लखनऊ (ब्यूरो)। यह गिरोह देश भर में जाली करेंसी की सप्लाई करता था। उनके कब्जे से 35 हजार रुपये की जाली करेंसी और इसे बनाने वाले तमाम उपकरण भी बरामद किए गये है। वे करीब डेढ़ वर्ष से लैपटॉप तथा कलर प्रिंटर की सहायता से नकली नोट बनाने के कारोबार कर रहे थे और ज्यादातर 100 के पुराने नोट की तैयार करते थे। गिरफ्तार किए गये पांचों जालसाज शिवम तोमर, ओमकार झा, अवधेश सविता, सुनील सिसौदिया और लाखन आगरा के रहने वाले हैं। वे पांच हजार रुपये की असली करेंसी के बदले दस हजार रुपये की जाली करेंसी देते थे।

यूज करते थे स्टांप का थ्रेड

आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि एसटीएफ को सूचना मिली कि आगरा में जाली करेंसी तैयार करके सप्लाई करने वाला गिरोह सक्रिय है। आगरा के थाना सदर बाजार में शहीद नगर, एकता पार्क के सामने एक मकान से नकली नोटों का कारोबार करने वाले गैंग के सदस्य, नकली नोटों तथा उनको बनाने के उपकरणों को साथ लेकर कही जाने की फिराक मे हैं। सूचना पर एसटीएफ ने छापेमारी कर वहां मौजूद पांच युवकों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में ओमकार झा तथा अवधेश सविता ने बताया कि हम लोगों ने 100 के नोट की एक असली गड्डी जिसकी सीरीज 051 से प्रारम्भ होती है।

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नोट परखने का सटीक आधार

उसको फोटोशॉप के माध्यम से स्कैन करके एक डाटा तैयार कर लिया था, जिससे जाली करेंसी तैयार करते थे। 10 रुपये का स्टांप खरीदकर उसकी तीन जगह से कटिंग करते थे। कटिंग करते समय 'सिल्वर थ्रेड' जो किसी भी नोट को परखने का सबसे सटीक आधार होता है, को तैयार किये गये मेटेरियल के बीच में सफाई से चिपका देते थे, जिससे नोट असली प्रतीत होता था। एक गड्डी तैयार करने मे लागत लगभग 900 रूपये आती थी तथा एक नोट करीब 4-5 मिनट में तैयार होता था।

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Posted By: Shweta Mishra

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