अब पुलिस के लिए गले की फांस बनती जा रही
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RANCHI: बंदियों के लिए पुलिस हाजत कब्रगाह बनती जा रही है. रांची व आसपास के क्षेत्रों में पुलिस व बैरक में कई लोगों ने जान दे दी है, जो अब पुलिस के लिए गले की फांस बनती जा रही है. पुलिस अधिकारी भी हैरान हैं कि आखिर इसका क्या उपाय किया जाए. हालांकि, पुलिस ने निर्देश जारी किया है कि घरेलू विवाद में हुई मारपीट में यदि आरोपी को पकड़ा जाता है, तो उन्हें थाने के सिरिस्ता में बैठा कर रखें, लेकिन कुछ पुलिसकर्मी भयादोहन के लिए उसे हाजत में डाल देते हैं. ऐसे में हाजत में बंद व्यक्ति को गिल्टी फील होती है और वे अपनी जान तक दे डालते हैं.

पहले भी होती रही हैं हाजत में मौत
12 मई, 2017 : लालपुर थाना हाजत में 27 वर्षीय विकास लकड़ा नामक युवक ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. वह लालपुर थाना क्षेत्र के ही धोबी घाट मोहल्ले का रहने वाला था. पुलिस उसे व‌र्द्धवान कंपाउंड के बालाजी अपार्टमेंट में चोरी मामले में पकड़कर थाने लाई थी.

स्टेटस: दोनों जांच अधिकारियों का स्थानांतरण कर दिया गया.

प्रेमी युगल ने दी थी जहर खाकर जान
16 मार्च, 2016: अरगोड़ा थाना की हाजत में गोड्डा के भांजपुर के प्रेमी युगल ने जहर खाकर जान दे दी थी. दोनों चोरी-छुपे रांची के हरमू की टुंगरी टोली में किराए के मकान में रह रहे थे. महगामा पुलिस ने पकड़ा था. रात होने की वजह से दोनों को अरगोड़ा थाने में लाकर रखा गया था. सुबह गोडडा ले जाने की तैयारी थी, पर देर रात ही दोनों ने अपनी इहलीला समाप्त कर ली.

स्टेटस: मामले में नो एफआरटी क्लू लिखकर केस बंद कर दिया गया है.

पिठोरिया थाना के ड्राइवर ने लगाई थी फांसी
वर्ष 2017 में पिठोरिया थाने के ड्राइवर राम भज्जु गुप्ता ने थाना बैरक में फांसी लगाकर जान दे दी थी. पुलिस ने जांच में पाया कि राम भज्जु गुप्ता फैमिली मेंबर से परेशान था, जिसे सॉल्व नहीं कर पा रहा था. वहीं, छुट्टी भी नहीं मिल रही थी. ऐसे में उसने फांसी लगाकर जान दे दी.

स्टेटस: पारिवारिक विवाद में आत्महत्या की बात कह केस बंद कर दिया गया.