आज देश भर में दत्तात्रेय जयंती मनाई जा रही है। भगवान दत्तात्रेय को त्रिमूर्ति (ब्रम्हा, विष्णु और महेश) का अवतार का माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति भगवान दत्तात्रेय की मन से पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। दत्तात्रेय जयंती अगहन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है और इस बार 11 दिसंबर को यह तिथि पड़ रही है। आइये, भगवान दत्तात्रेय से जुड़ी कुछ खास बातें जानें।

ऐसे हुआ भगवान दत्तात्रेय का जन्म

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय था जब तीन देवियों (सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती) को अपने पतिव्रता धर्म पर घमंड हो गया था। भगवान विष्णु ने उनके अभिमान को देखकर एक लीला रची। उनके इशारे पर नारद जी ने तीनों लोकों का भ्रमण करने के बाद तीनों देवियों के सामने अनसूया के पतिव्रता धर्म की खूब तारीफ कर दी। इस बात को सुनने के बाद देवियों ने अपने पतियों से अनसूया के पतिधर्म की परीक्षा लेने का जिद कर दिया। जिसके बाद त्रिदेव ब्राह्मण बनकर महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंच गए, उस समय महर्षि अत्रि घर पर नहीं थे।

अनसूया ने अपने तबोबल से त्रिदेव को बना दिया शिशु

तीनों को देखकर अनसूया उनके पास पहुंची। वे उनका स्वागत करने के लिए आगे बढ़ी तो उन ब्राह्मणों ने कहा कि जब तक वे उनको अपनी गोद में बैठाकर भोजन नहीं कराएंगी, तब तक वे उनकी मेजबानी को स्वीकार नहीं करेंगे। इस शर्त को सुनकर अनसूया चिंतित हो गईं। फिर उन्होंने अपने तपोबल से उन ब्राह्मणों की सच्चाई जानी। फिर, भगवान विष्णु और अपने पति अत्रि को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उनका पतिव्रता धर्म सच है तो से तीनों ब्राह्मण 6 महीने के बच्चे& बन जाएं। अनसूया ने अपने तपोबल से त्रिदेवों को बच्चा बना दिया। फिर अनसूया ने उन्हें अपनी गोद में बैठाकर दूध पिलाया और उन तीनों को पालने लगीं। दूसरी ओर, तीनों देवियां अपने पतियों के वापस न आने से चिंतित हो गईं। फिर, नारद जी ने उन्हें सब कुछ बताया। इसके बाद तीनों देवियों को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। उन तीनों देवियों ने अनसूया से माफी मांगी और अपने पतियों को फिर से अपने वेश में लाने का आग्रह किया।

त्रिदेव ने पूरी की अनसूया की इच्छा

इसके बाद अनसूया ने अपने तबोबल से फिर उन्हें पहले के रूप में ला दिया। इससे खुश होकर त्रिदेव ने उनसे वरदान मांगने के लिए कहा, फिर अनसूया ने तीनों देवों को पुत्र के रूप में पाने का वरदान मांगा। त्रिदेव ने उनकी इच्छा पूरी कर दी। बाद में माता अनसूया के गर्भ से भगवान विष्णु दत्तात्रेय, भगवान शिव दुर्वासा और ब्रम्हा चंद्रमा के रूप में जन्म लिए।

&पूजा करने का समय

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - दिसम्बर 11, 2019 को सुबह 10:59 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त - दिसम्बर 12, 2019 को सुबह 10:42 बजे

Posted By: Mukul Kumar