अवमानना का दोषी पाये जाने पर हाई कोर्ट ने सुनायी सजा

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिरोजाबाद के शिकोहाबाद थाने में तैनात दरोगा अशोक कुमार को अवमानना का दोषी करार दिया है और एक हजार रुपये जुर्माना के साथ एक माह के कारावास की सजा सुनायी है. कोर्ट ने याची को सजा के खिलाफ अपील दाखिल करने का समय देते हुए सजा के अमल को एक माह के लिए स्थगित रखने का आदेश दिया है.

रोक के बाद भी किया गिरफ्तार

यह आदेश जस्टिस सुनीत कुमार ने रामपाल की अवमानना याचिका पर दिया है. कोर्ट ने शादी शुदा याचीगण के खिलाफ अपहरण के आरोप में दर्ज प्राथमिकी के तहत पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. इसके बावजूद आरोपी दरोगा ने कुमारी अंजू को गिरफ्तार कर लिया और बिना कोर्ट का आदेश लिए पास्को एक्ट के तहत गिरफ्तारी दिखायी और कोर्ट आदेश की अवहेलना से बचने के लिए कोर्ट का सहारा लेने का प्रयास किया. जब कि अन्य दस्तावेजों में याची बालिग थी. पास्को कोर्ट में बयान भी दर्ज हुआ. पीडि़ता 19 साल की है और अपनी मर्जी से शादी की है. कोर्ट ने विवेचना में सहयोग करने का आदेश देते हुए याचियों की पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. आदेश की जानकारी के बावजूद आरोपी दरोगा ने आदेश की अवहेलना की. जिस पर कोर्ट ने उसे अवमानना का दोषी करार देते हुए सजा सुनायी है.

कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर शाहजहांपुर के दरोगा को सजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाहजहांपुर के कटरा थाने में तैनात दरोगा विनीत मलिक को अवमानना का दोषी करार दिया है और एक हजार रुपये जुर्माने के साथ 15 दिन के कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने सजा के खिलाफ आरोपी, दरोगा को अपील का समय देते हुए एक माह तक सजा के अमल को स्थगित रखा है. यह आदेश जस्टिस सुनीत कुमार ने अर्जुन सिंह मौर्या की अवमानना याचिका पर दिया है. याचीगण ने अपनी मर्जी से शादी की. किन्तु लड़की के परिवार ने कटरा थाने में याची पर अपहरण करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी. जिस पर याचियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. कोर्ट ने याची को विवेचना में सहयोग करने का आदेश देते हुए पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और कहा विवेचना 3 माह में पूरी की जाय. कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए विपक्षी दरोगा ने याची की गिरफ्तारी कर ली. आरोपी ने बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि वह चार साल से पुलिस सेवा में है. आदेश समझने में गलती हो गयी. भविष्य में ऐसी गलती नहीं दुहरायेगा. किन्तु कोर्ट ने कोर्ट आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का दोषी माना और सजा पर सफाई रखने का मौका दिया. कोर्ट ने आरोपी की सफाई को संतोषजनक नहीं माना और जानबूझकर आदेश की अवहेलना का दोषी मानते हुए सजा सुनायी है.