अपने ढाबे के खाने की तरह अमित शर्मा की कहानी भी जायकेदार है। उद्योग नगरी कानपुर में पैदा हुए अमित शर्मा ने अपना रेस्त्रां खोला लखनऊ में और वो भी पंजाबी। अमित को बचपन से ही खाना बनाने का शौक था, लेकिन कुछ परिस्थितियों के चलते वह इस फील्ड में अपना करियर नहीं बना पाए। वर्ष 1996 में उन्होंने अपना एक बिजनेस शुरू किया। जो 2000 तक चला उसके बाद उन्होंने 2001 में एयरटेल कंपनी में जॉब शुरू की। इसी दौरान उनको 2015 में कंपनी के स्टाफ के लिए कैटरिंग करने का काम मिला, जिससे उनके बचपन के सपने को एक उम्मीद की किरण दिख गई। 2018 तक उन्होंने कंपनी में काम किया, इसके बाद उन्होंने गोमतीनगर के विभूति खंड में रेस्त्रां पंजाबी ढाबा ओपन कर दिया।

एक घटना ने हिलाया तो शुरू किया भंडारा

पंजाबी ढाबा के ओनर अमित शर्मा के लिए सेवा भाव ही धर्म है। अमित की जिंदगी का नजरिया एक घटना ने बदल दिया। एक बार वह रेस्त्रां बंद करके बाहर सीढिय़ों पर बैठे थे। उस वक्त एक बुजुर्ग औरत आई जो ठीक ठाक फैमिली से थी। उसने खाने का ऑर्डर किया जिस पर उन्होंने कहा कि रेस्त्रां तो बंद हो गया है देखता हूं अगर कुछ होगा तो मिल जाएगा। फिर महिला ने एक प्लेट खाया और दूसरा पैक कराने के बाद बोली मेरे पास पैसे नहीं हैं मेरे पति हॉस्पिटल में एडमिट हैं। बेटा और बहू एडमिट करा के चले गये तबसे आये नहीं हैं। दवा के कुछ ही पैसे हैं अगर खाने का दे दूंगी तो उनकी दवा नहीं ले पाऊंगी। जिस पर अमित को यकीन नहीं हुआ। उन्होंने अपने एक वेटर को उसके साथ भेजा जब वह लौट के आया तो उसने बताया कि महिला सही बोल रही थी। उस घटना ने अमित को अंदर तक झकझोर कर रख दिया। उस दिन के बाद उन्होंने निर्णय लिया कि हफ्ते में एक दिन भंडारे का आयोजन करेंगे। उस दिन से आज तक वह हर गुरुवार एक हजार लोगों का भंडारा करते हैं। एक भंडारे में करीब बीस हजार रुपये का खर्च आता है।

खुद ही बनाते हैं खाना
अक्सर रेस्त्रां में काम करने वाले लोग खाना बनाते हैं, लेकिन पंजाबी ढाबा सबसे अलग है। यहां पर लिमिटेड व्यंजन है, जिसको खुद अमित और उनकी बेटी बनाती है। रेस्त्रां भले ही दोपहर 2 बजे के बाद खुले, लेकिन उसकी तैयारी सुबह 7 बजे से ही शुरू हो जाती है। घर से बनाकर ही आइटम रेस्त्रां में लाते हैं। उसके बाद अक्सर शाम को जब डिमांड ज्यादा होती है तो यहीं किचन में अमित खुद कमान संभालते हैं।
अमित शर्मा : लखनवी तहजीब में पंजाबी तड़का
ठहरते हैं फाइव स्टार में खाना खाते हैं पंजाबी में
अमित के बनाए हाथों का खाना हर वर्ग के लोगों की पहली पसंद है। शुद्ध शाकाहारी व घर जैसा स्वाद यहां पर हर किसी को आने को मजबूर कर देता है। आस पास स्थित फाइव स्टार होटलों में स्टे करने वाले लोग वहां ठहरते तो हैं, लेकिन खाना पंजाबी ढाबा में ही खाते हैं। सिर्फ कस्टमर ही नहीं इन पांच सितारा होटल का स्टाफ भी खाना खाने आता है। अमित शर्मा ने एक साल के अंदर ही अपने स्वाद व शुद्धता से एक अलग मुकाम बना लिया है।

कस्टमर से पैसा नहीं मांगते
पंजाबी ढाबा अनोखा रेस्त्रां है जहां पर आपसे पैसा नहीं मांगा जाता है। अमित शर्मा कस्टमर को बिल जरूर देते हैं, लेकिन रेस्त्रां में रखी तीन दान पेटी में पैसा डालने को कहते हैं। अगर किसी का बिल 500 रुपये का बनता है और 200 रुपये ही पेमेंट करता है तो भी वह उससे कुछ नहीं कहते है। उनका मानना है कि इंसान अपनी पंसद के हिसाब से पेमेंट करता है। उसको मेरा खाना जैसा लगा उसने उस हिसाब से पेमेंट किया इसलिए वह किसी को पूरा पैसा देने की बात नहीं कहते हैं।

परिवार ने दिया हर कदम पर साथ
सफलता के शिखर पर पहुंचने में अपनों का बहुत योगदान होता है। अमित के साथ उनके परिवार ने हर कदम पर साथ दिया। चाहे वह नौकरी छोडक़र रेस्त्रां ओपन करने का डिसीजन हो या फिर सेवाभाव करने के उद्देश्य से हर हफ्ते भंडारे का आयोजन हो। उनकी पूरी फैमिली ने हर फैसले में साथ दिया। उनकी पत्नी खुशबू ने जहां उनको ताकत दी तो वहीं बड़ी बेटी ने उनके बिजनेस में हाथ बंटाया। आज उनकी गैर मौजूदगी में उनकी बेटी पूरा रेस्त्रां संभालती है। साथ ही जब वह होते हैं तो भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर काम करती है। प्रारंभिक शिक्षा वीरेंद्र स्वरूप स्कूल कानुपर से हासिल की।

डीबीएस डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन किया
1996 में अपना बिजनेस स्टार्ट किया। 2001 में एयरटेल कंपनी ज्वाइन की, जिसमें 2018 तक जॉब की। 2018 में गोमतीनगर के विभूति खंड में पंजाबी ढाबा रेस्त्रां ओपन किया।

आस्था और सिद्धांत जरूरी
अमित शर्मा का कहना है कि लाइफ में आस्था और सिद्धांत का होना बहुत जरूरी है। पिता ओडी शर्मा ने उन्हें एक सीख दी थी कि दूसरों को धोखा देने से अच्छा है खुद धोखा खा लो। उनके पिता की यह बात अमित के दिल में घर कर गई और इसे ही उन्होंने सिद्धांत बना लिया। उनका मानना है कि विश्वास और आस्था एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। मेरा विश्वास रहता है कि सब साईं बाबा सही करेंगे और कई बार अमित को इस अटूट विश्वास का फल भी मिला है।

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