-डॉक्टर नहीं रखते मानकों का ध्यान

-प्राइवेट ही नहीं सरकारी डॉक्टर भी उड़ा रहे नियमों की धज्जियां

sunil.yadav@inext.co.in

LUCKNOW:राजधानी में डॉक्टर्स सिजेरियन डिलीवरी कराने के लिए व‌र्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं. प्राइवेट अस्पतालों में अपने थोड़े लाभ के लिए डॉक्टर 80 परसेंट तक सिजेरियन डिलीवरी कर रहे हैं तो सरकारी डॉक्टर भी कम नहीं हैं. राजधानी के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों से स्वास्थ्य विभाग को मिल रही रिपो‌र्ट्स से इस भयावाह सच का खुलासा हो रहा है.

मानका 10 से 15 फीसद का

डब्ल्यूएचओ ने अस्पतालों में होने वाली सिजेरियन डिलीवरी के लिए मानक तय कर रखा है. जिसके अनुसार किसी भी अस्पताल में 10 से 15 फीसद मरीजों की ही सिजेरियन डिलीवरी की जा सकती है. शेष को सामान्य डिलीवरी कराई जाती है. लेकिन डब्ल्यूएचओ के इस मानक का सरकारी अस्पतालों से लेकर प्राइवेट के बड़े बड़े संस्थान उल्लंघन कर घोटाला कर रहे हैं. भोलेभाले मरीजों को डराकर डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी कराकर अपनी जेबे भर रहे हैं.

प्रीमेच्योर डिलीवरी करा रहे अस्पताल

केजीएमयू के बाल रोग विभाग के सूत्रों के मुताबिक प्रीमेच्योर डिलीवरी के ज्यादातर केसेज प्राइवेट अस्पतालों से आते है. जबकि नॉर्मल और सिजेरियन मिलाकर सबसे ज्यादा डिलीवरी सरकारी अस्पतालों में होती है. केजीएमयू ने बाराबंकी के एक निजी चिकित्सालय से आने वाले सबसे ज्यादा प्रीमेच्योर बच्चों के मामले की शिकायत भी की थी. जिसमें डॉक्टर अपने लाभ के लिए समय से पूर्व सिजेरियन डिलीवरी करा रही थी.

स्वास्थ्य विभाग को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक आलमबाग के एक बड़े निजी चिकित्सालय में लगभग 85 प्रतिशत केसेज में सिजेरियन डिलीवरी की जा रही है. अस्पताल ने अप्रैल से लेकर दिसंबर तक की रिपोर्ट यही बताए रही है. जिन अस्पतालों की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को मिल रही है उनमें से ज्यादातर में सिजेरियन के आंकड़े 60 से 90 फीसदी तक के हैं. यही नहीं ज्यादातर अस्पताल ऐसे हैं जो स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट ही नहीं भेजते हैं. लेकिन स्वास्थ्य विभाग मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर सका है.

क्वीन मेरी भी कम नहीं

केजीएमयू का क्वीन मेरी हॉस्पिटल भी इस मामले में कम नहीं है. हॉस्पिटल में 22 फरवरी को 21 डिलीवरी में से 15 सिजेरियन कराई गई जबकि 21 फरवरी को 18 में से 14 डिलीवरी सिजेरियन थी. केजीएमयू सूत्रों के मुताबिक कुछ नई फैकल्टी मेंबर सीखने और जल्दी काम खत्म करने के चक्कर में लगातार सिजेरियन डिलीवरी को बढ़ावा दे रही है. इसकी भनक अस्पताल की सीनियर फैकल्टी मेंबर्स को भी हैं लेकिन उन पर रोक नहीं लगा पा रही हैं.

होता है सिजेरियन आडिट

क्वीन मेरी अस्पताल में डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट प्रो. एसपी जैसवार का कहना है कि यहां पर एवरेज 45 से 50 परसेंट केसेज में सिजेरियन डिलीवरी कराई जाती है. क्योंकि यह यह रेफरल सेंटर है और अधिकतर मरीज हालत बिगड़ने पर दूसरे अस्पतालों से रेफर किए जाते हैं. डॉ. एसपी जैसवार ने बताया कि अस्पताल में किसी भी मरीज की बिना जरूरत सिजेरियन डिलीवरी नहीं कराई जाती. इससे बचाव के लिए हर एक जिजेरियन डिलीवरी का ऑडिट होता है. बिना कारण सिजेरियन कराना संभव नहीं है.

क्वीन मेरी अस्पताल

डेट--कुल डिलीवरी-सिजेरियन

22 फरवरी-21--15

21 फरवरी-18-14

20 फरवरी- 20-16

19 फरवरी-21-13

18 फरवरी-21-11

17 फरवरी-24-15

16फरवरी-21-9

15 फरवरी- 26-14

14 फरवरी- 17-12

13 फरवरी-21-19

12 फरवरी- 23-9

11 फरवरी- 17-8

10 फरवरी - 18-9

9 फरवरी- 20-12

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सरकारी अस्पतालों के आंकड़े चौकाने वाले

स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले सरकारी अस्पताल भी कम नहीं है. डॉक्टर अपनी सुविधा के लिए मरीजों का पेट फाड़ने से पहले जरा भी नहीं सोचते. बाल महिला चिकित्सालय (बीएमसी) रेडक्रास में अप्रैल 2016 से जनवरी 2017 के बीच 180 डिलीवरी कराई गई जिनमें 105 सिजेरियन थी. ऐसे ही बीएमसी एनके रोड में 400 में से 208 सिजेरियन और ऐशबाग में 619 में से 291 डिलीवरी सिजेरियन कराई गई. इससे साफ है कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टर भी बिना जरूरत मरीज की सिजेरियन डिलीवरी कराने में जरा भी नहीं हिचकिचाते.

अप्रैल 16 से जनवरी 2017 तक

अस्पताल-- कुल डिलीवरी- सिजेरियन

बीएमसी एनके रोड-- 400--208

बीएमसी ऐशबाग-619-291

बीएमसी रेडक्रास-180-105

बीएमसी टुडि़यागंज-320--78

बीएमसी सिल्वर जुबली-458-142

बीएमसी इंदिरा नगर- 573--121

बीएमसी आलमबाग- 511-122

आरएलबी-1169-393

लोकबंधु-2283-527

प्राइवेट में सिजेरियन मुनाफे का सौदा

सिजेरियन डिलीवरी कराने का सबसे बड़ा खेल प्राइवेट चिकित्सालयों में चलता है. सूत्रों के मुताबिक एक सिजेरियन में 35 से 80 हजार रूपए का खर्च आता है. जबकि सामान्य में 10 से 15 हजार ही अस्पताल को मिलते है. सिजेरियन डिलीवरी कराना डॉक्टर के समय पर निर्भर है जबकि सामान्य में डॉक्टर को इंतजार करना पड़ता है. यह हाल तब है जबकि सिजेरियन डिलीवरी में बच्चे से लेकर मां तक को खतरा रहता है. लेकिन प्राइवेट डॉक्टर फैमिली मेंबर्स को कोई न कोई समस्या बताकर सिजेरियन के लिए राजी कर ही लेते हैं.

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केंद्रीय मंत्री ने लिखा था पत्र

बुधवार को निजी अस्पतालों में बढ़ रहे सिजेरियन प्रसव के खिलाफ केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने एक आनलाइन याचिका पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर सरकारी और निजी अस्पतालों के सिजेरियन प्रसव का आंकड़ा सार्वजनिक करने को कहा था. उन्होंने कहा था कि अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव एक घोटाले का रूप लेती जा रही है. सिजेरियन डिलेवरी की वजह से महिलाओं की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. जिन पर ध्यान देने की जरुरत है. उन्होंने अनुरोध किया है कि इस मामले को देखें और अस्पतालों को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी करसिजेरियन डिलीवरी का प्रतिशत सार्वजनिक करना बाध्यकारी बनाया जाए.

कोट-

हमारे अस्पताल में प्रत्येक सिजेरियन केस का ऑडिट होता है. इसलिए यहां पर जरूरी होने पर ही सिजेरियन होता है.

डॉ. एसपी जैसवार, डीएमएस, केजीएमयू

किसी मरीज को क्या इलाज दिया जाता है यह डॉक्टर का डिसीजन है. सभी हॉस्पिटल्स को डिलीवरी की रिपोर्ट भेजना अनिवार्य है.

डॉ. जीएस बाजपेई, सीएमओ