शहीद स्मारक पर शहरवासियों ने रखे विचार

धरोहरों को सहेजने के लिए युवाओं को आना होगा आगे

Meerut . शहर की ऐतिहासिक धरोहर को संजोने की दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की मुहिम में शहर के जागरुक और संभ्रांत लोगों का कारवां जुड़ना शुरु हो गया है. इस मुहिम के तहत मंगलवार को स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की यादों से जुडे़ शहीद स्मारक पर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट द्वारा पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया, जिसमें शहर की सामाजिक संस्थाओं से जुडे़ लोग शामिल हुए और शहीद स्मारक की वर्तमान स्थिति पर नाराजगी जताते हुए स्मारक को संजोने के सुझाव साझा किए और इस मुहिम को आगे बढ़ाने में सहयोग का भी आश्वासन दिया.

भ्रमण के साथ हुआ मंथन

आजादी की लड़ाई में शहीद हुए सेनानियों की याद में बनाया गया शहीद स्मारक ऐतिहासिक होने के बाद भी आज प्रशासन की अनदेखी के चलते बदहाल है. शहीद स्मारक की वर्तमान स्थिति से शहरवासी रूबरू हुए. साथ ही उन्होंने सुझाव के लिए मंथन किया गया. पैनल में मिशिका सेफ्टी क्लब के अध्यक्ष अमित नागर, कोर्डिनेटर मीनाक्षी जैन, अरुणोदय संस्था की अध्यक्ष अनुभूति चौहान, नैचरोपैथी चिकित्सक वैशाली वृंदा, चड्ढा पब्लिक स्कूल की प्राचार्य निधि मित्तल, एस के शर्मा, विनेश जैन शामिल हुए और अपने सुझाव साझा किए.

स्कूलों की विजिट हो अनिवार्य

अपनी ऐतिहासिक धरोहर से हमारी नई पीढ़ी अंजान है इसलिए जरुरी है कि हम युवाओं को अपनी इन धरोहरों से रुबरु कराएं. खासतौर पर स्कूली बच्चों के लिए इन स्मारकों की विजिट अनिवार्य रुप से कराई जाए. उनके स्कूल की क्लास की तरह यह विजिट अनिवार्य हो.

निधि मित्तल

अभाव में भूलाया जा रहा इतिहास-

मेरठ की क्रांति का प्रतीक आज केवल स्थापना तक सीमित रह गया है. शहर के लोग ही इन स्मारकों को भूलते जा रहे हैं. ना तो रखरखाव हो रहा है और ना ही नई पीढी को इन स्मारकों से रुबरु कराए जाने का प्रयास किया जा रहा है. इसलिए जरुरी है की स्कूलों की विजिट यहां कराई जाए, शहीदों की शहादत के बारे में नई पीढ़ी को रुबरु कराया जाए. उसके लिए जरुरी है कि प्रशासन इन स्थलों का रखरखाव करे.

विनेश जैन

इतिहास से अंजान है शहर

शहीद स्मारक पर स्वतंत्रा संग्राम के दौरान मारे गए 85 सैनिकों के नाम लिखे हुए हैं लेकिन यहां की दीवारों पर इसका पूरा इतिहास लिखा हुआ है. शहीद स्मारक में ओपन थियेटर तक बना हुआ लेकिन इसकी जानकारी शहर के लोगों तक को नही है. यदि इनका सही से प्रचार प्रसार किया जाए. स्कूलों की विजिट कराई जाए तो शहीद स्मारक सही मायनों में प्रसिद्ध होगा.

अमित नागर

मांगना नही है याद दिलाना है

सरकार को यह बताना जरुरी है कि हम आज आजाद भारत में अगर खुले आम बैठें तो इन्ही लोगों और इसी जगह की वजह से हैं. हमको प्रशासन से मांगना नही है बल्कि प्रशासन को आईना दिखाना है कि इन जगहों के रखरखाव के लिए प्रशासन कुछ नही कर रहा है प्रशासन के पास अपने स्मारकों के लिए ही बजट नही है.

अनुभूति चौहान

सुझाव के साथ तैयार हो प्रस्ताव

शहर के ऐतिहासिक धरोहरों को किन किन चीजों की जरुरत है पहले इस पर मंथन हों लोगों के सुझाव लिए जाएं फिर उन सुझावों के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर प्रशासन को भेजा जाए तब यह मुहिम रंग लाएगी. केवल बातों तक सीमित ना रहे ऐसी मुहिम इसका प्रयास होना चाहिए.

एसके शर्मा

प्रचार से संवरेगी धरोहर-

प्रशासन के स्तर पर हमारे शहर की धरोहर को प्रचार प्रसार की जरुरत है. प्रचार होगा तो नई पीढ़ी इन धरोहरों से रुबरु होगी और इतिहास को जानेगी.

मीनाक्षी जैन

सुरक्षा भी जरुरी

स्मारकों के रखरखाव के लिए जरुरी है कि स्मारकों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था हो. एंट्री के लिए टिकट की व्यवस्था हो ताकि स्मारक की सुरक्षा के साथ रखरखाव के लिए रेवन्यू भी प्राप्त हो. इससे स्मारक की मेंटिनेंस के साथ धरोहर सुरक्षित रहेगी.

वैशाली वृंदा

ये रहे सुझाव-

- इन धरोहरों की थीम पर एक ग्रुप या सोसाइटी का गठन किया जाए.

- समय-समय पर इन धरोहर के स्थल पर एक्टिीविटी, प्रतियोगिता या किसी प्रकार के आयोजन हों.

- मंगल पांडेय प्रतिमा के चारों ओर बेरिकेडिंग या बाउंड्री वॉल की जाए, ताकि प्रतिमा साफ रहे

- व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर लोगों को धरोहर की प्रति रखरखाव के लिए जागरुक किया जाए

- डिटेल्ड प्रोजेक्ट तैयार किया जाए कि शहीद स्मारक में क्या काम किए जाने की जरुरत हैं और संबंधित विभाग को वह प्रोजेक्ट भेजा जाए.