-कोरोना संक्रमण के कारण बद्रीनाथ यात्रा पर नहीं पहुंच पा रहे यात्री

-हिमालय पर्वतों से घिरा माणा गांव की वादियों में छाई है सुनसानी

देहरादून, भारत के आखिरी गांव माणा पर भी मानो कोरोना की साया पड़ गई हो। मई-जून में हमेशा पैक रहने वाले इस गांव में आजकल केवल चंद ग्रामीण ही नजर आ रहे हैं। हर तरफ सुनसान वादियों के बीच ऐतिहास में ऐसा पहला मौका होगा, जब पहली बार ऐसी सुनसानी छाई हुई है। व‌र्ल्डफेम बद्रीनाथधाम यात्रा के दौरान यहां देश-विदेश के यात्रियों की चहलकदमी हुआ करती थी। लेकिन वर्तमान में न कहीं दूर तक यहां यात्री दिख रहे हैं, न गांव का मार्केट और न खरीदारी। बस गांव के लोग इंतजार में हैं कि आखिर कब कोरोनाकाल से निजात मिले और कब गांव में रौनक लौटे।

4 करोड़ का कारोबार प्रभावित

चमोली जिले में स्थित है उत्तराखंड के चारधामों में से एक बद्रीनाथ धाम। बद्रीनाथ धाम से महज तीन किमी दूर पर स्थित है खूबसूरत भारत का आखिरी गांव माणा। गत वर्षो में यही वह वक्त हुआ करता था, जब विश्वभर के यात्रियों की आवाजाही से हर तरफ ये गांव गुलजार हुआ करता। गांव में छोटा-सा मार्केट, भारत की आखिरी चाय की दुकान व व्यास गुफा, गणेश गुफा व भीम पुल इसी गांव की पहचान है। लेकिन कोरोना के कारण आजकल इस गांव की खूबसूरत वादियों में हर तरफ खामोशी छाई हुई है। 100 फैमिलीज के इस गांव के लोग चारधाम शुरु होते ही अपने कारोबार पर जुट जाते थे। कड़ाके की ठंड होने के कारण बद्रीनाथ धाम आने वाले यात्री ऊन के हैंडमेड प्रोडक्ट्स की खूब खरीदारी करते थे। ग्रामिणों के मुताबिक यात्रा सीजन में 3-4 करोड़ रुपए तक का कारोबार हो जाता था। ग्रामीण अपने प्रोडक्ट्स को छह माह में तैयार करते थे। इसके लिए 70-80 दुकानें सजा करती थीं।

::ऊन के प्रोडक्ट्स::

-गरम मौजे

-टोपियां

-मफलर

-दरियां

-मैट

::इन फसल की बुआई::

-आलू

-मटर।

-बींस।

-राजमा।

-ग्रीन वैज पालक व राई।

-मेथी।

-मूली।

प्वाइंटर्स::

-समुद्र तल से 3118 मीटर ऊंचाई पर स्थित।

-इंडियन तिब्बत सीमा से सटा आखिरी गांव।

-अपनी खास परंपराओं के लिए रखता है पहचान।

-गांव के आस-पास कई दर्शनीय स्थल।

-जिसमें व्यास गुफा, गणेश गुफा, भीम पुल व वसुधारा शामिल।

-माणा विलेज में पड़ती है कड़ाके की ठंड।

-एक मात्र जीआईसी छह-छह माह को होता है शिफ्ट।

-फसल की पैदावार को होती है खेतों की जुताई।

-भेड़, बकरियों का भी होता है पालन।

-छह माह बर्फ रहने के कारण अप्रैल-मई में पिघलती है बर्फ।

-यहां जड़ी-बूटियों में बालछड़ी है प्रमुख।

-चाय यहां के लोगों का है प्रमुख पेय।

-माणा गांव में भारत-तिब्बत सीमा बल का बेस भी हुआ करता है।

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वर्जन::

ऐसी आपदा वर्ष 2013 में भी नहीं देखी गई। गांव में कारोबार चौपट है। सीजन फसल तक को सेल आउट करने की दिक्कतें आएंगी। इंतजार है कि कोरोना की जंग पा सके और गांव में फिर से रौनक लौट आए।

-पीतांबर मालपा, ग्राम प्रधान, माणा गांव।

Posted By: Inextlive

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