- गोरखपुर महोत्सव में परफॉर्मेस देने पहुंचे मोहित चौहान ने बेबाकी से रखी अपनी बातें

- सभी गानों के री-मिक्सेज को बताया गलत

- वहीं यंगस्टर्स को नकल से दूर रहने की दी सलाह

syedsaim.rauf@inext.co.in
GORAKHPUR: म्यूजिकल रियैलिटीज शो इन दिनों टेलीविजन के कार्यक्रम हो गए हैं. यह डेली सोप जैसे हैं, जो सिर्फ टीआरपी गेन करने के लिए कराए जा रहे हैं. इसमें टैलेंट को कोई मुकाम नहीं मिल रहा है, बल्कि यह भीड़ में ही कहीं खो जा रहे हैं. इसमें ओरिजनल म्यूजिक को एनकरेज करने के लिए कुछ भी नहीं किया जाता. यह बातें बॉलीवुड के रॉक स्टार सिंगर मोहित चौहान ने दैनिक जागरण आई नेक्स्ट से बातचीत के दौरान कही. उन्होंने कहा कि इन मंचों पर ओरिजनल म्यूजिक को प्रोत्साहन देने की जरूरत है.

डुप्लिकेसी ने दिया है धक्का
मोहित ने दर्द बयां करते हुए बताया कि अब इतनी पाइरेसी हो गई है कि फिल्मी म्यूजिक को छोड़कर म्यूजिक कंपनी कोई दूसरे सांग को सपोर्ट ही नहीं करती. वहीं, एल्बम में भी पाइरेसी होने की वजह से न्यू कमर्स को बिल्कुल भी सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है. पहले म्यूजिक लांच होता था, तो वह सीडी में बिकता था, इससे म्यूजिक कंपनीज को अर्निग होती थी, लेकिन अब पाइरेसी इतनी ज्यादा हो गई है कि सभी म्यूजिक इंटरनेट पर फ्री ऑफ कॉस्ट कॉपी-पेस्ट कर रिलीज हो जा रहे हैं. इसलिए अब कोई भी नॉन फिल्म म्यूजिक में इनवेस्ट करने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है.

20 साल से ओरिजनल सुनाने की कोशिश
मोहित ने कहा कि मेरा पहला एल्बम बूंदे, सिल्क रूट बैंड के तले बना. इसके बाद से मैं इसी कोशिश में रहता हूं कि अपने लिस्नर्स को हमेशा कुछ नया दूं, जिससे कि उनका भरोसा मुझ पर बना रहे. उन्होंने बताया कि 1998 में पहला एल्बम लांच हुआ था और आज 20 साल का अरसा गुजरने के बाद भी मैं ओरिजनल ही देने की कोशिश में लगा हूं. मोहित ने कहा कि यंगस्टर्स भी ओरिजनल काम पर ध्यान दें, उन्हें कामयाबी जरूर मिलेगी.

सभी गानों के री-मिक्स नहीं अच्छे
री-मिक्स गानों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में मोहित चौहान ने कहा कि बहुत सारे गाने ऐसे हैं, जो सिर्फ ओरिजनल ही अच्छे लगते हैं. इनके री-मिक्स बिल्कुल नहीं बनने चाहिए. ऐसा इसलिए कि इन गानों की लेरिक्स में जो मिठास है, वह री-मिक्स की वजह से खत्म हो जाती है. रैप के बारे में किए गए सवाल के जवाब में उसने कहा कि रैप से संगीत खत्म हो जाता है. यह विदेशी कॉन्सेप्ट है. इसके लिस्नर्स अलग हैं, जो इसे काफी पसंद करते हैं.

कामयाबी के लिए होनी चाहिए 'धुन'
मोहित चौहान ने कहा कि हर फील्ड में कामयाबी मिल जाए, यह जरूरी नहीं है. संगीत हो या फिर कला, सभी के लिए व्यक्ति में धुन होनी चाहिए. मां-बाप को इस बात की चिंता होती है कि उसका लाडला या लाडली, जिस राह पर चल पड़ा है, उसमें कामयाबी मिलेगी या नहीं. उनका यह चिंता लाजमी है, लेकिन अगर किसी काम को धुन में मगन होकर दिल से किया जाए, तो उसमें कामयाबी जरूर मिलती है.

डिजिटाइजेशन समय की जरूरत
म्यूजिक में लगातार चेंज आ रहे हैं. पहले कंप्यूटर नहीं था, जिसकी वजह से एक म्यूजिक बनाने में 100 से ज्यादा लोग लगते थे, सभी साथ मिलकर म्यूजिक बनाते थे, जो सुनने में भी काफी अच्छा लगता है. आज जमाना डिजिटाइज हो गया है, कंप्यूटर से म्यूजिक बन रहे हैं. एक आदमी ही बैठकर म्यूजिक बना ले रहा है. मगर पहले म्यूजिक में जो रीचनेस थी, वह अब बहुत कम नजर आती है. मगर डिजिटाइजेशन समय की जरूरत है और यह पॉजिटिव चेंज हैं, इसलिए इसे एक्सेप्ट भी किया जाना चाहिए.

सिक्किम में देश के नाम कॉन्सर्ट
मोहित ने बताया कि देश के लिए कुछ कर उन्हें काफी अच्छा लगता है. इसलिए उन्होंने सिक्किम में एक हफ्ते तक रहकर कॉन्सर्ट किया और इसका किसी से एक पैसा भी नहीं लिया. उन्होंने कहा कि इसमें एसएसबी के बैंड के साथ आर्मी पर्सनल्स ने जमकर साथ भी निभाया और 15 दिनों के दौरान वहां देश के जवानों के साथ काफी मस्ती भी हुई. इसकी सारी देख-रेख उनकी पत्‌नी प्रार्थना ने देखी. इस टूर के दौरान आर्मी पर्सनल्स ने बताया कि बॉलीवुड के कलाकारों में अब तक सिर्फ सुनील दत्त या नरगिस ही जवानों के बीच पहुंचते थे, लेकिन मोहित ऐसे पहले सिंगर हैं, जिन्होंने देश के नाम जिंदगी लुटाने वाले लोगों को भी तवज्जो दी है.