लोगो यूज किया जा रहा है. शॉपकीपर भी लोगो का फायदा उठाते हुए कैंडिडेट्स को यह बुक्स धड़ल्ले से बेच रहे हैं.

भर्ती को 'कैश' कर रहा प्रकाशक

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से लेखपाल की भर्ती के आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. इसबार 13 हजार 6 सौ रिक्तियां हैं. ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 22 जुलाई है. इस परीक्षा के लिए एक बड़े प्रकाशक ने विभिन्न तरह की बुक्स को अपनी मर्जी से यूपी सरकार का लोगो देकर एग्जाम के लिए सर्टिफाइड कर दिया है.

बुक्स की सीरीज बाजार में

-उत्तर प्रदेश लेखपाल प्रैक्टिस सेट्स

-उत्तर प्रदेश राजस्व लेखपाल सामान्य चयन परीक्षा प्रैक्टिस सेट्स बुक

-सक्सेस पैकेज उत्तर प्रदेश राजस्व लेखपाल

-उत्तर प्रदेश चकबंदी लेखपाल, उत्तर प्रदेश चकबंदी लेखपाल प्रैक्टि्स सेट्स

-उत्तर प्रदेश लेखपाल समान्य चयन परीक्षा साक्षात्कार

-उत्तर प्रदेश चकबंदी लेखपाल ग्रामीण क्षेत्र

-उत्तर प्रदेश चकबंदी लेखपाल ग्राम पंचायत अधिकारी साक्षात्कार बुक्स

55 से 150 रुपये कीमत

मार्केट में बड़े प्रकाशक की बुक्स 55 रुपए से लेकर 150 रुपए तक है.

कैंडिडेट्स खा रहे हैं धोखा

बुक्स पर सरकारी लोगो को देखकर कैंडिडेट्स भी इस धोखे में इस बुक को सरकारी सर्टिफाइड समझ रहे हैं. यहां प्रकाशक व शॉपकीपर्स दोनों ही मिलकर मोटी कमाई कर रहे हैं. प्रकाशक सरकारी लोगो से बुक को बेचने का और शापकीपर्स कैंडिडेट्स को लोगो दिखाकर सबसे बेहतर बुक बता रहे हैं. कैंडिडेट्स भी धोखे में आकर इन्हीं बुक्स को खरीदना बेहतर समझ रहे हैं. इस तरह से बुक्स में मोटी कमाई का खेल चल रहा है.

कमिश्नर ने दिए कार्रवाई के आदेश

सरकारी लोगो के दुरुपयोग के मामले को संज्ञान में लेते हुए कमिश्नर आलोक सिन्हा ने डीएम को तुरंत ही जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं. जल्द ही प्रकरण में बड़े प्रकाशक पर प्रशासनिक स्तर से सख्त कार्यवाही की बात कमिश्नर ने कही है. कमिश्नर ने प्रकाशक द्वारा जिन बुक्स पर सरकारी लोगो का अवैध इस्तेमाल किया है उन किताबों को भी साक्ष्य के तौर पर रख लिया है.

डीआईओएस ने मांगा स्पष्टीकरण

गंभीर प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए डीआईओएस श्रवण कुमार यादव ने इस मामले पर त्वरित कार्रवाई को अमल में लाया है. बुधवार को डीआईओएस ने प्रकाशक से सरकारी लोगो के प्रकाशन की अनुमति के संबंध में गुरुवार दोपहर तीन बजे तक स्पष्टीकरण तलब किया है और संपूर्ण पाठ्यक्रम का वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के रूप में प्रस्तुतिकरण मांगा है. जिन बुक्स पर प्रकाशक द्वारा यूपी गवर्नमेंट का लोगो छापा गया है, उस पर भी स्पष्टीकरण मांगा है.

प्रकाशक द्वारा बुक्स पर यूपी सरकार के ऑफीशियल लोगो के इस्तेमाल का मामला संज्ञान में आया है. मामले की जांच के लिए डीएम को निर्देश दे दिए गए हैं.

आलोक सिन्हा, कमिश्नर

संबंधित प्रकाशक को इस संबंध में नोटिस जारी कर दिया है. प्रकाशक से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है. जिसके लिए गुरुवार को तीन बजे तक का समय प्रकाशक को दिया गया है.

श्रवण कुमार यादव, डीआईओएस

दर्ज किया जा सकता है मुकदमा

एक निजी प्रकाशक द्वारा स्टेट के ऑफिशियल लोगो का इस्तेमाल करना एक अपराध की श्रेणी में आता है. कानून के मुताबिक ये मामला नेशनल एंब्लम एक्ट के तहत आता है. कोई भी प्रकाशक राष्ट्रीय और स्टेट के ऑफिशियल लोगो का इस्तेमाल नहीं कर सकता है. इसके तहत राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न के अपमान और दुरुपयोग के तहत मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है.

इस तरह का अपराध नेशनल एंब्लम एक्ट के तहत आता है. अगर किसी कंपनी ऐसा किया है तो ये अपराधिक मामला है. कानूनी दृष्टि से देखा जाए तो प्रदेश सरकार के प्रतीक चिह्न का अपमान या दुरुपयोग के अंतर्गत मुकदमा दर्ज हो सकता है.

- अनिल बख्शी, सीनियर एडवोकेट, हाईकोर्ट, इलाहाबाद