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RANCHI : प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत राजधानी में आवासों का निर्माण कराया जा रहा है. इसके लिए लाभुकों का सेलेक्शन कर उन्हें पैसे भी ट्रांसफर कर दिए गए. लेकिन काम कराने के नाम पर ठेकेदारों ने उनसे लाखों रुपए ठग लिये. इसका खुलासा तब हुआ जब पैसे लेने के बाद भी ठेकेदार आजतक काम कराने नहीं आया. अब पैसे गंवाने के बाद लाभुकों की नींद उड़ गई है. ऐसे में उन्होंने मेयर से इस मामले में कार्रवाई करने की गुहार लगाई है.

पूर्व पार्षद व सहयोगी पर आरोप

मेयर को लिखे पत्र में लाभुकों ने बताया कि पूर्व पार्षद सलाउद्दीन उर्फ संजू, उसके सहयोगी मुकेश और ठेकेदार नौशाद ने काम कराने के एवज में उनसे पैसे ले लिये. इसके आलावा भी काम कराने के नाम पर कुछ-कुछ पैसे लिये गए थे. लेकिन पैसे लेने के बाद आजतक घर का काम शुरू नहीं हो पाया. वहीं, पार्षद द्वारा काम कराने के नाम पर ढूलमुल रवैया अपनाया जा रहा है. जिससे कि लाभुकों को इस बात की चिंता सता रही है कि अपना घर कैसे बनाएंगे.

पहले भी ठगे जा चुके हैं लाभुक

वार्ड-10 में पिछले साल डिप्टी मेयर के बताये ठेकेदार को 1600 लाभुकों ने आवास बनाने के नाम पर 45-45 हजार रुपए दे दिए थे. इसके बाद वह ठेकेदार ही फरार हो गया. इसका खुलासा डीएमसी संजय कुमार के इंस्पेक्शन में हुआ था जब वह पीएम आवास के काम की प्रगति व जांच के सिलसिले में चूना भट्ठा पहुंचे थे. लाभुकों ने बताया था कि जिस ठेकेदार को काम मिला उसने पहले फेज का पैसा लेने के बाद भी आवास निर्माण का काम शुरू नहीं कराया.

पहले लगाना है पैसा, फिर मिलती है राशि

आवास योजना के तहत लाभुकों का चार इंस्टालमेंट में राशि का भुगतान किया जाता है. जिसके तहत फ‌र्स्ट फेज के काम के बाद 45 हजार, सेकेंड में 67,500, थ़र्ड में 45 और फोर्थ में 67,500 रुपए भेजे जाते है. ऐसे में काम कराने के लिए लोगों को खुद से पैसे खर्च करने थे. लेकिन ठेकेदार को पैसे देने के बाद उनके पास काम कराने के लिए पैसे ही नहीं बचे.

केस-1

1.75 लाख रुपए लिया पर काम शुरू भी नहीं किया

डंगरा टोली में रहने वाली शाहिदा खातून का कहना है कि आवास बनाने के लिए ठेकेदार को एक लाख 75 हजार रुपए दिए. लेकिन पैसे लेने के बावजूद ठेकेदार ने घर का निर्माण काम ही शुरू नहीं कराया. अब पार्षद से पूछने पर बस टाल-मटोल का रवैया अपनाए हुए है.


केस 2

1.57 लाख रुपए लिया पर नहीं आया काम करने

वार्ड 16 में रहने वाले सोनू एक्का का सेलेक्शन पीएमएवाई के लिए किया गया था. उन्होंने आवास के लिए ठेकेदार को एक लाख 57 हजार 500 रुपए दे दिए. जब कई दिनों तक ठेकेदार काम करने नहीं आया तो पार्षद को कंप्लेन की. लेकिन उससे भी कोई फायदा नहीं हुआ.